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बिहार के लोकगीत की कहानी: कम बजट में बना कल्ट सॉन्ग और Salman Khan की पहचान

Kanchan Paikara
16 Jun 2026 4:41 PM IST
बिहार के लोकगीत की कहानी: कम बजट में बना कल्ट सॉन्ग और Salman Khan की पहचान
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संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है।

New Delhi :बिहार की मशहूर लोक गायिका Sharda Sinha ने भारतीय संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। लोकगीतों की दुनिया में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। अपनी सुरीली आवाज और पारंपरिक लोकधुनों के लिए जानी जाने वाली शारदा सिन्हा ने न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश में मैथिली और भोजपुरी संगीत को नई पहचान दी।

शारदा सिन्हा का संगीत सफर केवल लोकगीतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी अपनी आवाज दी और कई यादगार गाने दिए। उनकी गायकी की खासियत यह रही कि उन्होंने हमेशा भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं को अपने संगीत में जीवित रखा। इसी वजह से उनके गाए गीत आज भी लोगों की जुबान पर हैं।

फिल्मी दुनिया में भी शारदा सिन्हा की आवाज को खूब सराहा गया। उन्होंने कई ऐसे गीत दिए जो दर्शकों के दिलों में बस गए। इन्हीं में से एक गीत ऐसा भी रहा, जिसने बॉलीवुड सुपरस्टार Salman Khan की फिल्म में जगह बनाई और एक कल्ट लव सॉन्ग के रूप में पहचान हासिल की। यह गाना न केवल फिल्म की सफलता का हिस्सा बना, बल्कि सलमान खान के शुरुआती करियर के लोकप्रिय गानों में भी शामिल हो गया।

यह गीत अपनी सादगी, लोकधुन और भावनात्मक जुड़ाव के कारण दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। कहा जाता है कि इस गाने में भारतीय लोकसंगीत की झलक साफ दिखाई देती है, जो इसे अन्य फिल्मी गानों से अलग बनाती है। शारदा सिन्हा की आवाज ने इस गाने को एक अलग ही पहचान दी, जिससे यह आज भी लोगों के बीच “कल्ट सॉन्ग” के रूप में याद किया जाता है।

शारदा सिन्हा का मानना रहा है कि लोकसंगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने अपने पूरे करियर में इस सोच को कायम रखा और यही वजह है कि उन्हें “बिहार कोकिला” भी कहा जाता है।

उनके योगदान ने यह साबित किया कि लोकसंगीत और फिल्मी संगीत के बीच कोई बड़ी दूरी नहीं है, अगर जड़ों से जुड़कर काम किया जाए तो दोनों को एक साथ खूबसूरती से पेश किया जा सकता है। उनके गीतों ने न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे भारत में लोकसंगीत को सम्मान दिलाया।

आज भी शारदा सिन्हा के गाए गीत शादी-ब्याह, त्योहारों और सांस्कृतिक आयोजनों में गूंजते हैं। उनकी आवाज आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है, जो यह दिखाती है कि सादगी और परंपरा से जुड़ा संगीत कभी पुराना नहीं होता।

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