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जौहर विवाद पर श्रिया पिलगांवकर ने रखी अपनी राय

Kavita2
5 Sept 2026 5:24 PM IST
जौहर विवाद पर श्रिया पिलगांवकर ने रखी अपनी राय
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मुंबई। फिल्म ‘पद्मावत’ और उसमें दिखाए गए जौहर को लेकर अभिनेत्री स्वरा भास्कर की टिप्पणी पर शुरू हुई बहस एक बार फिर चर्चा में आ गई है। अब ‘मिर्जापुर’ फेम अभिनेत्री श्रिया पिलगांवकर ने इस विवाद पर अपनी राय रखी है। श्रिया का कहना है कि वर्तमान समय के नजरिए से सैकड़ों साल पुराने दौर के लोगों, उनकी परिस्थितियों और सांस्कृतिक मूल्यों को आंकना उचित नहीं है। उनकी टिप्पणी सामने आने के बाद स्वरा भास्कर ने भी सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए एक बार फिर स्पष्ट किया कि उन्होंने रानी पद्मावती को कभी ‘कायर’ नहीं कहा था।

हाल ही में ‘फिल्मी ज्ञान’ को दिए एक इंटरव्यू के दौरान श्रिया पिलगांवकर से स्वरा भास्कर के जौहर संबंधी बयान और उसके बाद पैदा हुए विवाद पर सवाल किया गया। इसके जवाब में श्रिया ने कहा कि वर्तमान में बैठकर किसी दूसरे ऐतिहासिक दौर के संदर्भ को जज करना बेहद आसान होता है, लेकिन उस समय की परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है।

श्रिया ने कहा कि 2026 में बैठकर सैकड़ों वर्ष पहले के लोगों की सोच, मूल्यों और उनके फैसलों का मूल्यांकन केवल आज के सामाजिक मानकों के आधार पर नहीं किया जा सकता। अलग-अलग समय में समाज की परिस्थितियां और सांस्कृतिक संदर्भ अलग रहे हैं।

समय के साथ बदलती हैं संस्कृतियां

श्रिया पिलगांवकर ने अपनी बात रखते हुए इस पहलू पर जोर दिया कि संस्कृति स्थिर नहीं रहती। समय और परिस्थितियों के साथ समाज और संस्कृति में परिवर्तन आते हैं। जो चीजें किसी विशेष ऐतिहासिक दौर में सामाजिक या सांस्कृतिक परिस्थितियों का हिस्सा रही हों, उन्हें वर्तमान समय की कसौटी पर रखकर सीधे फैसला सुनाना सही तरीका नहीं हो सकता।

उनकी टिप्पणी का केंद्र ऐतिहासिक घटनाओं को उनके अपने संदर्भ में समझने पर रहा। श्रिया के मुताबिक किसी पुराने दौर के लोगों ने क्या सोचा, उनके मूल्य क्या थे और उन्होंने किसी खास परिस्थिति में कौन सा निर्णय क्यों लिया, इसे समझने के लिए उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ को भी ध्यान में रखना चाहिए।

उनका कहना था कि आज हमारे पास जो सामाजिक समझ और मूल्य हैं, वे लंबे समय के बदलाव का परिणाम हैं। ऐसे में उन्हें सीधे कई सौ साल पुराने समाज पर लागू करना ऐतिहासिक संदर्भ की जटिलता को नजरअंदाज कर सकता है।

फिर चर्चा में आया स्वरा भास्कर का पुराना विवाद

श्रिया की प्रतिक्रिया के बाद स्वरा भास्कर का ‘पद्मावत’ को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म ‘पद्मावत’ की रिलीज के समय स्वरा ने फिल्म में जौहर के चित्रण पर आपत्ति जताई थी।

उन्होंने फिल्म के निर्देशक को एक खुला पत्र लिखकर महिलाओं की स्वतंत्रता और जौहर के चित्रण को लेकर सवाल उठाए थे। उस समय उनके विचारों पर सोशल मीडिया और फिल्म जगत में तीखी बहस हुई थी। कुछ लोगों ने उनकी आलोचना की तो कुछ ने उनके सवालों को महिला अधिकारों और फिल्म में ऐतिहासिक प्रथाओं के चित्रण से जोड़कर देखा।

अब वर्षों बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आया है और श्रिया पिलगांवकर की टिप्पणी ने बहस को नया संदर्भ दे दिया है।

स्वरा ने दी सफाई

श्रिया की टिप्पणी सामने आने के बाद स्वरा भास्कर ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए प्रतिक्रिया दी। स्वरा ने फिर स्पष्ट किया कि उन्होंने रानी पद्मावती को ‘कायर’ नहीं कहा था।

स्वरा की प्रतिक्रिया से यह संकेत मिला कि वह अपने पुराने बयान की व्याख्या को लेकर पैदा हुई गलतफहमी को दूर करना चाहती हैं। उनका कहना रहा है कि उनकी आपत्ति जौहर जैसी प्रथा के सिनेमाई चित्रण को लेकर थी, न कि रानी पद्मावती के साहस को कमतर बताने के लिए।

यही अंतर इस पूरे विवाद के केंद्र में रहा है। एक तरफ ऐतिहासिक परिस्थितियों और उस समय लिए गए फैसलों को उनके दौर के संदर्भ में देखने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आधुनिक सिनेमा में उन घटनाओं के चित्रण और उसके संदेश पर सवाल उठाने का तर्क सामने आता रहा है।

‘पद्मावत’ के समय हुआ था बड़ा विवाद

‘पद्मावत’ रिलीज होने से पहले और बाद में कई कारणों से विवादों में रही थी। फिल्म में दीपिका पादुकोण ने रानी पद्मावती की भूमिका निभाई थी। रणवीर सिंह अलाउद्दीन खिलजी और शाहिद कपूर महारावल रतन सिंह की भूमिका में नजर आए थे।

फिल्म के आखिर में दिखाए गए जौहर के दृश्य को लेकर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। कुछ दर्शकों ने इसे साहस और तत्कालीन परिस्थितियों से जोड़कर देखा, जबकि आलोचकों के एक वर्ग ने इसके चित्रण पर सवाल उठाए थे।

स्वरा भास्कर ने भी उस समय अपनी प्रतिक्रिया में इसी पहलू को उठाया था। इसके बाद उन्हें बड़े पैमाने पर समर्थन और विरोध दोनों का सामना करना पड़ा।

इतिहास और आधुनिक मूल्यों की बहस

श्रिया पिलगांवकर की नई टिप्पणी ने एक व्यापक सवाल भी सामने रखा है कि इतिहास को वर्तमान सामाजिक मूल्यों के आधार पर किस हद तक परखा जाना चाहिए। इतिहासकार भी किसी घटना को समझने के लिए उस समय की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अध्ययन पर जोर देते हैं।

वहीं किसी ऐतिहासिक घटना को आधुनिक फिल्म, साहित्य या दूसरी कला के माध्यम से प्रस्तुत किए जाने पर उसके वर्तमान सामाजिक प्रभाव की समीक्षा अलग प्रश्न हो सकती है। यही कारण है कि ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्मों को लेकर अक्सर तथ्य, रचनात्मक स्वतंत्रता और आधुनिक सामाजिक मूल्यों के बीच बहस देखने को मिलती है।

सोशल मीडिया पर फिर छिड़ी चर्चा

श्रिया की प्रतिक्रिया और इसके बाद स्वरा की सफाई ने सोशल मीडिया पर इस पुराने विवाद को दोबारा चर्चा में ला दिया है। दोनों अभिनेत्रियों की टिप्पणियों को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

श्रिया का जोर जहां ऐतिहासिक घटनाओं को उनके समय और परिस्थितियों के संदर्भ में समझने पर है, वहीं स्वरा ने अपनी पुरानी टिप्पणी को लेकर यह साफ किया है कि उन्होंने रानी पद्मावती को ‘कायर’ नहीं कहा था।

फिलहाल यह मामला किसी नई फिल्म के विवाद से ज्यादा इतिहास, संस्कृति और आधुनिक दृष्टिकोण को लेकर चल रही बहस के रूप में सामने आया है। श्रिया पिलगांवकर की टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि वर्तमान पीढ़ी को अतीत की घटनाओं और फैसलों का मूल्यांकन करते समय उस दौर की परिस्थितियों को कितना महत्व देना चाहिए।

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