
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। साल 2008 में रिलीज हुई फिल्म ‘जोधा अकबर’ आज भी हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में गिनी जाती है। निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की इस ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म में ऋतिक रोशन ने मुगल बादशाह अकबर और ऐश्वर्या राय बच्चन ने राजपूत राजकुमारी जोधा का किरदार निभाया था। फिल्म की भव्यता, शानदार अभिनय और संगीत ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई।
फिल्म के सभी गानों में एक ऐसा गीत था, जिसने लोगों को आध्यात्मिक शांति और सुकून का एहसास कराया। यह गीत था ‘ख्वाजा मेरे ख्वाजा’। आज भी जब यह कव्वाली सुनाई देती है तो लोग इसकी धुन और भावनाओं में खो जाते हैं। हालांकि, इस गाने से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी है, जिसे जानकर कई लोग हैरान रह जाते हैं।
‘जोधा अकबर’ के लिए नहीं बनी थी कव्वाली
बहुत कम लोगों को पता है कि ‘ख्वाजा मेरे ख्वाजा’ कव्वाली फिल्म ‘जोधा अकबर’ के लिए तैयार नहीं की गई थी। इसे मशहूर संगीतकार और गायक ए. आर. रहमान ने पहले किसी अन्य उद्देश्य के लिए बनाया था। बाद में जब फिल्म ‘जोधा अकबर’ के लिए संगीत तैयार किया जा रहा था, तब इस कव्वाली को फिल्म की कहानी और माहौल के हिसाब से शामिल किया गया।
फिल्म में इस कव्वाली को अकबर के आध्यात्मिक पक्ष और सूफी विचारों को दिखाने के लिए इस्तेमाल किया गया। गाने के दौरान ऋतिक रोशन का सूफी अंदाज और दरगाह का दृश्य दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।
रहमान ने शर्त के साथ दी थी अनुमति
बताया जाता है कि जब ‘जोधा अकबर’ के लिए इस कव्वाली को शामिल करने की बात आई तो ए. आर. रहमान ने इसे इस्तेमाल करने के लिए एक खास शर्त रखी थी। रहमान चाहते थे कि गाने की मूल भावना और आध्यात्मिकता को बिल्कुल उसी तरह बरकरार रखा जाए, जिस भावना से इसे तैयार किया गया था।
फिल्म की टीम ने इस शर्त को स्वीकार किया और इसके बाद यह कव्वाली ‘जोधा अकबर’ का हिस्सा बनी। रिलीज के बाद यह गीत फिल्म की सबसे बड़ी पहचान में शामिल हो गया।
सूफी संगीत का शानदार उदाहरण
‘ख्वाजा मेरे ख्वाजा’ सिर्फ एक फिल्मी गीत नहीं, बल्कि सूफी संगीत की गहराई को दर्शाने वाली रचना है। ए. आर. रहमान ने अपनी खास शैली में इसमें आध्यात्मिक भावनाओं, शांति और श्रद्धा को जोड़ा। यही वजह है कि यह गाना समय बीतने के बाद भी लोगों के बीच उतना ही लोकप्रिय है।
इस कव्वाली में सूफी परंपरा और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना दिखाई देती है। यही कारण है कि इसे सुनने वाले लोग आज भी इससे जुड़ाव महसूस करते हैं।
फिल्म की सफलता में संगीत का अहम योगदान
‘जोधा अकबर’ की सफलता में इसके संगीत का बड़ा योगदान रहा। फिल्म के अन्य गाने भी काफी पसंद किए गए, लेकिन ‘ख्वाजा मेरे ख्वाजा’ ने अलग पहचान बनाई। इस गाने ने न सिर्फ फिल्म के दृश्य को मजबूत बनाया, बल्कि दर्शकों को अकबर के व्यक्तित्व के एक अलग पहलू से भी परिचित कराया।
18 साल बाद भी यह कव्वाली लोगों की प्लेलिस्ट में बनी हुई है और ए. आर. रहमान की शानदार संगीत प्रतिभा का उदाहरण मानी जाती है। ‘ख्वाजा मेरे ख्वाजा’ की कहानी यह साबित करती है कि कई बार कोई रचना अपने मूल उद्देश्य से आगे बढ़कर इतिहास का हिस्सा बन जाती है।





