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Memory बचाने की दिशा में बड़ा कदम, नई दवा से धीमी हुई गिरावट

Ratna Netam
15 July 2026 7:16 PM IST
Memory बचाने की दिशा में बड़ा कदम, नई दवा से धीमी हुई गिरावट
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New Delhi नई दिल्ली : अल्जाइमर रोग के शुरुआती चरण से जूझ रहे मरीजों के लिए एक नए अध्ययन ने उम्मीद की किरण दिखाई है। परीक्षणाधीन दवा डिरानर्सेन के क्लीनिकल ट्रायल में ऐसे सकारात्मक संकेत मिले हैं कि यह दवा मरीजों में याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता में होने वाली गिरावट की रफ्तार को धीमा कर सकती है। इसके अलावा, इस दवा ने अल्जाइमर से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रोटीन के स्तर को कम करने में भी सफलता दिखाई है।

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन हॉस्पिटल्स (यूसीएलएच) की न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ प्रोफेसर के अनुसार, डिरानर्सेन के परीक्षण में शामिल मरीजों में मानसिक क्षमता में गिरावट अपेक्षाकृत धीमी देखी गई। उन्होंने बताया कि यह दवा अभी परीक्षण के चरण में है और इसके तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे के परीक्षणों में भी इसके परिणाम सफल रहते हैं तो अल्जाइमर के इलाज में यह एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकती है।

डिरानर्सेन का परीक्षण सीईएलआईए नामक वैश्विक अध्ययन के तहत किया गया। इस अध्ययन में शुरुआती चरण के अल्जाइमर से पीड़ित 416 मरीजों को शामिल किया गया था। करीब 18 महीने तक चले इस ट्रायल में दवा की अलग-अलग खुराकों का परीक्षण किया गया। इनमें 60 मिलीग्राम की खुराक लेने वाले मरीजों में सबसे बेहतर परिणाम देखने को मिले।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, 60 मिलीग्राम डोज लेने वाले मरीजों में प्लेसीबो समूह की तुलना में बीमारी बढ़ने की गति काफी कम रही। अलग-अलग चिकित्सा जांचों में यह कमी 26 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह परिणाम अल्जाइमर के इलाज में काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

अल्जाइमर रोग में टाउ प्रोटीन की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। यह प्रोटीन मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने और बीमारी को आगे बढ़ाने से जुड़ा होता है। डिरानर्सेन को इसी टाउ प्रोटीन के निर्माण की प्रक्रिया को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि डिरानर्सेन लेने वाले मरीजों के मस्तिष्कमेरु द्रव (सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूइड) में मौजूद कुल टाउ प्रोटीन का स्तर 50 से 65 प्रतिशत तक कम हुआ। इसके अलावा, पहली बार टाउ प्रोटीन को निशाना बनाने वाली किसी दवा के परीक्षण में पीईटी स्कैन के जरिए मस्तिष्क में टाउ से जुड़े बदलावों में भी कमी देखी गई।

शोधकर्ताओं का कहना है कि सीईएलआईए अध्ययन के परिणाम इस बात के संकेत देते हैं कि टाउ प्रोटीन के स्तर को कम करने से मरीजों को वास्तविक चिकित्सीय लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, डिरानर्सेन से मिले परिणाम अल्जाइमर उपचार के क्षेत्र में अब तक के सबसे उत्साहजनक निष्कर्षों में शामिल हैं और इसी आधार पर इसे बड़े स्तर के अगले परीक्षणों के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है।

अध्ययन में दवा की सुरक्षा को लेकर भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। ज्यादातर मरीजों में इसके दुष्प्रभाव हल्के या मध्यम स्तर के रहे। खास बात यह रही कि अध्ययन पूरा करने वाले 90 प्रतिशत से अधिक मरीजों ने लंबे समय तक चलने वाले अगले चरण के परीक्षण में शामिल होने की इच्छा जताई।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि डिरानर्सेन अभी आम इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं है और इसके प्रभाव व सुरक्षा की पुष्टि के लिए बड़े स्तर पर तीसरे चरण के परीक्षण जरूरी हैं। यदि यह दवा सफल साबित होती है तो अल्जाइमर रोग के उपचार में एक नई दिशा मिल सकती है।

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