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बच्चों की डाइट में नमक को लेकर बड़ा सवाल, डॉक्टर ने बताया समय

Lifestyle लाइफ स्टाइल : छोटे बच्चों के आहार को लेकर माता-पिता अक्सर असमंजस में रहते हैं कि उन्हें कब से नमक और चीनी देना शुरू किया जाए। कई बार जल्दी ही बच्चे के खाने में नमक और चीनी शामिल कर दिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत बच्चे की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इस विषय पर पीडियाट्रिशियन डॉ. रवि मलिक ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो साझा कर महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
डॉक्टर के अनुसार, छोटे बच्चों को बहुत कम उम्र में नमक और चीनी देने से बचना चाहिए, क्योंकि उनका शरीर अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता। शुरुआती महीनों और वर्षों में बच्चे के किडनी और पाचन तंत्र पर अतिरिक्त नमक का बोझ पड़ सकता है, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसी तरह, अधिक चीनी का सेवन भी बच्चों में मोटापा, दांतों की समस्या और अन्य बीमारियों का कारण बन सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिशुओं को लगभग 1 वर्ष की उम्र तक किसी भी प्रकार का अतिरिक्त नमक और चीनी नहीं देना चाहिए। इस दौरान बच्चे को केवल प्राकृतिक भोजन जैसे मां का दूध या फॉर्मूला मिल्क और उसके बाद धीरे-धीरे सॉलिड फूड दिया जाना चाहिए, जिसमें किसी भी तरह का अतिरिक्त नमक या चीनी शामिल न हो।
डॉ. रवि मलिक ने अपने वीडियो में यह भी बताया कि माता-पिता अक्सर बच्चे के खाने को स्वादिष्ट बनाने के लिए उसमें नमक या चीनी मिला देते हैं, लेकिन यह आदत धीरे-धीरे बच्चे के स्वाद की प्राथमिकता को बदल सकती है। इससे बच्चा आगे चलकर अधिक नमक और मीठे खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित हो सकता है, जो लंबे समय में असंतुलित आहार का कारण बन सकता है।
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के शुरुआती जीवन में उसे प्राकृतिक स्वाद के साथ खाने की आदत डालना सबसे अच्छा होता है। सब्जियां, फल और घर का बना सादा भोजन बच्चे के लिए अधिक सुरक्षित और पौष्टिक माना जाता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, धीरे-धीरे सीमित मात्रा में नमक और चीनी को डाइट में शामिल किया जा सकता है, लेकिन हमेशा संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि माता-पिता पैकेज्ड फूड और प्रोसेस्ड स्नैक्स से बच्चों को दूर रखें, क्योंकि इनमें पहले से ही अधिक मात्रा में नमक और चीनी मौजूद होती है। इससे बच्चे की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।





