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लाइफ स्टाइल
सर्दियों में रूखी त्वचा और थकान से राहत दिलाएगा आयुर्वेद, जानें आसान उपाय
nidhi
5 Nov 2026 2:43 PM IST

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ठंड में शरीर को स्वस्थ रखने के आयुर्वेदिक तरीके
सर्दियों का मौसम अपने साथ एक आरामदायक, ठंडा और सुखद माहौल लेकर आता है। हालाँकि, यह आपके स्वास्थ्य, मन, त्वचा और बालों पर भी असर डालता है। आयुर्वेद में पूरे शरीर को ध्यान में रखकर इलाज किया जाता है। जानें कि यह मौसम आप पर कैसे असर डालता है, स्वस्थ रहने के लिए आयुर्वेदिक तरीके क्या हैं, और इसके लिए पतंजलि के कौन से उत्पाद इस्तेमाल करने चाहिए।
सर्दियों का पूरे शरीर पर असर
ठंड के कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे अंगों तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और दिल पर दबाव पड़ता है। दिन छोटे होने के कारण नींद का चक्र (स्लीप साइकिल) बिगड़ जाता है। घर के अंदर रहने से वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दिन छोटे होने से हमारी बायोलॉजिकल क्लॉक और शरीर में कोर्टिसोल व मेलाटोनिन बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। इससे सोने और जागने में दिक्कत होती है और अक्सर सुस्ती महसूस होती है।
ठंडे और सूखे मौसम के कारण त्वचा की नमी खत्म हो जाती है, जिससे वह रूखी हो जाती है। कम तापमान में त्वचा में तेल (ऑयल) का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे कोशिकाओं की सुरक्षा कमजोर पड़ जाती है। इससे त्वचा में जलन होती है और एक्जिमा जैसी पुरानी त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। धूप कम मिलने से त्वचा को पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिल पाता, जो कोशिकाओं की मरम्मत और ऊतकों (टिश्यू) को फिर से स्वस्थ बनाने के लिए बहुत जरूरी है। कम नमी के कारण बालों की नमी खत्म हो जाती है, जिससे उनका लचीलापन कम हो जाता है। बाल कमजोर होकर टूटने लगते हैं और उनमें 'स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी' (static electricity) पैदा हो सकती है। रूखा और ठंडा मौसम स्कैल्प (सिर की त्वचा) को भी प्रभावित करता है, जिससे डैंड्रफ और जलन की समस्या हो सकती है।
आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में कफ और वात दोष का प्रभाव अधिक होता है। वात दोष के असंतुलित होने से जोड़ों में अकड़न और दर्द हो सकता है, इम्युनिटी कम होने से सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, और त्वचा फटने लगती है—खासकर होंठों और पैरों के आसपास।
आयुर्वेद में पूरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए समग्र (holistic) तरीके बताए गए हैं। इन सुझावों को समझें और जानें कि पतंजलि के कौन से उत्पाद आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं।
सर्दियों की समस्याओं से निपटने के आयुर्वेदिक तरीके
शरीर के लिए: ताज़ा, भारी, तैलीय और गर्म भोजन करें। अपने आहार में मौसमी चीज़ें शामिल करें, जैसे कि साबुत अनाज (चावल और गेहूं), मोटे अनाज (बाजरा और ज्वार), जड़ वाली सब्जियां (चुकंदर, गाजर और शकरकंद), सूखे मेवे और नट्स (बादाम, खजूर, अंजीर, अखरोट और किशमिश), और स्वस्थ वसा (जैसे घी, तिल का तेल और मक्खन)। अदरक, काली मिर्च, आंवला, इलायची, अश्वगंधा, तुलसी, दालचीनी, हल्दी और लौंग जैसे गर्म तासीर वाले मसालों और जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल करें। ये चीजें शरीर को गर्माहट देती हैं, रक्त संचार, ऊर्जा और इम्युनिटी को बढ़ाती हैं, रूखेपन और जोड़ों की समस्याओं को दूर करती हैं, और साथ ही इम्युनिटी व सांस संबंधी स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। मन के लिए: अपने सोने और जागने के समय को नियमित करें। आराम पाने, तरोताजा महसूस करने और सर्दियों में होने वाली समस्याओं जैसे घबराहट (एंग्जायटी) और सुस्ती से निपटने के लिए 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लें। ध्यान (मेडिटेशन) और योग मन और शरीर को शांत रखते हैं। मानसिक थकान और अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए 'डिजिटल डिटॉक्स' (कुछ समय के लिए गैजेट्स से दूरी) अपनाएं।
त्वचा के लिए: बहुत गर्म पानी से नहाने से बचें, क्योंकि इससे त्वचा की नमी खत्म हो जाती है। त्वचा को मॉइस्चराइज रखने के लिए तेल युक्त साबुन का इस्तेमाल करें। नहाने से 30 मिनट पहले शरीर पर तेल से मालिश करें, जिससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और त्वचा को नमी मिलती है। नहाने के बाद त्वचा को मॉइस्चराइज करें ताकि वह हाइड्रेटेड रहे, नमी और pH बैलेंस बना रहे, और रूखापन, पपड़ी जमना या जलन जैसी समस्याएं न हों। इसके लिए आप केसर, दूध, शहद, शिया बटर, तिल का तेल, नारियल तेल, कुमकुमादि तेल या घी का उपयोग कर सकते हैं।
बालों के लिए: बालों और स्कैल्प को पोषण देने के लिए नियमित रूप से गुनगुने तेल से मालिश करें। नारियल, तिल, बादाम या भृंगराज जैसे तेलों का इस्तेमाल करें और साथ ही हल्के आयुर्वेदिक शैम्पू और कंडीशनर का उपयोग करें। मेथी के बीज, आंवला, शिकाकाई, रीठा, गुड़हल (हिबिस्कस), एलोवेरा और शहद जैसी आयुर्वेदिक चीजों का इस्तेमाल करें। इससे बालों का सफेद होना रुकता है, स्कैल्प का रूखापन दूर होता है, बालों का टूटना और झड़ना कम होता है, बालों को नमी मिलती है, रूखापन या उलझन (फ्रिज़) कम होती है और बाल घने बनते हैं।
पतंजलि सर्दियों की समस्याओं से निपटने के लिए कई आयुर्वेदिक उत्पाद पेश करता है। 'पतंजलि बाजरा आटा' (500 ग्राम) पारंपरिक गेहूं के आटे का एक पौष्टिक और ग्लूटेन-मुक्त विकल्प है। 'पतंजलि आंवला अचार' (500 ग्राम और 1 किलो) खाने का स्वाद बढ़ाता है। यह विटामिन-C से भरपूर आंवले से बना है। इसके अलावा, आप 'पतंजलि खजूर' (500 ग्राम) का सेवन कर सकते हैं, जो पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और इनमें कोई प्रिजर्वेटिव नहीं होता है।
मन और शरीर के लिए, 'पतंजलि स्पेशल च्यवनप्राश' (500 ग्राम और 1 किलो) मौसमी बीमारियों को रोकने के साथ-साथ आपकी सेहत को भी दुरुस्त रखता है। इसमें आंवला, केसर, गोखरू, गिलोय, हरड़ और अन्य कई गुणकारी तत्व शामिल हैं। शरीर, सिर की त्वचा (स्कैल्प) और बालों की मालिश के लिए पतंजलि रोगन बादाम शीरीन (60 मिली और 150 मिली) का इस्तेमाल करें। यह त्वचा को नमी देता है, दिमाग को ठंडक पहुँचाता है और बालों को स्वस्थ रखता है।
पतंजलि केश कांति शिकाकाई हेयर क्लींजर (180 मिली) रूखेपन को दूर करता है, बेजान बालों को मुलायम बनाता है और उनकी उलझन सुलझाता है। यह स्कैल्प की समस्याओं को ठीक करता है, स्कैल्प से अतिरिक्त तेल हटाता है और बालों में प्राकृतिक उछाल (बाउंस) वापस लाता है। यह रूखे और बेजान बालों के लिए बहुत अच्छा है। इसमें शिकाकाई, भृंगराज, रीठा, आंवला और तुलसी शामिल हैं।
त्वचा की देखभाल के लिए, पतंजलि शिया-सैफ्रन क्रीम बाथिंग बार (375 ग्राम) एक बेहतरीन और असरदार विकल्प है। इसमें शिया बटर के साथ-साथ नारियल, अरंडी, ओट्स, अंगूर, पुदीना, शहद और केसर जैसे तेल शामिल हैं। क्रीम पर आधारित यह साबुन त्वचा को हाइड्रेट और मुलायम बनाता है, और गहराई से साफ करता है।
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