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Mumbai मुंबई: भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने मुंबई के ताजमहल पैलेस होटल स्थित 26/11 स्मारक का दौरा कर 2008 के भीषण आतंकी हमलों में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भावुक संदेश साझा करते हुए राजदूत गोर ने लिखा, “ऐसी त्रासदी दोबारा कभी न हो। मैंने ताजमहल पैलेस होटल में 26/11 स्मारक का दौरा किया और 166 निर्दोष लोगों को याद किया, जिनमें 6 अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे। मैं भारतीय सुरक्षा बलों के साहस को नमन करता हूं और गर्व महसूस करता हूं कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने इन भयानक हमलों की साजिश में शामिल तहव्वुर हुसैन राणा को भारत को प्रत्यर्पित किया, ताकि उसे न्याय के कटघरे में लाया जा सके।”
यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब सर्जियो गोर ने हाल ही में भारत में अमेरिकी राजदूत के रूप में कार्यभार संभाला है। उन्होंने जनवरी 2026 की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपने परिचय पत्र सौंपे थे। 26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकियों द्वारा किए गए हमले चार दिनों तक चले थे। आतंकियों ने ताजमहल पैलेस होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, नरीमन हाउस (यहूदी केंद्र), छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन और कामा अस्पताल जैसे प्रमुख स्थानों को निशाना बनाया था।
इन समन्वित हमलों में विदेशी नागरिकों सहित 166 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इसे आधुनिक इतिहास में शहरी आतंकवाद की सबसे जघन्य घटनाओं में से एक माना जाता है। पाकिस्तानी-कनाडाई व्यवसायी तहव्वुर हुसैन राणा, जो लश्कर-ए-तैयबा के स्काउट डेविड हेडली का करीबी सहयोगी था, पर हमलों की साजिश में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। उस पर लॉजिस्टिक समर्थन और रेकी में मदद करने के आरोप हैं। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अप्रैल 2025 में अमेरिका ने राणा को भारत को सौंपा, जिससे उस पर हमलों से जुड़ी साजिश और सहायता के आरोपों में मुकदमा चलाया जा सका। इसे भारत-अमेरिका के बीच आतंकवाद-रोधी सहयोग में बड़ी सफलता माना गया।
राजदूत गोर ने अपने संदेश में आतंकवाद के खिलाफ भारत-अमेरिका की मजबूत साझेदारी को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी), मुंबई पुलिस, मरीन कमांडो और अन्य सुरक्षा बलों के साहस की विशेष सराहना की, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में आतंकियों से मुकाबला कर बंधकों को बचाया और हमलों का अंत किया।
ताजमहल पैलेस होटल सहित 26/11 के स्मारक आज भी साहस, स्मृति और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के संकल्प के प्रतीक बने हुए हैं। राजदूत गोर का यह दौरा और बयान न्याय की खोज, सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने और शहीदों को सम्मान देने के साझा मूल्यों को दर्शाता है। बदलते वैश्विक खतरों के दौर में यह पहल आतंकवाद के खिलाफ दोनों लोकतांत्रिक देशों की एकजुटता को और मजबूत करती है।
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