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हीरो बनने का सपना टूटा तो खलनायक बनकर चमके, डॉन का नारंग बनकर कमल कपूर ने पाई खोई हुई पहचान

jantaserishta.com
21 Feb 2026 1:58 PM IST
हीरो बनने का सपना टूटा तो खलनायक बनकर चमके, डॉन का नारंग बनकर कमल कपूर ने पाई खोई हुई पहचान
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मुंबई: कहते हैं कि किस्मत में जो लिखा होता है, वह देर-सवेर मिल ही जाता है और ऐसा लम्हा हर किसी की जिंदगी में आता है। हिंदी सिनेमा में हीरो बनकर पर्दे पर चमकने वाला सपना हर कोई लेकर आता है। एक्टर कमल कपूर हीरो बनना चाहते थे लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
डॉन में 'नारंग' की भूमिका निभाने वाले विलेन तो हर किसी को याद होगा, जो डायलॉग के साथ-साथ अपनी आंखों से एक्टिंग करते थे। अभिनेता कमल कपूर की आंखें उन्हें खलनायक बनाने के लिए बिल्कुल परफेक्ट थीं।
22 फरवरी को पेशावर में जन्मे कमल कपूर फिल्मी बैकग्राउंड से आते थे, क्योंकि वे पृथ्वीराज कपूर की मौसी के बेटे थे। 40 से 50 के दशक में पृथ्वीराज कपूर ने हिंदी सिनेमा पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया था और कमल कपूर भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चलना चाहते थे। हिंदी सिनेमा में डेब्यू कराने में पृथ्वीराज कपूर ने अपने मौसेरे भाई की मदद की थी और जब उन्होंने 'पृथ्वी थिएटर' की नींव रखी थी, तो पहला नाटक उन्हीं के साथ किया। कमल कपूर के लिए यह उनके करियर का पहला ब्रेक था, जिसमें उन्हें भूरी आंखों की वजह से अंग्रेज का किरदार मिला था। जिसके बाद अभिनेता 1946 में फिल्म 'दूर चलें' और 1948 में आई 'आग' में दिखे। यह दोनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहीं।
बात सिर्फ यहीं खत्म नहीं हुई। अभिनेता कमल कपूर ने बतौर हीरो 21 फिल्मों में काम किया और लगभग सारी फिल्में पिट गईं। कमल कपूर समझ चुके थे कि हीरो बनना बेकार है, तो अब क्यों न फिल्में बनाई जाएं? बुरी तरह फ्लॉप फिल्म देने के बाद उन्होंने फिल्मों का निर्देशन और निर्माण करना शुरू किया। साल 1951 में उन्होंने 'कश्मीर' और 1954 में 'खैबर' नाम की फिल्म का निर्माण किया, लेकिन दोनों ही फिल्में इतनी बुरी तरीके से पिट गईं कि अभिनेता को अपनी गाड़ी तक बेचनी पड़ गई थी।
एक पुराने इंटरव्यू में खुद अभिनेता ने बताया कि कैसे दो फिल्में बनाने के बाद वे बर्बाद हो गए थे और सड़क पर आने की नौबत आ गई थी। जिसके बाद जो भी छोटे-मोटे रोल मिल रहे थे, वह भी मिलना बंद हो गए।लगातार नौ साल तक कोई काम नहीं मिला। वो दौर काटना मेरे लिए मुश्किल रहा था। 1965 में आई फिल्म 'जौहर महमूद इन गोवा' ने अभिनेता की किस्मत बदल दी क्योंकि इस फिल्म में वे पहली बार विलेन बने थे।
फिल्म कुछ खास नहीं कमा पाई लेकिन कमल कपूर के लिए संजीवनी साबित हुई और उसके बाद लगातार निगेटिव किरदार वाली फिल्में मिलने लगीं। उन्होंने फिल्मों में गुंडे, वकील और हीरो के दोस्त के भी किरदार किए लेकिन असल छाप 'डॉन' में नारंग के किरदार से मिली, जिसमें उनकी और अमिताभ बच्चन की जुगलबंदी ने लोगों के दिलों में खौफ पैदा कर दिया। अभिनेता ने अपने करियर में 500 से अधिक फिल्मों में काम किया और 'दीवार', 'पाकीजा', 'मर्द', और 'जागूं' जैसी फिल्मों में काम किया।
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