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जिस बॉलीवुड कपल ने रचा इतिहास, उनकी मौत के बाद बेटों ने भी झेला दर्द

Ratna Netam
3 Aug 2026 2:42 PM IST
जिस बॉलीवुड कपल ने रचा इतिहास, उनकी मौत के बाद बेटों ने भी झेला दर्द
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मनोरंजन : हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसी जोड़ियां रही हैं, जिन्होंने पर्दे पर और पर्दे के पीछे अपनी अलग पहचान बनाई। ऐसी ही एक जोड़ी थी मशहूर फिल्म निर्देशक और अभिनेता गुरु दत्त और महान गायिका गीता दत्त की। 1950 के दशक में इस कपल ने भारतीय सिनेमा को कई यादगार फिल्में दीं। गुरु दत्त अपनी फिल्मों के निर्देशन और अभिनय के लिए जाने जाते थे, वहीं गीता दत्त अपनी मधुर आवाज से उन फिल्मों को खास पहचान देती थीं। दोनों की जोड़ी को कभी हिंदी सिनेमा की सबसे शानदार जोड़ियों में गिना जाता था, लेकिन निजी जिंदगी में इनके रिश्ते में प्यार से ज्यादा संघर्ष और तनाव रहा।

गुरु दत्त और गीता दत्त की प्रेम कहानी की शुरुआत 1951 में हुई थी। उस समय गीता दत्त एक सफल गायिका के रूप में अपनी पहचान बना चुकी थीं। उन्होंने कई फिल्मों में अपनी आवाज का जादू बिखेर दिया था। दूसरी ओर गुरु दत्त भी फिल्म इंडस्ट्री में तेजी से आगे बढ़ रहे थे। एक फिल्म की रिकॉर्डिंग के दौरान दोनों की मुलाकात हुई और धीरे-धीरे यह मुलाकात प्यार में बदल गई। करीब दो साल बाद 1953 में दोनों ने शादी कर ली।

शादी के बाद कुछ समय तक दोनों की जिंदगी खुशहाल नजर आई। 1954 में उनके घर पहले बेटे तरुण दत्त का जन्म हुआ। इसके बाद उनके दो और बच्चे हुए, जिनमें बेटा अरुण दत्त और बेटी नीना शामिल थे। बाहर से देखने पर यह परिवार बेहद खुश नजर आता था, लेकिन धीरे-धीरे रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा।

कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि गुरु दत्त और गीता दत्त की शादीशुदा जिंदगी में परेशानियां आने लगी थीं। गुरु दत्त अपने करियर और निजी जीवन में कई मुश्किलों से गुजर रहे थे। उनकी कुछ फिल्मों के असफल होने से उन्हें आर्थिक और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर गीता दत्त का भी फिल्मी करियर पहले जैसा नहीं रहा था।

उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री में नई आवाजों का दौर शुरू हो चुका था। लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी गायिकाओं की लोकप्रियता बढ़ रही थी, जिससे गीता दत्त के करियर पर भी असर पड़ा। इसी बीच गुरु दत्त की जिंदगी में अभिनेत्री वहीदा रहमान की एंट्री हुई। गुरु दत्त और वहीदा रहमान ने कई फिल्मों में साथ काम किया और दोनों के रिश्ते को लेकर चर्चाएं भी सामने आईं। इन खबरों ने गीता दत्त को काफी दुख पहुंचाया।

कहा जाता है कि 1963 में गीता दत्त ने गुरु दत्त का घर छोड़ दिया और अपने तीनों बच्चों को लेकर अलग रहने लगीं। इस अलगाव ने गुरु दत्त को अंदर से तोड़ दिया। परिवार से दूरी और फिल्मों में आ रही परेशानियों के कारण वह बेहद अकेले हो गए थे। शराब और तनाव ने उनकी जिंदगी को और कठिन बना दिया।

1964 में गुरु दत्त अपने घर में मृत पाए गए। उनकी मौत को लेकर अलग-अलग बातें सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे आत्महत्या बताया, जबकि कुछ ने शराब और नींद की दवाइयों के ज्यादा सेवन को वजह बताया। उनकी मौत ने पूरे फिल्म जगत को हिलाकर रख दिया।

गुरु दत्त के निधन के करीब नौ साल बाद गीता दत्त भी इस दुनिया को छोड़ गईं। उनकी मौत का कारण लिवर सिरोसिस बताया गया। कहा जाता है कि पति की मौत और निजी जिंदगी के संघर्षों के बाद वह आर्थिक और मानसिक परेशानियों से जूझती रहीं।

माता-पिता की मौत के बाद बड़े बेटे तरुण दत्त ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपना करियर बनाने की कोशिश की। उन्होंने कुछ फिल्मों का निर्देशन और निर्माण भी किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। 1989 में फिल्म ‘खुल-ए-नाम’ के निर्देशन के दौरान उन्होंने आत्महत्या कर ली। उस समय उनकी उम्र केवल 35 साल थी।

बाद में उनके छोटे भाई अरुण दत्त ने इस फिल्म को पूरा किया और 1992 में यह रिलीज हुई। अरुण दत्त का भी 2014 में निधन हो गया। गुरु दत्त और गीता दत्त की कहानी आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे दर्दभरी कहानियों में गिनी जाती है। एक ओर जहां उन्होंने भारतीय सिनेमा को बेहतरीन कला और संगीत दिया, वहीं दूसरी ओर उनकी निजी जिंदगी संघर्ष, अकेलेपन और अधूरे रिश्तों की कहानी बनकर रह गई।

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