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61 साल पुराना गाना आज भी करता है दिल पर राज

Saba Naaz
31 July 2026 7:24 PM IST
61 साल पुराना गाना आज भी करता है दिल पर राज
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नई दिल्ली। हिंदी फिल्म संगीत का स्वर्णिम दौर आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जिंदा है। 1960 और 1970 के दशक के गीतों की लोकप्रियता समय के साथ कम होने के बजाय और बढ़ती गई है। इन गानों की सबसे बड़ी खासियत इनके भावपूर्ण बोल, मधुर धुन और गायकों की दिल को छू लेने वाली आवाज रही है। इन्हीं कालजयी गीतों में एक नाम है महान पार्श्वगायक मुकेश का सुपरहिट रोमांटिक गीत 'चांद सी महबूबा हो मेरी', जो रिलीज होने के 61 साल बाद भी संगीत प्रेमियों की पसंद बना हुआ है।

यह गीत वर्ष 1965 में रिलीज हुई फिल्म 'हिमालय की गोद में' का है। फिल्म में अभिनेता मनोज कुमार और अभिनेत्री माला सिन्हा मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म की कहानी जितनी भावनात्मक थी, उतने ही दिलकश इसके गीत भी थे। 'चांद सी महबूबा हो मेरी' को मुकेश की आवाज ने ऐसा जादू दिया कि यह गीत रोमांटिक संगीत की पहचान बन गया।

इस गीत की सबसे बड़ी ताकत इसके बोल हैं। हर पंक्ति प्रेम की गहराई, सम्मान और सादगी को बेहद खूबसूरती से व्यक्त करती है। यही वजह है कि आज भी जब यह गीत बजता है तो श्रोता पुराने दौर की यादों में खो जाते हैं। कई लोग इसे अपने जीवनसाथी या प्रेमी-प्रेमिका के लिए समर्पित करते हैं। यही कारण है कि यह गीत आज भी प्रेम का इजहार करने वाले सबसे पसंदीदा हिंदी गीतों में गिना जाता है।

मुकेश की गायकी की खासियत हमेशा उनकी सादगी और भावनाओं से भरपूर प्रस्तुति रही। उन्होंने बिना किसी तकनीकी प्रभाव या ऑटो-ट्यून के अपनी आवाज से श्रोताओं के दिलों में खास जगह बनाई। 'चांद सी महबूबा हो मेरी' भी उनकी इसी शैली का शानदार उदाहरण माना जाता है। गीत में उनकी आवाज भावनाओं को इतनी सहजता से प्रस्तुत करती है कि हर शब्द सीधे दिल तक पहुंचता है।

फिल्म 'हिमालय की गोद में' भी अपने समय की सफल फिल्मों में शामिल रही थी। पहाड़ी परिवेश, पारिवारिक भावनाएं और खूबसूरत संगीत ने इस फिल्म को दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई। फिल्म का यह रोमांटिक गीत उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा और आज भी रेडियो, म्यूजिक प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर बराबर सुना जाता है।

डिजिटल दौर में भी इस गीत की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। यूट्यूब, म्यूजिक ऐप्स और सोशल मीडिया रील्स पर यह गाना लगातार नई पीढ़ी तक पहुंच रहा है। कई युवा इस गीत का इस्तेमाल रोमांटिक वीडियो, वेडिंग एडिट और खास मौकों पर करते हैं। यही वजह है कि छह दशक पुराने इस गीत को नई पीढ़ी भी उतना ही पसंद कर रही है, जितना पुराने दौर के श्रोता करते थे।

भारतीय संगीत जगत में मुकेश का योगदान हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने 'दोस्त दोस्त ना रहा', 'कहीं दूर जब दिन ढल जाए', 'जीना यहां मरना यहां' और 'सावन का महीना' जैसे अनेक सदाबहार गीत दिए, लेकिन 'चांद सी महबूबा हो मेरी' को उनकी सबसे खूबसूरत रोमांटिक प्रस्तुतियों में गिना जाता है।

समय बदलता रहा, संगीत की शैली भी बदलती गई, लेकिन कुछ गीत ऐसे होते हैं जो कभी पुराने नहीं पड़ते। 'चांद सी महबूबा हो मेरी' उन्हीं अमर गीतों में शामिल है। 61 साल बाद भी इसकी मधुर धुन, भावपूर्ण बोल और मुकेश की दिल को छू लेने वाली आवाज इसे हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार रोमांटिक गीतों में शामिल करती है। आज भी यह गीत प्रेम, सादगी और शाश्वत संगीत का प्रतीक माना जाता है।

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