लाइफ स्टाइल

सावधान! मोटापा भी बन सकता है किडनी का दुश्मन

nidhi
19 Sept 2026 12:49 PM IST
सावधान! मोटापा भी बन सकता है किडनी का दुश्मन
x
बिना डायबिटीज भी किडनी को नुकसान
नई दिल्ली: मोटापा केवल डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किडनी की सेहत पर भी असर डाल सकता है। एम्स दिल्ली से जुड़ी एक स्टडी में मोटापे और किडनी की कार्यक्षमता के बीच संबंध पर ध्यान खींचा गया है। खास बात यह है कि डायबिटीज नहीं होने की स्थिति में भी अधिक वजन या मोटापा किडनी के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
आमतौर पर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को किडनी की बीमारी के प्रमुख जोखिम कारकों में गिना जाता है। लेकिन मोटापा शरीर में कई ऐसे बदलाव पैदा कर सकता है, जिनसे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। शरीर का वजन बढ़ने के साथ किडनी को अधिक काम करना पड़ सकता है। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर उसकी कार्यक्षमता प्रभावित होने का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मोटापे की स्थिति में शरीर में सूजन, हार्मोनल बदलाव और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी गड़बड़ियां भी देखने को मिल सकती हैं। ये परिस्थितियां किडनी की महीन रक्त वाहिकाओं और फिल्टरिंग सिस्टम को प्रभावित कर सकती हैं। यही कारण है कि किडनी की सुरक्षा के लिए केवल ब्लड शुगर पर नजर रखना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि शरीर के वजन और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना भी जरूरी है।
किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती। कई लोगों को समस्या का पता तब चलता है, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। पैरों या चेहरे पर सूजन, पेशाब में बदलाव, अत्यधिक थकान और भूख कम लगने जैसे लक्षण किडनी की समस्या से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन इन लक्षणों के कई अन्य कारण भी संभव हैं। इसलिए जांच के बिना किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मोटापे से बचने के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि को महत्वपूर्ण मानते हैं। अधिक नमक, अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड और ज्यादा कैलोरी वाले भोजन का सेवन सीमित करना वजन नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की समय-समय पर जांच भी उपयोगी है।
यदि किसी व्यक्ति को पहले से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या किडनी रोग का पारिवारिक इतिहास है तो डॉक्टर की सलाह पर किडनी की जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है। सामान्य तौर पर रक्त में क्रिएटिनिन, अनुमानित ईजीएफआर और पेशाब में एल्ब्यूमिन जैसी जांचों से किडनी की कार्यक्षमता का आकलन किया जाता है।
यह अध्ययन एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि किडनी की सेहत को केवल डायबिटीज से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। स्वस्थ वजन बनाए रखना पूरे शरीर के साथ किडनी की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
Next Story