मनोरंजन

बिना VFX के शूट हुआ था यह सीन, सेना की मौजूदगी ने बनाया इसे खास

Ratna Netam
30 Jun 2026 7:39 PM IST
बिना VFX के शूट हुआ था यह सीन, सेना की मौजूदगी ने बनाया इसे खास
x

Entertainment मनोरंजन : आज के समय में युद्ध सीन शूट करना काफी आसान हो गया है। आधुनिक तकनीक, ग्रीन स्क्रीन और VFX की मदद से बड़े-बड़े एक्शन सीन कुछ ही दिनों में तैयार कर लिए जाते हैं। लेकिन 1960 के दशक में फिल्म निर्माण का तरीका पूरी तरह अलग था। उस दौर में बिना किसी डिजिटल तकनीक के बड़े पैमाने पर युद्ध और एक्शन सीन शूट किए जाते थे, जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं।उस समय फिल्म निर्माता वास्तविकता पर अधिक भरोसा करते थे। युद्ध सीन में दिखने वाली पूरी फौज असली सैनिकों या बड़ी संख्या में एक्स्ट्रा कलाकारों से तैयार की जाती थी। हजारों लोगों को एक साथनियंत्रित करना और सही समय पर एक्शन करवाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती होती थी। इसके लिए महीनों तक रिहर्सल कराई जाती थी ताकि हर व्यक्ति अपने रोल को सही तरीके से निभा सके।

कैमरा वर्क भी बेहद जटिल होता था। उस समय स्टेडी कैमरा या डिजिटल एडिटिंग की सुविधा नहीं थी, इसलिए हर शॉट को लंबे टेक में शूट किया जाता था। एक छोटी सी गलती भी पूरे सीन को दोबारा शूट करने की वजह बन सकती थी। यही कारण था कि उस दौर की फिल्मों में अनुशासन और तैयारी का स्तर बहुत ऊंचा होता था।युद्ध सीन को वास्तविक दिखाने के लिए लोकेशन पर ही सेट बनाए जाते थे। पहाड़, मैदान या खुले मैदानों में हजारों लोगों को एक साथ एक्शन के लिए तैयार किया जाता था। विस्फोट और धुएं के इफेक्ट भीवास्तविक तरीके से किए जाते थे, जिससे जोखिम काफी बढ़ जाता था।

फिल्म निर्देशकों और तकनीशियनों के लिए यह एक बड़ी चुनौती होती थी कि इतने बड़े सीन को बिना किसी गलती के पूरा किया जाए। इसके लिए सटीक टाइमिंग, सिग्नल सिस्टम और टीम वर्क सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।आज भले ही तकनीक ने फिल्म निर्माण को आसान बना दिया हो, लेकिन 1960 के दशक की फिल्मों में जो मेहनत, अनुशासन और वास्तविकता दिखाई देती थी, वह आज भी फिल्म इतिहास में एक मिसाल मानी जाती है।कुल मिलाकर, उस दौर की फिल्में यह साबित करती हैं कि बिना आधुनिक तकनीक के भी बड़े और भव्य सीन केवल मेहनत और समर्पण से संभव थे।

Next Story