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लता मंगेशकर का अपमान करने वाले सनकी संगीतकार की कहानी

Saba Naaz
21 July 2026 3:36 PM IST
लता मंगेशकर का अपमान करने वाले सनकी संगीतकार की कहानी
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मुंबई। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे संगीतकार हुए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से संगीत की दुनिया में अमिट छाप छोड़ी, लेकिन कुछ कलाकार अपने काम के साथ-साथ अपने अलग स्वभाव और विवादों के कारण भी चर्चा में रहे। ऐसे ही एक नाम थे मशहूर संगीतकार सज्जाद हुसैन, जिन्होंने अपने अनोखे संगीत, बेहतरीन धुनों और शानदार वादन कला से अपनी पहचान बनाई। हालांकि, उनका बेबाक और गुस्सैल स्वभाव उन्हें कई बार विवादों में भी ले आया।

सज्जाद हुसैन का नाम भारतीय फिल्म संगीत के उन कलाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने हिंदी सिनेमा को एक अलग तरह की संगीत शैली दी। वह एक बेहतरीन संगीतकार होने के साथ-साथ शानदार मैंडोलिन वादक भी थे। कहा जाता है कि उन्होंने करीब 22 हजार से ज्यादा गानों में मैंडोलिन बजाया था। पांच दशक से ज्यादा समय तक संगीत की दुनिया में सक्रिय रहने वाले सज्जाद ने अपने करियर में कई यादगार धुनें बनाईं।

हालांकि, उनकी प्रतिभा जितनी बड़ी थी, उनका स्वभाव भी उतना ही चर्चा में रहा। सज्जाद हुसैन को अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए जाना जाता था। वह किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं होते थे और यही आदत कई बार उनके करियर के लिए नुकसानदायक साबित हुई।

सज्जाद हुसैन की 21 जुलाई को डेथ एनिवर्सरी होती है। उनकी जिंदगी से जुड़े कई किस्से आज भी फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का विषय हैं। साल 1944 में आई फिल्म ‘दोस्त’ के संगीत की सफलता के बाद जब फिल्म के निर्देशक शौकत हुसैन रिजवी ने इसका श्रेय अपनी पत्नी और मशहूर गायिका नूरजहां को दिया, तो सज्जाद इससे नाराज हो गए। उन्होंने फैसला किया कि वह भविष्य में नूरजहां के लिए संगीत तैयार नहीं करेंगे।

इसके अलावा फिल्म ‘सैंया’ की रिकॉर्डिंग के दौरान उनका गीतकार डीएन मधोक से भी विवाद हो गया था। सज्जाद अपने काम में बेहद बारीकी पसंद करते थे और संगीत में किसी भी तरह की कमी को स्वीकार नहीं करते थे। इसी वजह से कई कलाकारों और निर्माताओं के साथ उनके मतभेद सामने आए।

उनका विवाद सिर्फ नूरजहां तक सीमित नहीं रहा। हिंदी सिनेमा की महान गायिका लता मंगेशकर के साथ भी उनका एक समय विवाद हुआ था। कहा जाता है कि सज्जाद ने लता मंगेशकर के गायन को लेकर कुछ टिप्पणी कर दी थी, जिसके बाद दोनों के बीच बातचीत बंद हो गई थी। हालांकि, लता मंगेशकर ने बाद में सज्जाद हुसैन की प्रतिभा की तारीफ भी की थी। उन्होंने माना था कि सज्जाद बेहद प्रतिभाशाली संगीतकार थे और उनके साथ काम करना आसान नहीं था क्योंकि वह संगीत की छोटी से छोटी बारीकी पर ध्यान देते थे।

सज्जाद हुसैन अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने कई बड़े कलाकारों को लेकर अपनी राय खुलकर रखी। कहा जाता है कि उन्होंने मशहूर गायक तलत महमूद को ‘गलत महमूद’ और किशोर कुमार को ‘शोर कुमार’ तक कह दिया था। उनकी ऐसी टिप्पणियां अक्सर चर्चा और विवाद का कारण बनती थीं।

फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े नामों के साथ उनके मतभेद रहे। फिल्म ‘संगदिल’ की शूटिंग के दौरान उनकी अभिनेता दिलीप कुमार से भी अनबन की खबरें आई थीं। वहीं, निर्माता-निर्देशक के. आसिफ से विवाद के कारण उनके हाथ से ऐतिहासिक फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ का संगीत निकल जाने की बात भी कही जाती है।

अपने करियर में सज्जाद हुसैन ने कई शानदार रचनाएं दीं, लेकिन उनके स्वभाव के कारण उन्हें कई बड़े प्रोजेक्ट्स से हाथ धोना पड़ा। कहा जाता है कि 34 साल के फिल्मी करियर में उन्होंने अपने अड़ियल रवैये और सिद्धांतों के चलते करीब 20 बड़े प्रोजेक्ट गंवा दिए।

21 जुलाई 1995 को सज्जाद हुसैन का निधन मुंबई के माहिम स्थित उनके घर पर हुआ। उनकी अंतिम यात्रा बेहद शांत रही। बताया जाता है कि परिवार के सदस्यों के अलावा फिल्म इंडस्ट्री से सिर्फ दो बड़ी हस्तियां, मशहूर गायक पंकज उधास और संगीतकार खय्याम, उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे।

सज्जाद हुसैन की जिंदगी इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा और सफलता के साथ इंसान का व्यवहार भी उसके सफर को प्रभावित करता है। उन्होंने संगीत की दुनिया को कई यादगार धुनें दीं, लेकिन उनका बेबाक स्वभाव और विवाद भी उनकी कहानी का हिस्सा बन गया। आज भी उन्हें एक ऐसे संगीतकार के रूप में याद किया जाता है, जिसने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।

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