
मुंबई, जुलाई, 2026: जैसे ही दुनिया ने रामायण में रणबीर कपूर को भगवान राम के रूप में पहली बार देखा, भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी पौराणिक फिल्मों में से एक के पीछे छिपी कला, विरासत और उत्कृष्ट शिल्पकौशल की एक अद्भुत कहानी भी सामने आई। फिल्म की आधिकारिक आभूषण सहयोगी ट्राइब आम्रपाली ने फिल्म के पात्रों के लिए विशेष आभूषण निर्मित किए हैं, जिनमें सदियों पुरानी पौराणिक कथाओं, प्रतीकों और भारतीय शिल्पकला को नई पीढ़ी के लिए एक सशक्त दृश्य अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित और आईमैक्स के लिए फिल्माई गई रामायण, भारत के सबसे पूजनीय महाकाव्यों में से एक की भव्य सिनेमाई प्रस्तुति है, जो दिवाली 2026 और दिवाली 2027 में दो भागों में विश्वभर में प्रदर्शित होगी। यह फिल्म इस कालजयी महाकाव्य की भावनाओं, आदर्शों और विराट स्वरूप को अभूतपूर्व परिमाण पर जीवंत करने का प्रयास है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल भगवान हनुमान तथा रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे हैं।
ट्राइब आम्रपाली के लिए यह सहयोग सिर्फ आभूषण निर्मित करने तक ही सीमित नहीं था, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को श्रद्धांजलि देने का एक प्रयास भी था। 18 महीनों से अधिक समय तक ब्रांड की डिज़ाइन टीम ने, तरंग अरोड़ा के रचनात्मक नेतृत्व और फिल्म की रचनात्मक टीम के साथ मिलकर, पौराणिक कथाओं, प्राचीन भारतीय आभूषणों, मंदिर कला, मूर्तिकला और विभिन्न प्रतीकों का गहन अध्ययन किया। उद्देश्य ऐसे आभूषण तैयार करना था, जो रामायण की दुनिया के अनुरूप होने के साथ-साथ आधुनिक सिनेमा की भव्यता को भी प्रतिबिंबित करें।
भगवान राम की प्रथम झलक का प्रमुख आकर्षण 335 ग्राम वज़नी एक भव्य हार है, जिसकी प्रेरणा भगवान राम के दिव्य धनुष कोदंड से ली गई है। यह शक्ति, धर्म और दिव्य उद्देश्य का प्रतीक है। चाँदी और पीतल से निर्मित यह आभूषण भगवान राम के आदर्श चरित्र, सूर्यवंशी वंश और धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है।
इस हार में अनेक प्रतीकात्मक तत्वों को शामिल किया गया है, जिनमें धर्मचक्र से प्रेरित गोलाकार पदक, सूर्यवंश का प्रतिनिधित्व करने वाले सूर्य के प्रतीक, पवित्रता और दिव्यता के प्रतीक कमल तथा मिथिला और पुष्प वाटिका के पवित्र उद्यानों से प्रेरित जटिल पुष्प आकृतियाँ शामिल हैं, जहाँ भगवान राम और माता सीता की जीवन यात्रा पहली बार एक-दूसरे से जुड़ती है।
इन आभूषणों में पारंपरिक भारतीय शिल्पकला और धातु-कला का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। उभरी हुई नक्काशी की तकनीक फूलों और पदकों को गहराई प्रदान करती है, जबकि बारीक उत्कीर्णन और धातु नक्काशी की विशेष तकनीक उनकी सतह पर जीवंत बनावट उकेरती है। बारीक जाल-विन्यास मध्य लटकन को कोमलता प्रदान करती है, वहीं दानेदार मोतीनुमा कारीगरी इसकी सीमाओं को और अधिक आकर्षक बनाती है। गूँथी हुई चेन इसकी बनावट को वस्त्र जैसी समृद्धि प्रदान करती है, साथ ही इसकी मजबूती भी बनाए रखती है। प्रत्येक भाग, चाहे वह प्रतीक हो, चेन हो या मध्य लटकन को अलग-अलग तैयार कर अत्यंत सावधानी से जोड़ा और अंतिम रूप दिया गया है, जिससे यह आभूषण भगवान राम की राजसी गरिमा और आध्यात्मिक आभा का सशक्त प्रतीक बन गया है।
इस सहयोग पर अपने विचार साझा करते हुए आम्रपाली ज्वेल्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं रचनात्मक निदेशक तरंग अरोड़ा ने कहा, "जब हमें 'रामायण' के साथ जुड़ने का अवसर मिला, तो सबसे बड़ी खुशी इस ऐतिहासिक यात्रा का हिस्सा बनने की थी। हम सभी रामायण की कहानी सुनते और पढ़ते हुए बड़े हुए हैं, लेकिन यह परियोजना उसी अमर कथा को नई पीढ़ी के लिए नए स्वरूप में प्रस्तुत कर रही है। संभव है कि आज के बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए यही 'रामायण' उनकी स्मृतियों का हिस्सा बने। इस सहयोग को और भी विशेष बनाती है यह बात कि 'रामायण' किसी एक व्यक्ति या ब्रांड से कहीं बड़ी है। यह हमारी संस्कृति, आस्था और पौराणिक विरासत से गहराई से जुड़ी हुई है। ऐसे महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक प्रकल्प में छोटा-सा योगदान देना भी हमारे लिए अत्यंत सम्मान की बात है।"
रामायण के निर्माताओं ने कहा, "रामायण में लिया गया प्रत्येक रचनात्मक निर्णय प्रामाणिकता और उद्देश्य से प्रेरित रहा है तथा इस दृष्टि को साकार करने में आभूषणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रत्येक आभूषण को पात्रों के व्यक्तित्व, विरासत और उनके विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, ताकि वे उनकी दृश्य पहचान का अभिन्न हिस्सा बन सकें। ये सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि कथा को प्रभावशाली बनाने का माध्यम हैं, जो इस कालजयी संसार को और अधिक जीवंत बनाते हैं।"
पौराणिक कथाओं को आभूषणों के माध्यम से जीवंत करने की प्रक्रिया पर आगे बात करते हुए तरंग अरोड़ा ने कहा, "रामायण के लिए आभूषणों की रचना करना हमारी सबसे चुनौतीपूर्ण और रचनात्मक यात्राओं में से एक रहा। हमारा उद्देश्य सिर्फ आभूषण बनाना नहीं था, बल्कि ऐसे विस्तृत दृश्य संसार की रचना करना था, जिसमें प्रत्येक पात्र की अपनी विशिष्ट पहचान, भावनाएँ और जीवन यात्रा झलके। भगवान राम के लिए प्रत्येक विवरण में धर्म, शक्ति, करुणा और श्रेष्ठता की भावना को समाहित करना आवश्यक था। इस पूरी प्रक्रिया में गहन शोध और कलात्मक अभिव्यक्ति के बीच संतुलन बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित किया गया कि प्रत्येक प्रतीक, बनावट और डिज़ाइन फिल्म की सिनेमाई दृष्टि के अनुरूप होने के साथ-साथ अर्थपूर्ण भी रहे।"
इस संपूर्ण निर्माण प्रक्रिया में डिज़ाइनर्स, मास्टर कारीगरों, मॉडल निर्माताओं और कुशल शिल्पकारों की समर्पित टीम ने सैकड़ों घंटों का योगदान दिया। यह सहयोग भारतीय आभूषण परंपरा और वैश्विक स्तर की सिनेमाई कहानी कहने की कला के अद्भुत संगम का प्रतीक है।
रामायण के माध्यम से ट्राइब आम्रपाली ने सिर्फ आभूषण नहीं बनाए हैं, बल्कि एक ऐसे भव्य दृश्य संसार के निर्माण में योगदान दिया है, जहाँ पौराणिक विरासत, भारतीय शिल्पकला और कल्पनाशीलता अभूतपूर्व स्तर पर एक साथ साकार होती हैं।





