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हीरो की दुनिया को अलविदा कह नील ने चुना खतरनाक रास्ता, विलेन बनकर दर्शकों के दिलों में बिठाया डर

SHIDDHANT
14 Jan 2026 7:48 PM IST
हीरो की दुनिया को अलविदा कह नील ने चुना खतरनाक रास्ता, विलेन बनकर दर्शकों के दिलों में बिठाया डर
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Mumbai मुंबई। नील नितिन मुकेश बॉलीवुड के उन अभिनेताओं में से हैं, जिनकी स्क्रीन पर मौजूदगी हमेशा खास रही है। चाहे हीरो का रोल हो या विलेन का, नील ने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया है। हालांकि, वह फिल्मों में हीरो के तौर पर ज्यादा पहचान नहीं बना पाए, लेकिन विलेन के रूप में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। 'वजीर', 'गोलमाल अगेन' और 'साहो' जैसी फिल्मों में उनका विलेन अवतार दर्शकों के दिल में खास जगह बना चुका है।
नील नितिन मुकेश का जन्म 15 जनवरी 1982 को मुंबई में हुआ था। उनका असली नाम नील माथुर है, लेकिन उन्होंने अपने पिता और दादा का नाम जोड़कर नील नितिन मुकेश रख लिया। उनके पिता नितिन मुकेश प्रसिद्ध पार्श्व गायक हैं और उनके दादा मुकेश हिंदी सिनेमा के दिग्गज गायक थे। बचपन से ही नील का परिवार संगीत और कला से जुड़ा रहा, जिससे उनकी रचनात्मकता का विकास हुआ।
नील ने फिल्मों में अभिनय की शुरुआत बहुत छोटी उम्र में ही कर दी थी। मात्र छह साल की उम्र में उन्होंने फिल्म 'विजय' में बाल कलाकार के रूप में काम किया। इसके अलावा उन्होंने 'जैसी करनी वैसी भरनी' में भी ऋषि कपूर और गोविंदा के बचपन का किरदार निभाया। बचपन में ही बड़े सुपरस्टार्स के साथ काम करने का अनुभव नील के लिए काफी अहम रहा और इससे उनकी फिल्मों के प्रति समझ और लगाव बढ़ा।
बॉलीवुड में मुख्य अभिनेता के रूप में नील का डेब्यू 2007 में फिल्म 'जॉनी गद्दार' से हुआ। इस थ्रिलर फिल्म में उनके अभिनय की काफी सराहना हुई। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, जैसे 'आ देखें जरा', 'न्यूयॉर्क', 'लफंगे परिंदे', 'प्लेयर' और '3जी'। इन फिल्मों में उन्होंने हीरो के रूप में काम किया, लेकिन दर्शकों के दिल में ज्यादा खास जगह नहीं बना पाए।
नील का करियर एक मोड़ तब आया जब उन्होंने विलेन के किरदार निभाने शुरू किए। उनकी फिल्म 'वजीर' में विलेन का रोल दर्शकों को काफी पसंद आया। इसके बाद 'गोलमाल अगेन' और 'साहो' में भी उन्होंने विलेन के किरदार में अपने अभिनय का जलवा दिखाया। उनका यह अंदाज इतना प्रभावशाली था कि उन्हें देख लोगों के दिलों में डर बैठ जाता था। वे हीरो के बजाय विलेन के रूप में उन्हें ही याद रखने लगे। नील की यह खासियत दर्शकों के लिए हमेशा एक आकर्षक अनुभव रही।
नील ने केवल हिंदी फिल्मों में ही काम नहीं किया, बल्कि तमिल फिल्म 'कैथी' और तेलुगू फिल्म 'कवचम' में भी अभिनय किया। उनके विलेन अवतार ने न केवल उनके करियर को नई दिशा दी, बल्कि उन्हें बॉलीवुड में अलग पहचान भी दिलाई।
इसके अलावा, नील नितिन मुकेश ने प्रोड्यूसर के रूप में भी कदम रखा। उनकी फिल्म 'बायपास रोड' में वह मुख्य किरदार के साथ-साथ निर्माता भी थे। फिल्मों के अलावा, नील ने समाज सेवा में भी योगदान दिया। 2009 में उन्होंने अपना एक एनजीओ शुरू किया, जिसमें जरूरतमंद महिलाओं को खाना, रहने की जगह और ट्रेनिंग दी जाती है। यह पहल उनके व्यक्तित्व का एक और पहलू दर्शाती है।
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