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38 साल पुरानी कव्वाली आज भी दिलों पर राज करती है

Saba Naaz
1 Aug 2026 7:04 PM IST
38 साल पुरानी कव्वाली आज भी दिलों पर राज करती है
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मनोरंजन डेस्क: मशहूर पाकिस्तानी गायक उस्ताद नुसरत फतेह अली खान की आवाज का जादू आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करता है। उनकी कई कव्वालियां ऐसी हैं, जो दशकों बाद भी लोगों की पसंद बनी हुई हैं। इन्हीं में से एक है उनकी बेहद लोकप्रिय कव्वाली "मेरे रश्के कमर", जो करीब 38 साल पहले रिकॉर्ड की गई थी, लेकिन आज भी आशिकों की प्लेलिस्ट में अपनी खास जगह बनाए हुए है।

नुसरत फतेह अली खान ने इस कव्वाली को साल 1988 में अपनी आवाज दी थी। इसकी धुन, बोल और प्रस्तुति इतनी प्रभावशाली थी कि समय बीतने के साथ इसकी लोकप्रियता और बढ़ती चली गई। करीब 17 मिनट लंबी इस मूल कव्वाली को आज भी संगीत प्रेमी बड़े चाव से सुनते हैं। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बॉलीवुड में भी इसे कई बार नए अंदाज में पेश किया गया।

"मेरे रश्के कमर" के बोल मशहूर उर्दू शायर फना बुलंद शहरी ने लिखे थे, जबकि इसकी कंपोजिशन नुसरत फतेह अली खान ने तैयार की थी। इस कव्वाली का नाम ही अपने आप में बेहद खास अर्थ रखता है। "मेरे रश्के कमर" का मतलब होता है "मेरे चांद जैसे महबूब, जिससे चांद को भी जलन हो।" इस खूबसूरत भाव ने इसे प्रेम और मोहब्बत की एक अमर रचना बना दिया।

हालांकि नुसरत फतेह अली खान के जीवनकाल में यह कव्वाली उनकी सबसे बड़ी मेनस्ट्रीम हिट नहीं बन पाई थी, लेकिन सालों बाद यह एक कल्ट क्लासिक बन गई। इसकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई तब मिली जब इसे बॉलीवुड फिल्म के लिए दोबारा तैयार किया गया।

साल 2017 में फिल्म 'बादशाहो' के लिए टी-सीरीज ने इस कव्वाली का रीक्रिएट वर्जन रिलीज किया। इस नए वर्जन को नुसरत फतेह अली खान के भतीजे राहत फतेह अली खान ने अपनी आवाज दी थी। अजय देवगन और इलियाना डिक्रूज पर फिल्माए गए इस गाने ने रिलीज होते ही लोगों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल कर ली।

राहत फतेह अली खान की आवाज में इस गाने ने नई पीढ़ी को भी नुसरत की संगीत विरासत से जोड़ दिया। इसके बाद यह कव्वाली युवाओं के बीच भी काफी लोकप्रिय हुई और शादी समारोहों से लेकर संगीत कार्यक्रमों तक में सुनाई देने लगी।

नुसरत फतेह अली खान को दुनिया के महानतम कव्वालों में गिना जाता है। उन्होंने कव्वाली को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी दमदार आवाज, ऊंचे सुर और भावपूर्ण गायकी ने उन्हें पूरी दुनिया में मशहूर बनाया। वह सिर्फ एक गायक नहीं बल्कि सूफी संगीत की एक ऐसी पहचान थे, जिनकी कला ने सीमाओं को पार कर लोगों को जोड़ा।

"मेरे रश्के कमर" आज भी इस बात का उदाहरण है कि अच्छी कला कभी पुरानी नहीं होती। 38 साल बाद भी इस कव्वाली की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। नुसरत फतेह अली खान की आवाज में बसी मोहब्बत और रूहानी एहसास आज भी संगीत प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यही वजह है कि यह कव्वाली हमेशा आशिकों के दिलों की धड़कन बनी रहेगी।

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