
Entertainment मनोरंजन : लोकप्रिय यूट्यूबर सौरव जोशी का एक वीडियो क्लिप इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद E20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया यूजर्स दावा कर रहे हैं कि सौरव जोशी के हालिया व्लॉग में ईंधन को लेकर किए गए नकारात्मक कमेंट्स को हटाया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
विवाद की शुरुआत सौरव जोशी के एक वायरल वीडियो क्लिप से हुई, जिसमें वह अपनी मर्सिडीज SUV की फ्यूल एफिशिएंसी को लेकर चिंता जाहिर करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर बताया कि उनकी गाड़ी का माइलेज काफी कम हो गया है। उन्होंने दावा किया कि पहले उनकी कार करीब 17 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देती थी, लेकिन अब यह घटकर लगभग 5 किलोमीटर प्रति लीटर रह गया है।
"Hamari gaadi ki mileage 17 se seedhe 9 ki. Aur aaj 5 ki ho gayi"
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) July 12, 2026
Vlogger Saurabh Joshi claims his car mileage has dropped by less than half. https://t.co/9tJBmzuu2F pic.twitter.com/Pmu3VaaDlv
वीडियो में सौरव जोशी ने इस बदलाव को लेकर चिंता जताई और ऐसा प्रतीत हुआ कि वह इसके लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को एक संभावित कारण मान रहे हैं। इसी के बाद सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज हो गई।
E20 पेट्रोल भारत में इस्तेमाल होने वाला ऐसा ईंधन है, जिसमें पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है। सरकार ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति अपनाई है, जिसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को लाभ पहुंचाना और कार्बन उत्सर्जन को घटाना है।
हालांकि, E20 पेट्रोल को लेकर वाहन मालिकों के बीच कई तरह की चिंताएं भी सामने आती रही हैं। कुछ वाहन उपयोगकर्ता दावा करते हैं कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण पुराने वाहनों में माइलेज, इंजन प्रदर्शन और ईंधन प्रणाली से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार, E20 पेट्रोल का प्रभाव वाहन के मॉडल, इंजन तकनीक और वाहन की उम्र पर निर्भर करता है। नए वाहन जिन्हें E20 ईंधन के लिए डिजाइन किया गया है, उनमें इसका प्रभाव अलग हो सकता है, जबकि पुराने वाहनों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
सौरव जोशी के वायरल वीडियो के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने अनुभव साझा किए। कुछ लोगों ने दावा किया कि E20 पेट्रोल आने के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज कम हुआ है, जबकि कुछ यूजर्स ने कहा कि उन्हें कोई खास अंतर महसूस नहीं हुआ।
वहीं, कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल ईंधन को ही माइलेज में गिरावट का कारण माना जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि माइलेज पर ड्राइविंग स्टाइल, ट्रैफिक की स्थिति, वाहन का रखरखाव, टायर प्रेशर और एयर कंडीशनिंग जैसे कई कारक असर डालते हैं।
सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा हुई कि सौरव जोशी के व्लॉग पर E20 पेट्रोल की आलोचना करने वाले कमेंट्स हटाए गए हैं। हालांकि, इस दावे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। यूट्यूबर की ओर से भी इस मामले में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
E20 पेट्रोल को लेकर भारत में पहले भी कई बार चर्चा हो चुकी है। सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण से देश को ऊर्जा सुरक्षा में मदद मिलेगी और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वहीं, वाहन चालकों का एक वर्ग इसके इस्तेमाल को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर करता रहा है।
ऑटो सेक्टर के जानकारों का कहना है कि वाहन निर्माता कंपनियां लगातार ऐसे इंजन तैयार कर रही हैं जो अधिक मात्रा में इथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुकूल हों। साथ ही, वाहन मालिकों को भी अपनी कार के लिए निर्माता की गाइडलाइन और ईंधन संबंधी जानकारी को ध्यान में रखना चाहिए।
सौरव जोशी जैसे बड़े सोशल मीडिया क्रिएटर के वीडियो के बाद यह मुद्दा आम लोगों के बीच फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, किसी एक व्यक्ति के अनुभव के आधार पर पूरे ईंधन की गुणवत्ता या प्रभाव का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता।
फिलहाल E20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है। जहां कुछ लोग इसे लेकर अपनी परेशानियां साझा कर रहे हैं, वहीं सरकार और विशेषज्ञ इसके पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों पर जोर दे रहे हैं। आने वाले समय में वाहन तकनीक और उपभोक्ता अनुभव इस बहस की दिशा को और स्पष्ट कर सकते हैं।





