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इन कारणों से बढ़ सकती है एलर्जी की समस्या

Kanchan Paikara
5 July 2026 3:48 PM IST
इन कारणों से बढ़ सकती है एलर्जी की समस्या
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Lifestyle लाइफ स्टाइल : हम अक्सर मान लेते हैं कि एलर्जी सिर्फ धूल-मिट्टी या कुछ खास खाने-पीने की चीजों से होती है। इसी सोच के चलते लोग धूल से बचने की कोशिश करते हैं या खानपान में सावधानी बरतते हैं, लेकिन इसके बावजूद कई लोगों को बार-बार छींक आना, नाक बंद होना, आंखों में जलन या त्वचा पर लाल चकत्ते जैसी समस्याएं बनी रहती हैं।
दरअसल, विशेषज्ञों के अनुसार एलर्जी के पीछे सिर्फ बाहरी कारण ही नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे छिपे हुए कारण भी होते हैं, जिन पर आमतौर पर ध्यान नहीं जाता। पीजीआई चंडीगढ़ की एचओडी, डॉ. जयमंती बख्शी के अनुसार,
शरीर की एलर्जी
प्रतिक्रिया कई बार ऐसे ट्रिगर्स से भी शुरू हो जाती है जो दिखने में मामूली लगते हैं, लेकिन असर काफी बड़ा डालते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि सबसे पहले घर के अंदर की हवा एक बड़ा कारण हो सकती है। बंद कमरों में लंबे समय तक रहना, वेंटिलेशन की कमी और एयर सर्कुलेशन का सही न होना एलर्जी को बढ़ा सकता है। इसके अलावा बिस्तर, तकिए और पर्दों में जमा धूल के कण भी लगातार एलर्जी को ट्रिगर करते रहते हैं।
दूसरा बड़ा कारण पालतू जानवरों के बाल और उनकी त्वचा के कण हो सकते हैं। कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह संवेदनशील लोगों में लगातार छींक और सांस की परेशानी पैदा कर सकता है।
तीसरा कारण है प्रदूषण और धुआं। वाहन का धुआं, सिगरेट का धुआं और औद्योगिक प्रदूषण नाक और फेफड़ों को प्रभावित करता है, जिससे एलर्जी की समस्या बढ़ जाती है।
चौथा कारण मौसम में अचानक बदलाव है। गर्मी से ठंड या ठंड से गर्मी में जाने पर शरीर को एडजस्ट करने में समय लगता है, जिससे एलर्जी के लक्षण उभर सकते हैं।
पांचवां कारण है स्ट्रेस यानी मानसिक तनाव। विशेषज्ञों के अनुसार तनाव का सीधा असर इम्यून सिस्टम पर पड़ता है, जिससे शरीर एलर्जी के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाता है।
छठा कारण कुछ कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स और केमिकल युक्त चीजें भी हो सकती हैं। स्किन क्रीम, परफ्यूम या डिटर्जेंट में मौजूद केमिकल कई लोगों में एलर्जी की प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं।
डॉक्टरों का सुझाव है कि अगर बार-बार छींक, नाक बंद या त्वचा संबंधी समस्याएं हो रही हैं, तो केवल बाहरी कारणों पर ध्यान देने की बजाय इन छिपे हुए ट्रिगर्स को भी समझना जरूरी है। सही पहचान और सावधानी से एलर्जी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
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