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ज़ोजिला टनल का अंतिम चरण नजदीक, Ladakh को सालभर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद

Ladakh लद्दाख : भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान सीमा पर अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करते हुए केंद्र सरकार का बहुप्रतीक्षित ज़ोजिला टनल प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण के करीब पहुंच गया है। यह परियोजना लद्दाख को हर मौसम में देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, इस 13.15 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण कार्य अब आखिरी खुदाई के चरण में पहुंच चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि मई के अंत तक “ब्रेकथ्रू” यानी दोनों ओर से खुदाई पूरी होकर टनल के दोनों सिरे आपस में जुड़ जाएंगे। यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण हाई-एल्टीट्यूड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है।
पूरा होने के बाद यह टनल कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में निर्बाध सड़क संपर्क प्रदान करेगी। इससे खतरनाक और बर्फ से ढके ज़ोजिला दर्रे को बायपास किया जा सकेगा, जो हर साल भारी बर्फबारी और एवलांच के कारण लगभग छह महीने बंद रहता है। इस टनल के जरिए यात्रा का समय भी काफी कम हो जाएगा, जिससे लोगों, सामान और जरूरी आपूर्ति की आवाजाही तेज और सुगम हो सकेगी।
इस परियोजना का महत्व केवल नागरिक सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका रणनीतिक महत्व भी बेहद बड़ा है। लद्दाख की सीमावर्ती और संवेदनशील स्थिति के कारण लंबे समय से सर्दियों में सैन्य आपूर्ति और तैनाती में कठिनाइयां आती रही हैं। टनल के शुरू होने से सालभर सैनिकों और सैन्य उपकरणों की निर्बाध आवाजाही संभव होगी, जिससे भारत की ऑपरेशनल क्षमता और तैयारियों में बड़ा सुधार होगा।
हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और लद्दाख के उपराज्यपाल ब्रिगेडियर बी. डी. मिश्रा के बीच हुई बैठक में इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में मौजूदा ज़ोजिला टॉप मार्ग की सुरक्षा चिंताओं पर भी चर्चा हुई, खासकर एवलांच और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए। अधिकारियों ने इस मार्ग पर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
यह चिंता हाल ही में हुए एक एवलांच हादसे के बाद और बढ़ गई है, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने इस कॉरिडोर की संवेदनशीलता को फिर से उजागर कर दिया है।
हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि टनल पूरी होने के तुरंत बाद यातायात के लिए उपलब्ध नहीं होगी। इसमें अभी वेंटिलेशन सिस्टम, सुरक्षा उपकरण और सड़क सतह निर्माण जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य बाकी हैं।
प्रोजेक्ट की समय-सीमा पहले ही संशोधित की जा चुकी है। अब इसके 2028 की शुरुआत तक पूरी तरह तैयार होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि कठिन भू-भौगोलिक परिस्थितियों और खराब मौसम ने कार्य की गति को प्रभावित किया है।
कुल मिलाकर, ज़ोजिला टनल का पूरा होना लद्दाख के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव साबित होगा, जो न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा बल्कि भारत की रणनीतिक और आर्थिक स्थिति को भी और अधिक सुदृढ़ बनाएगा।





