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नई दिल्ली : टीवी अभिनेत्री और राजनेता स्मृति ईरानी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि कैसे उनकी पहली मुलाक़ात सुपरस्टार सलमान खान और उनके पिता सलीम खान से हुई थी — वह भी एक बेहद यादगार और मज़ाकिया किस्से के साथ। इस मुलाक़ात में, सलीम साहब ने सलमान और स्मृति के पति को एक साथ डांट लगाई और कहा, “निकम्मे हैं दोनों।” यह कहानी अब सोशल मीडिया और मीडिया जगत में सुर्खियां बटोर रही है।
कैसे हुई यह मुलाक़ात?
स्मृति ईरानी ने बताया कि उनके पति ज़ुबिन ईरानी और सलमान खान साथ-साथ सेंट जेवियर्स कॉलेज में पढ़ते थे। जब पहली बार जुबिन ने स्मृति को सलमान से मिलवाने का प्रस्ताव रखा, तो वह उन्हें लेकर गए, और उसी समय सलीम खान वहाँ मौजूद थे। जब सलीम खान ने देखा कि दोनों एक साथ आए हैं, उन्होंने ज़ुबिन से पूछा, “तुमको मालूम है तुम्हारे मियाँ साहब मेरे बेटे के साथ क्या करते थे? मेरी कार चोरी करके भाग जाते थे।”
फिर उन्होंने गुस्से में कहा,
“न कि में हैं दोनों।”
इस बीच स्मृति इरानी बस चुपचाप खड़ी थीं, जबकि सलमान और ज़ुबिन दोनों शर्म से नीचे देखा करते थे।
इस तरह, स्मृति ईरानी की पहली मुलाक़ात बॉलीवुड के दबदबे और नूर वाली तारीफों से नहीं, बल्कि एक नाराज़ पिता की डांट से शुरू हुई।
स्मृति की शुरुआती जुड़ाव और कैमरा सामना
इंटरव्यू में स्मृति ने यह भी बताया कि फिल्म‑ दुनिया से उनका पहला संपर्क ज़ुबिन के कारण ही हुआ। उन्होंने कहा कि ज़ुबिन ने उन्हें शाहरुख खान से परिचय दिलाया।
वहीं, जब उन्होंने पहली बार कैमरे के सामने काम किया, वह फिल्म की एक छोटी सी सीन थी—जहाँ उन्हें कहा गया कि एक काली ड्रेस पहनकर सिर्फ खड़ा रहना है। यह दृश्य अल्पदृश्य ही था, लेकिन उन्होंने इसे अपनी फिल्मी शुरुआत माना।
प्रतिक्रिया और सामाजिक हलचल
स्मृति ईरानी का यह खुलासा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। फैंस और मीडिया दोनों इस किस्से की सराहना कर रहे हैं क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे बड़े सितारों की शुरुआत में भी “साधारण” और मानवीय क्षण होते हैं।
कुछ लोगों ने इसे आलोचनात्मक दृष्टि से देखा—कि फिल्मी दुनिया में प्रवेश करने वालों को किस तरह अभिभावकीय दबाव और अपेक्षाओं का सामना करना पड़ता है।
यह किस्सा न केवल मनोरंजक है, बल्कि एक संकेत है कि सितारे भी शुरुआत में दबाव, शर्मिंदगी और असमंजस का सामना करते हैं। स्मृति ईरानी की यह स्मृति हमें यह याद दिलाती है कि बड़े नामों और चमकदार जीवन के पीछे भी छोटे-छोटे संघर्ष और मानवीय कहानियाँ होती हैं।
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