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लाइफ स्टाइल
जॉब हो या खुद का बिज़नेस, Work-Life Balance को करें प्राथमिकता
Saba Naaz
14 Jun 2025 7:29 PM IST

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Lifestyle लाइफस्टाइल : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में एक सवाल अक्सर हमारे सामने खड़ा होता है- क्या हम अपने काम और पर्सनल लाइफ के बीच सही बैलेंस (Work-Life Balance) बना पा रहे हैं? बता दें, बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स से लेकर स्टार्टअप्स में जुटे युवा तक, सब इस उलझन से जूझ रहे हैं।
काम में सफलता पाने की दौड़ में कहीं हम अपने परिवार, सेहत और मानसिक शांति को तो नहीं खो रहे? आइए, इस आर्टिकल में विस्तार से जानते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर हम काम में इतने उलझ जाते हैं कि अपना ख्याल रखना ही भूल जाते हैं। सुबह की मीटिंग से लेकर देर रात के ईमेल तक, ऐसा लगता है मानो पूरी लाइफ सिर्फ ऑफिस के इर्द-गिर्द घूम रही है। लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन ने लिंक्डइन के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कर्मचारियों से कहा था कि वे रात का खाना परिवार के साथ खाने के बाद लैपटॉप खोलें और फिर से काम पर लग जाएं।
दरअसल, यह सोच उस दौर की है जब कंपनी खड़ी की जा रही थी और हर मिनट कीमती था। इस विचार का मूल भाव था कि काम में पूरी तरह डूब जाना ही सफलता की कुंजी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या हमेशा ऐसी सोच सही होती है? बहुत से लोगों का मानना है कि अगर आप कोई कंपनी शुरू कर रहे हैं या किसी बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं, तो आपको पर्सनल लाइफ छोड़ देनी चाहिए, लेकिन सच्चाई यह है कि थके हुए दिमाग से कभी भी बड़ी सोच नहीं निकलती। जो लोग सही समय पर ब्रेक लेना जानते हैं, वही लंबे समय तक टिकते हैं। कोई भी सपना, कोई भी करियर तभी सफल होता है जब आप खुद मेंटली और फिजिकली हेल्दी हों और इसके लिए जरूरी है कि आप काम से अलग भी कुछ समय निकालें- अपने परिवार, दोस्तों और खुद के लिए।
कई बार हम सोचते हैं कि थोड़ा और काम कर लें, तो प्रमोशन जल्दी मिलेगा या कंपनी तेजी से बढ़ेगी, लेकिन अगर इस चक्कर में हम अपनों के साथ बिताने वाला समय खो दें, तो क्या वो तरक्की सच में खुशी लाएगी? वर्क-लाइफ बैलेंस का मतलब यह नहीं कि आप बड़े-बड़े सपने देखना बंद कर दें या मेहनत करना छोड़ दें, बल्कि इसका मतलब है कि आप समझदारी से समय का बंटवारा करें- कब आपको पूरी एनर्जी से काम करना है और कब खुद को और अपनों को समय देना है। आज कई कंपनियां भी इस दिशा में सोचने लगी हैं- फ्लेक्सी टाइम, वर्क फ्रॉम होम, मेंटल हेल्थ डे जैसी पहलें इसका उदाहरण हैं, लेकिन आखिरकार, यह जिम्मेदारी हमारी अपनी है कि हम अपनी लाइफ को बैलेंस रखें।
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