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मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता और मार्शल आर्टिस्ट विद्युत जामवाल अपनी फिटनेस और अनोखी गतिविधियों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस बार अभिनेता मुंबई के ऐतिहासिक छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के पास डमरू बजाते नजर आए। उन्होंने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया और बताया कि डमरू की लय उन्हें मानसिक नियंत्रण छोड़ने और विचारों को शांत करने का अनुभव देती है।
विद्युत ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह वीडियो साझा किया। वीडियो में वह पारंपरिक वाद्ययंत्र डमरू बजाते हुए दिखाई दिए। उनका यह अंदाज भारतीय परंपरा और मानसिक शांति के बीच संबंध को लेकर चर्चा में आ गया।
डमरू बजाते हुए विद्युत ने दिया खास संदेश
वीडियो में विद्युत जामवाल मुंबई के CSMT की पृष्ठभूमि में डमरू बजाते नजर आते हैं। अभिनेता ने डमरू बजाने के अनुभव को मानसिक नियंत्रण छोड़ने और स्वाभाविक लय के साथ आगे बढ़ने का तरीका बताया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि डमरू बजाना मन को नियंत्रण छोड़कर सहज प्रवाह में आने का अवसर देता है। इसकी लय में विचारों को विश्राम मिलता है और मन में स्थिरता का अनुभव होता है। अभिनेता का यह संदेश केवल संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच कुछ समय स्वयं के लिए निकालने और वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करने से भी जुड़ा है।
भगवान शिव से जुड़ा है डमरू का महत्व
भारतीय धार्मिक परंपराओं में डमरू का विशेष स्थान है। भगवान शिव को अक्सर हाथ में डमरू धारण किए हुए दर्शाया जाता है। यह छोटा वाद्ययंत्र अपनी विशिष्ट लय और ध्वनि के लिए जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में डमरू को सृजन, ऊर्जा और ब्रह्मांडीय लय का प्रतीक माना जाता है। पूजा-अर्चना और विभिन्न पारंपरिक आयोजनों में भी इसका इस्तेमाल होता है। डमरू बजाने के लिए हाथों की गति, ताल और ध्वनि के बीच तालमेल बनाना पड़ता है। इसी वजह से इसे बजाते समय व्यक्ति का ध्यान कुछ समय के लिए एक ही गतिविधि पर केंद्रित हो सकता है।
क्या डमरू बजाने से तनाव कम हो सकता है?
संगीत और लयबद्ध गतिविधियों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर कई अध्ययन किए गए हैं। शोध में पाया गया है कि समूह में ड्रम बजाने जैसी गतिविधियां कुछ लोगों में तनाव और चिंता के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकती हैं। एक छोटे अध्ययन में ड्रम बजाने के सत्र के बाद प्रतिभागियों के तनाव और चिंता से जुड़े मापों में कमी देखी गई। वहीं एक अन्य अध्ययन में दस सप्ताह तक समूह में ड्रम बजाने वाले प्रतिभागियों में चिंता, अवसाद के लक्षणों और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कुछ संकेतकों में सुधार पाया गया। ये अध्ययन मुख्य रूप से दूसरे प्रकार के ड्रम और समूह गतिविधियों पर आधारित हैं। इसलिए इनके नतीजों को सीधे डमरू बजाने के प्रमाणित चिकित्सकीय लाभ के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
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