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दिग्गज फिल्ममेकर सिंगीतम श्रीनिवास राव का निधन

Ashish verma
4 Oct 2026 2:33 PM IST
दिग्गज फिल्ममेकर सिंगीतम श्रीनिवास राव का निधन
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चेन्नई। भारतीय सिनेमा के दिग्गज फिल्ममेकर सिंगीतम श्रीनिवास राव के निधन से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्होंने 3 अक्टूबर की रात चेन्नई के कावेरी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते अस्पताल में इलाज करा रहे थे। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर देशभर के फिल्मकारों और कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। हालांकि कुछ रिपोर्टों में उनकी उम्र 94 वर्ष बताई गई है, जबकि कई भारतीय रिपोर्टों में उन्हें 95 वर्ष का बताया गया है।
सिंगीतम श्रीनिवास राव का नाम भारतीय सिनेमा के उन रचनात्मक फिल्मकारों में लिया जाता है, जिन्होंने कहानी कहने के पारंपरिक तौर-तरीकों से आगे बढ़कर लगातार नए प्रयोग किए। छह दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और हिंदी समेत कई भाषाओं में फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी फिल्मों में कॉमेडी, फैंटेसी, साइंस फिक्शन, ड्रामा और प्रयोगात्मक सिनेमा का अनोखा मेल देखने को मिलता था।
‘पुष्पक विमानम’ से बनाई अलग पहचान
सिंगीतम श्रीनिवास राव की सबसे चर्चित फिल्मों में ‘पुष्पक विमानम’ का नाम सबसे ऊपर आता है। कमल हासन अभिनीत यह फिल्म बिना संवादों के बनाई गई ब्लैक कॉमेडी थी। संवादों के बिना कहानी को प्रभावशाली तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना उस दौर में बेहद चुनौतीपूर्ण प्रयोग था, लेकिन फिल्म ने इसे शानदार तरीके से अंजाम दिया। यह फिल्म भारतीय सिनेमा में प्रयोगधर्मी सोच की मिसाल मानी जाती है और इसे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।
इसके अलावा ‘आदित्य 369’ ने उन्हें साइंस फिक्शन और टाइम-ट्रैवल जैसे विषयों पर काम करने वाले दूरदर्शी फिल्मकार के रूप में स्थापित किया। यह फिल्म तेलुगु सिनेमा की उन शुरुआती चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है, जिन्होंने टाइम ट्रैवल की अवधारणा को बड़े स्तर पर पर्दे पर पेश किया। फिल्म की कल्पना और तकनीकी प्रस्तुति ने उस समय के दर्शकों को काफी प्रभावित किया।
उनकी अन्य उल्लेखनीय फिल्मों में ‘मयूरी’, ‘भैरव द्वीपम’, ‘माइकल मदना काम राजन’, ‘अपूरव सगोदरर्गल’ और कई अन्य फिल्में शामिल हैं। अलग-अलग भाषाओं और अलग-अलग शैलियों में लगातार काम करने की उनकी क्षमता उन्हें अपने दौर के दूसरे फिल्मकारों से अलग बनाती थी।
छह दशक से ज्यादा का शानदार सफर
सिंगीतम श्रीनिवास राव का जन्म 21 सितंबर 1931 को आंध्र प्रदेश के गुडूर में हुआ था। उन्होंने भौतिक विज्ञान में पढ़ाई की और इसके बाद सिनेमा की दुनिया में कदम रखा। उनके करियर की शुरुआत सहायक के तौर पर हुई, जहां उन्हें दिग्गज फिल्मकारों के साथ काम करने का अवसर मिला। बाद में उन्होंने निर्देशन की कमान संभाली और 1972 में तेलुगु फिल्म ‘नीति निजायिति’ से निर्देशक के रूप में शुरुआत की।
उनकी पहचान सिर्फ निर्देशक तक सीमित नहीं रही। वह पटकथा लेखन और रचनात्मक काम में भी सक्रिय रहे। सिनेमा की नई तकनीकों और अलग-अलग शैलियों को अपनाने का उनका जुनून उम्र बढ़ने के साथ भी कम नहीं हुआ। हाल के वर्षों में भी वह नए प्रोजेक्ट और युवा फिल्मकारों के साथ जुड़े रहे। 2026 की शुरुआत में उनके एक नए प्रोजेक्ट की घोषणा भी हुई थी, जिससे पता चलता है कि अंतिम वर्षों तक उनका जुड़ाव सिनेमा से बना रहा।
कमल हासन ने बताया अपना गुरु
सिंगीतम श्रीनिवास राव और कमल हासन की जोड़ी भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार रचनात्मक साझेदारियों में शामिल रही। दोनों ने कई चर्चित फिल्मों में साथ काम किया। सिंगीतम के निधन के बाद कमल हासन ने भावुक संदेश साझा करते हुए उन्हें उन लोगों में शामिल बताया जिन्होंने उनके व्यक्तित्व और कला को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सिंगीतम के जीवन और ऊर्जा से प्रेरणा लेकर वह खुद भी उसी तरह जीने की इच्छा रखते हैं।
कमल हासन का यह संदेश बताता है कि दोनों के बीच रिश्ता केवल अभिनेता और निर्देशक का नहीं था। सिंगीतम ने कमल हासन के साथ मिलकर कई प्रयोगात्मक और चर्चित फिल्मों को पर्दे पर उतारा और दोनों की रचनात्मक समझ ने दक्षिण भारतीय सिनेमा को नई दिशा देने में भूमिका निभाई।
जूनियर NTR और राजामौली ने भी किया याद
सिंगीतम श्रीनिवास राव के निधन पर जूनियर NTR ने भी गहरा दुख जताया। उन्होंने उन्हें ऐसा फिल्मकार बताया जो अपने समय से आगे सोचते थे और जिनकी फिल्मों की प्रासंगिकता पीढ़ियां बदलने के बाद भी बनी रही। उन्होंने विशेष रूप से ‘आदित्य 369’, ‘पुष्पक विमानम’ और ‘मयूरी’ जैसी फिल्मों को याद किया।
वहीं एसएस राजामौली समेत कई अन्य फिल्मी हस्तियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने उन्हें ऐसी रचनात्मक शख्सियत के तौर पर याद किया, जिन्होंने भारतीय सिनेमा की सीमाओं को आगे बढ़ाया और दर्शकों को नए विषयों से परिचित कराया।
सिनेमा में छोड़ी अमिट छाप
सिंगीतम श्रीनिवास राव का जाना सिर्फ एक वरिष्ठ फिल्म निर्देशक का निधन नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा के एक रचनात्मक दौर का अंत माना जा रहा है। उन्होंने ऐसी कहानियां चुनीं जिन्हें उस समय पर्दे पर उतारना आसान नहीं था। बिना संवाद की फिल्म से लेकर टाइम ट्रैवल पर आधारित साइंस फिक्शन तक, उनके काम में प्रयोग करने का साहस हमेशा दिखाई दिया।
उनकी फिल्मों ने यह साबित किया कि अच्छा सिनेमा किसी एक भाषा, शैली या फॉर्मूले तक सीमित नहीं होता। वह कहानी, कल्पना और तकनीक के जरिए दर्शकों को नए अनुभव दे सकता है। यही वजह है कि सिंगीतम श्रीनिवास राव की विरासत आने वाली पीढ़ियों के फिल्मकारों के लिए भी प्रेरणा बनी रहेगी। उनके निधन से भारतीय फिल्म जगत ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसकी सोच अपने समय से कहीं आगे थी।
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