लद्दाख

अक्टूबर के पहले हफ्ते लद्दाख जा सकती है गृह मंत्रालय की टीम, LAB-KDA से होगी अहम वार्ता

Kavita2
30 Sept 2026 11:47 AM IST
अक्टूबर के पहले हफ्ते लद्दाख जा सकती है गृह मंत्रालय की टीम, LAB-KDA से होगी अहम वार्ता
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लेह। केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक टीम अक्टूबर के पहले सप्ताह में लद्दाख का दौरा कर सकती है। इस दौरान लेह एपेक्स बॉडी यानी LAB और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस यानी KDA के प्रतिनिधियों के साथ प्रस्तावित केंद्र-शासित प्रदेश स्तर की निर्वाचित संस्था और लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक लेह या कारगिल में आयोजित की जा सकती है।

प्रस्तावित बैठक पिछले कुछ महीनों से केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच चल रही बातचीत की अगली कड़ी होगी। इससे पहले 9 सितंबर को नई दिल्ली में गृह मंत्रालय के अधिकारियों और LAB-KDA के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई थी। उस बैठक में प्रस्तावित निर्वाचित निकाय के स्वरूप, संरचना और अधिकारों को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

गृह मंत्रालय ने बातचीत के दौरान लद्दाख के प्रतिनिधियों से प्रस्तावित संस्था के नाम, उसके सदस्यों की संख्या, प्रतिनिधित्व के स्वरूप और लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों यानी LAHDC के साथ उसके अधिकारों के बंटवारे जैसे मुद्दों पर सुझाव मांगे थे। LAB ने इन सवालों पर कानूनी विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श शुरू कर दिया है और अगले दौर की बैठक में अपने सुझाव देने की तैयारी कर रहा है।

वहीं KDA का रुख कुछ अलग रहा है। संगठन का कहना है कि पहले गृह मंत्रालय को प्रस्तावित व्यवस्था का स्पष्ट मसौदा पेश करना चाहिए, जिसके बाद वह अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव देगा। KDA के प्रतिनिधियों ने पहले भी कहा है कि बिना लिखित मसौदे के यह स्पष्ट नहीं हो सकता कि प्रस्तावित संस्था को वास्तव में कितने अधिकार दिए जाएंगे।

सितंबर की बैठक में केंद्र की ओर से Article 371 के तहत लद्दाख के लिए विशेष संवैधानिक व्यवस्था पर विचार की बात सामने आई थी। रिपोर्टों के मुताबिक संभावित नए प्रावधान को Article 371(K) के रूप में प्रस्तावित करने पर चर्चा हुई है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई अंतिम मसौदा सार्वजनिक नहीं किया गया है और संवैधानिक बदलाव के लिए आगे विस्तृत कानूनी और संसदीय प्रक्रिया की जरूरत होगी।

प्रस्तावित UT-स्तरीय संस्था को सीधे चुनाव के जरिए गठित करने पर व्यापक सहमति बनती दिखाई दी है। लद्दाख प्रशासन की ओर से भी कहा गया है कि सितंबर की बैठक में सीधे निर्वाचन के माध्यम से इस निकाय का गठन करने के विचार पर चर्चा हुई और प्रतिनिधियों ने इस दिशा में सहमति जताई।

अब सबसे अहम सवाल इस संस्था को मिलने वाले अधिकारों को लेकर है। गृह मंत्रालय की ओर से हुई चर्चा में भूमि, संस्कृति, भाषा, वन, पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधन और Article 240 के तहत केंद्र-शासित प्रदेश के लिए निर्धारित कुछ विषयों पर विधायी अधिकार देने की संभावना सामने आई है। LAB और KDA इससे आगे कार्यकारी, वित्तीय, बजटीय और योजना संबंधी अधिकार भी चाहते हैं।

लद्दाख के प्रतिनिधियों ने कानून-व्यवस्था और पुलिस पर अधिकार का मुद्दा भी उठाया है। उनकी मांग है कि प्रस्तावित लोकतांत्रिक संस्था केवल सलाहकार निकाय बनकर न रह जाए, बल्कि प्रशासनिक फैसलों पर उसका वास्तविक नियंत्रण हो। इस मुद्दे पर अभी केंद्र और प्रतिनिधियों के बीच पूर्ण सहमति नहीं बनी है।

LAB और KDA लंबे समय से लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा, संवैधानिक सुरक्षा, भूमि और रोजगार की सुरक्षा तथा अधिक लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की मांग करते रहे हैं। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र-शासित प्रदेश बनाया गया था। इसके बाद से क्षेत्र में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय अधिकारों को लेकर आंदोलन चलता रहा है।

केंद्र और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच 22 मई और 3 जुलाई की बैठकों में एक ऐसे विशेष शासन मॉडल पर सिद्धांततः चर्चा हुई थी, जिसके जरिए केंद्र-शासित प्रदेश स्तर पर निर्वाचित लोकतांत्रिक संस्था बनाई जा सके और भूमि, संस्कृति, रोजगार तथा पर्यावरण जैसे विषयों पर संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की जा सके।

हालांकि सितंबर की बैठक के बाद LAB और KDA के कुछ प्रतिनिधियों ने निराशा भी जाहिर की थी। उनका कहना था कि उन्हें उम्मीद थी कि केंद्र प्रस्तावित निर्वाचित संस्था का विस्तृत मसौदा सामने रखेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बजाय उनसे कई सवालों पर सुझाव देने को कहा गया। इसके बाद अक्टूबर की बैठक को बातचीत की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लद्दाख प्रशासन का कहना है कि किसी भी संवैधानिक सुरक्षा व्यवस्था को लागू करने के लिए विस्तृत कानूनी प्रक्रिया और व्यापक राजनीतिक सहमति की आवश्यकता होगी। संवैधानिक संशोधन होने की स्थिति में संसद की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

LAB और KDA ने यह भी कहा है कि प्रस्तावित निर्वाचित संस्था के गठन से पहले लद्दाख की शासन व्यवस्था, भूमि हस्तांतरण या प्रशासनिक ढांचे में कोई बड़ा और अपरिवर्तनीय बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। दोनों संगठनों का कहना है कि ऐसे किसी कदम से फिर आंदोलन की स्थिति बन सकती है।

अब अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित बैठक पर नजर टिकी है। यदि गृह मंत्रालय की टीम लद्दाख पहुंचती है तो बातचीत में प्रस्तावित UT-स्तरीय संस्था की संरचना, चुनाव की प्रक्रिया, अधिकारों का बंटवारा, LAHDC के साथ संबंध और संवैधानिक सुरक्षा जैसे मुद्दे केंद्र में रहेंगे।

इस बैठक को केंद्र और लद्दाख के बीच लंबे समय से चल रही राजनीतिक वार्ता में महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। आगे की बातचीत से यह स्पष्ट हो सकता है कि प्रस्तावित निर्वाचित संस्था केवल सीमित विधायी अधिकारों वाली होगी या उसे वित्तीय, कार्यकारी और प्रशासनिक शक्तियां भी दी जाएंगी।

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