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नवरात्र में फलाहार से पहले सावधान, ऐसे पहचानें खराब कुट्टू का आटा

nidhi
11 Oct 2026 10:53 AM IST
नवरात्र में फलाहार से पहले सावधान, ऐसे पहचानें खराब कुट्टू का आटा
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कुट्टू का आटा असली है या खराब
शारदीय नवरात्र में व्रत रखने वाले लोग फलाहार के साथ कुट्टू के आटे से बनी पूड़ी, पकौड़ी और दूसरी चीजें खाते हैं। ऐसे में आटे की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। खराब तरीके से रखा गया, पुराना या फफूंद से दूषित कुट्टू का आटा सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने त्योहारों के दौरान कुट्टू, सिंघाड़े के आटे और व्रत में इस्तेमाल होने वाले दूसरे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखने की सलाह दी है।
सिर्फ आटे का रंग या बनावट देखकर उसकी शुद्धता की पूरी गारंटी नहीं मिलती। हालांकि, कुछ आसान सावधानियों से आप संदिग्ध आटे की पहचान कर सकते हैं और खराब खाद्य सामग्री के सेवन से बच सकते हैं।
1. सबसे पहले आटे का रंग, गंध और बनावट देखें
कुट्टू का आटा खरीदने या इस्तेमाल करने से पहले उसकी गंध और बनावट पर ध्यान दें। अगर आटे से सीलन, बासीपन या असामान्य गंध आ रही है, उसमें कीड़े दिखाई दे रहे हैं या फफूंद जैसी परत नजर आ रही है, तो उसका इस्तेमाल न करें।
आटे में नमी, असामान्य गांठें या रंग में स्पष्ट बदलाव भी खराब भंडारण का संकेत हो सकते हैं। हालांकि, केवल देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आटे में मिलावट हुई है या नहीं। कुछ हानिकारक पदार्थ बिना किसी स्पष्ट बदलाव के भी मौजूद हो सकते हैं।
2. आटे को छानकर करें शुरुआती जांच
घर पर आटे को साफ छलनी से छानकर देख सकते हैं। इससे उसमें मौजूद मोटे बाहरी कण, कीड़े या दूसरी दिखाई देने वाली अशुद्धियां नजर आ सकती हैं।
अगर आटे में रेत जैसे कण, कीड़े या अन्य संदिग्ध चीजें दिखें, तो उसे खाने में इस्तेमाल न करें। लेकिन ध्यान रखें कि छानने से सभी प्रकार की मिलावट, रासायनिक पदार्थ या फफूंद से बने विषैले तत्व नहीं निकलते। इसलिए आटा साफ दिखाई देने भर से उसे पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
3. पानी से जांच करते समय रखें सावधानी
कुछ घरेलू नुस्खों में एक गिलास पानी में थोड़ा कुट्टू का आटा डालकर उसके व्यवहार को देखने की सलाह दी जाती है। लेकिन आटे का पानी में नीचे बैठना या कुछ कणों का ऊपर तैरना अपने आप में मिलावट का पक्का प्रमाण नहीं है। अलग-अलग कणों और आटे के गुणों के कारण ऐसा हो सकता है।
इसलिए केवल पानी वाले परीक्षण के आधार पर आटे को शुद्ध या मिलावटी घोषित नहीं करना चाहिए। किसी संदिग्ध खाद्य पदार्थ की निश्चित जांच के लिए खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला की जरूरत पड़ सकती है।
4. पैकेट खरीदते समय लेबल जरूर पढ़ें
कुट्टू का आटा खरीदते समय सीलबंद पैकेट को प्राथमिकता दें। पैकेट पर निम्न जानकारियां जांचें:
- पैकिंग और उपयोग की अंतिम तारीख: पुराना या लंबे समय तक गलत तरीके से रखा आटा न खरीदें।
- FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण नंबर: इसकी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए।
- पैकेट की स्थिति: फटा हुआ, नम, खुला या संदिग्ध पैकेट न लें।
- भंडारण की स्थिति: खुले में धूल, नमी या कीड़ों के संपर्क में रखा आटा खरीदने से बचें।
FSSAI खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए उपभोक्ताओं को जागरूक करता है और संदिग्ध उत्पादों की जांच के लिए प्रयोगशाला की सुविधा भी उपलब्ध है।
5. पुराना या फफूंद लगा आटा क्यों हो सकता है खतरनाक?
कुट्टू का आटा यदि लंबे समय तक नमी या खराब परिस्थितियों में रखा जाए, तो उसमें फफूंद लग सकती है। कुछ प्रकार की फफूंद ऐसे विषैले तत्व पैदा कर सकती हैं, जिन्हें सामान्य रूप से देखकर या पकाने से पूरी तरह पहचाना नहीं जा सकता।
FSSAI ने त्योहारों के दौरान कुट्टू के आटे से जुड़ी खाद्य विषाक्तता की घटनाओं को देखते हुए पुराने स्टॉक, फफूंद से दूषित सामग्री और अनुचित भंडारण पर विशेष ध्यान देने को कहा है। इसलिए केवल मिलावट ही नहीं, बल्कि आटे की ताजगी और भंडारण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
अगर आटा संदिग्ध लगे, तो उसे चखकर जांचने की कोशिश न करें और न ही उसे पकाकर इस्तेमाल करें। बेहतर है कि उसे अलग रख दें और विक्रेता को इसकी सूचना दें।
6. मिलावट का शक हो तो कहां करें शिकायत?
यदि आपको लगता है कि बाजार में बेचा जा रहा कुट्टू का आटा मिलावटी, खराब या असुरक्षित है, तो अपने क्षेत्र के खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर खाद्य पदार्थ का नमूना अधिकृत प्रयोगशाला में जांच के लिए दिया जा सकता है।
नवरात्र में व्रत के दौरान अपनी सेहत का ध्यान रखना जरूरी है। विश्वसनीय विक्रेता से ताजा आटा खरीदें, उसे सूखी और साफ जगह पर रखें और किसी भी तरह की असामान्य गंध, नमी या फफूंद दिखने पर उसका सेवन न करें।
ध्यान रखें: घर पर की जाने वाली जांच केवल शुरुआती संकेत दे सकती है। आटे की शुद्धता और सुरक्षा की निर्णायक पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही हो सकती है।
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