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60 साल बाद सामने आया हरिवंश राय बच्चन की प्रेम कहानी का किस्सा

Saba Naaz
19 July 2026 6:07 PM IST
60 साल बाद सामने आया हरिवंश राय बच्चन की प्रेम कहानी का किस्सा
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मनोरंजन: हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे गीत हैं जो सिर्फ अपनी धुन और बोल की वजह से नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी दिलचस्प कहानियों के कारण भी हमेशा याद किए जाते हैं। ऐसा ही एक मशहूर गीत है “झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में...”। साल 1966 में रिलीज हुई फिल्म ‘मेरा साया’ का यह गाना आज भी लोगों की जुबान पर है। इस गीत को मशहूर गायिका आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी और अभिनेत्री साधना पर फिल्माया गया था। हालांकि, इस लोकप्रिय गीत के पीछे की कहानी सिर्फ एक झुमके की नहीं, बल्कि बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के माता-पिता तेजी बच्चन और हरिवंश राय बच्चन की प्रेम कहानी से जुड़ी बताई जाती है।

यह गीत अपने समय का बड़ा हिट साबित हुआ था। साधना के शानदार डांस और आशा भोसले की मधुर आवाज ने इसे अमर बना दिया। गाने की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि बरेली शहर में भी इसकी चर्चा होने लगी। यहां तक कि बरेली में एक चौराहे का नाम भी “झुमका चौराहा” रखा गया, जो इस गीत की प्रसिद्धि को दर्शाता है।

इस गीत के पीछे की कहानी करीब 1940 के दशक से शुरू होती है। बताया जाता है कि उस समय बरेली में नए साल के मौके पर एक पार्टी आयोजित की गई थी। इसी पार्टी में प्रसिद्ध कवि और लेखक हरिवंश राय बच्चन की मुलाकात तेजी सूरी से हुई थी। पहली ही मुलाकात में दोनों एक-दूसरे से प्रभावित हो गए। उस समय मौजूद लोगों ने महसूस किया कि दोनों के बीच एक खास रिश्ता बन रहा है।

हरिवंश राय बच्चन और तेजी सूरी की प्रेम कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ी और बाद में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद तेजी सूरी तेजी बच्चन के नाम से जानी गईं। दोनों का रिश्ता हिंदी साहित्य और फिल्म जगत में भी काफी चर्चित रहा। उनके बेटे अमिताभ बच्चन आगे चलकर भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल हुए।

कहा जाता है कि एक बार हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन की शादी को लेकर उनके करीबी दोस्त और मशहूर गीतकार राजा मेहंदी अली खान ने मजाकिया अंदाज में तेजी जी से पूछा था कि आखिर उन्होंने डॉक्टर साहब यानी हरिवंश राय बच्चन से शादी कब करनी है। इस पर तेजी बच्चन ने हंसते हुए जवाब दिया था कि उनका “झुमका तो बरेली के बाजार में गिर गया है।”

तेजी बच्चन की यह मजाकिया बात राजा मेहंदी अली खान के मन में बस गई। करीब दो दशक बाद जब वह फिल्म ‘मेरा साया’ के लिए गीत लिख रहे थे, तब उन्हें वही किस्सा याद आया। इसी से प्रेरणा लेकर उन्होंने लिखा “झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में...”। हालांकि यह किस्सा फिल्मी दुनिया में काफी लोकप्रिय है, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी होती रही हैं।

फिल्म ‘मेरा साया’ साल 1966 में रिलीज हुई थी और इसमें साधना के साथ सुनील दत्त मुख्य भूमिका में थे। फिल्म का संगीत और गीत बेहद सफल रहे। खासतौर पर “झुमका गिरा रे” ने दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई। आज भी जब यह गीत बजता है तो पुराने दौर की यादें ताजा हो जाती हैं।

आशा भोसले की आवाज, साधना का आकर्षक अंदाज और राजा मेहंदी अली खान के खूबसूरत बोलों ने इस गीत को सदाबहार बना दिया। लेकिन इस गाने की सबसे खास बात यह है कि इसके पीछे एक ऐसी प्रेम कहानी जुड़ी हुई है, जो हिंदी साहित्य और बॉलीवुड दोनों के इतिहास का हिस्सा बन चुकी है।

करीब 60 साल बाद भी यह गीत लोगों को उतना ही पसंद आता है। यही वजह है कि “झुमका गिरा रे” सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि एक यादगार किस्से और एक खूबसूरत प्रेम कहानी की निशानी बन चुका है।

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