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बप्पा और लड्डू का खास रिश्ता, जानिए पुराणों का उल्लेख

Saba Naaz
22 Aug 2025 4:52 PM IST
बप्पा और लड्डू का खास रिश्ता, जानिए पुराणों का उल्लेख
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Lifestyle लाइफस्टाइल : गणेश चतुर्थी 2025 का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। बप्पा के स्वागत के लिए भव्य पंडाल, सुंदर मूर्तियाँ और स्वादिष्ट प्रसाद तैयार किए जा रहे हैं।
हर साल की तरह इस बार भी मोदक प्रसाद का मुख्य आकर्षण बना हुआ है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बप्पा को सिर्फ मोदक ही नहीं, लड्डू भी उतने ही प्रिय हैं? मोदक को 'गणेश जी का प्रिय भोग' माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने गणेश जी को घर के कामों से मुक्त करके उन्हें एक विशेष मोदक दिया था। उस मोदक को खाने के बाद
बप्पा को दिव्य ज्ञान
की प्राप्ति हुई। तभी से मोदक को बुद्धि और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है — और यही कारण है कि गणेश चतुर्थी पर उन्हें 21 मोदक चढ़ाए जाते हैं। लड्डू भी बप्पा के दूसरे सबसे प्रिय भोग माने जाते हैं।
अक्सर उनकी मूर्तियों में उन्हें लड्डू पकड़े हुए दर्शाया जाता है, जिसे 'मोदक' की तरह ही विशेष महत्व दिया जाता है। स्कंद पुराण और गणेश पुराण में वर्णन है कि गणपति को ‘लड्डूओं का स्वामी’ कहा गया है। उनका प्रिय नाम 'लड्डूक' भी इसी वजह से पड़ा। मोदक और लड्डू — दोनों ही मिठाइयाँ न सिर्फ स्वाद में खास हैं, बल्कि बप्पा के व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं का प्रतीक भी हैं। जहाँ मोदक ज्ञान का प्रतीक है, वहीं लड्डू आनंद और समृद्धि का। इस पर्व पर दोनों का भोग चढ़ाना भक्तों के लिए शुभ माना जाता है।
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