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शेफाली शाह क्यों खुद को कहती हैं बुक होर्डर जानें इसका मतलब
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री शेफाली शाह ने हाल ही में खुद को ‘बुक होर्डर’ बताया है। अपने इस बयान में अभिनेत्री ने किताबों के प्रति अपने लगाव और उन्हें जमा करने की आदत के बारे में बात की। उनका यह कबूलनामा सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।
शेफाली शाह अपनी बेहतरीन अदाकारी के साथ-साथ अपने स्पष्ट और बेबाक विचारों के लिए भी जानी जाती हैं। फिल्मों और वेब सीरीज में गंभीर किरदार निभाने वाली अभिनेत्री की निजी पसंद से जुड़ा यह खुलासा उनके प्रशंसकों के लिए दिलचस्प है।
क्या कहा शेफाली शाह ने?
शेफाली शाह ने खुद को ‘बुक होर्डर’ बताते हुए कहा कि वह इसके लिए खुद को ‘दोषी’ मानती हैं। उनके बयान से संकेत मिलता है कि उन्हें किताबें खरीदने और अपने पास रखने का इतना शौक है कि कई बार किताबें जमा होती चली जाती हैं।
किताबों से लगाव रखने वाले लोगों के लिए यह आदत काफी परिचित हो सकती है। कई लोग किताबें खरीदते रहते हैं, भले ही उनके पास पहले से पढ़ने के लिए कई किताबें मौजूद हों।
‘बुक होर्डर’ का क्या मतलब है?
Book Hoarder का सीधा मतलब है ऐसा व्यक्ति जो बहुत सारी किताबें जमा करके रखता है और उन्हें छोड़ना या उनसे अलग होना मुश्किल पाता है।
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति नई किताब खरीदता है, लेकिन उसे तुरंत पढ़ नहीं पाता। इसके बावजूद वह अगली किताब भी खरीद लेता है। धीरे-धीरे किताबों का ढेर बढ़ता जाता है। ऐसे व्यक्ति को अनौपचारिक रूप से ‘बुक होर्डर’ कहा जा सकता है।
इसका मतलब जरूरी नहीं कि व्यक्ति को कोई मानसिक बीमारी या गंभीर समस्या है। आम बोलचाल में यह शब्द अक्सर किताबों के प्रति अत्यधिक प्रेम या किताबें इकट्ठा करने की आदत के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
‘बुक होर्डर’ और ‘बुक लवर’ में अंतर
Book Lover यानी किताबों से प्यार करने वाला व्यक्ति किताबें पढ़ना पसंद करता है। वहीं Book Hoarder के संदर्भ में किताबों को पढ़ने के साथ-साथ उन्हें लगातार खरीदते और जमा करते रहने की आदत पर जोर होता है।
कई पुस्तक प्रेमियों के पास ऐसी किताबें होती हैं जिन्हें उन्होंने अभी तक पढ़ा नहीं है। इसे मजाकिया अंदाज में ‘To Be Read’ यानी TBR पाइल भी कहा जाता है।
यही वजह है कि शेफाली शाह का खुद को ‘बुक होर्डर’ कहना किताबों के प्रति उनके लगाव को हल्के-फुल्के अंदाज में व्यक्त करने जैसा है।
किताबों से जुड़ी आदत क्यों आम है?
किताबें जमा करने की आदत केवल सेलिब्रिटीज तक सीमित नहीं है। दुनिया भर में ऐसे कई लोग हैं जिन्हें किताबें खरीदना और अपनी निजी लाइब्रेरी बनाना पसंद है।
कई बार किताबों की दुकान पर नई किताब देखकर उसे खरीद लेने का मन होता है, भले ही घर पर पहले से कई किताबें पढ़ने के इंतजार में हों। इसी तरह ऑनलाइन बुक सेल या डिस्काउंट भी लोगों को जरूरत से ज्यादा किताबें खरीदने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
कुछ लोग किताबों को सिर्फ पढ़ने की चीज नहीं मानते, बल्कि उन्हें अपनी पहचान, यादों और व्यक्तिगत संग्रह का हिस्सा मानते हैं।
शेफाली शाह का बयान क्यों चर्चा में आया?
शेफाली शाह के बयान को लेकर लोगों की दिलचस्पी इसलिए भी बढ़ी क्योंकि अभिनेत्री ने अपनी इस आदत को छिपाने के बजाय मजाकिया और आत्मस्वीकार वाले अंदाज में स्वीकार किया।
‘मैं इसकी दोषी हूं’ जैसी टिप्पणी उनके बयान को और हल्का-फुल्का बनाती है। इससे यह भी पता चलता है कि किताबों को लेकर उनका लगाव केवल पढ़ने तक सीमित नहीं, बल्कि किताबें अपने पास रखने और जमा करने से भी जुड़ा है।
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