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रणवीर बरार का संदेश: डर के बावजूद बढ़ना ही हिम्मत

Tara Tandi
14 Oct 2026 5:14 PM IST
रणवीर बरार का संदेश: डर के बावजूद बढ़ना ही हिम्मत
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रणवीर बरार: हिम्मत का मतलब डर न होना नहीं है, बल्कि डर के बावजूद काम करने की काबिलियत है। मुंबई, 14 अक्टूबर: सेलिब्रिटी शेफ रणवीर बरार, जिन्हें अपने क्विज़ शो ‘यस शेफ’ (Yess Chef) के लिए बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है, ने बताया है कि वे ज़िंदगी में आने वाली मुश्किलों या अचानक आई चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं। सेलिब्रिटी शेफ और एक्टर ने मुंबई के अंधेरी वेस्ट इलाके में अपने नए स्ट्रीमिंग शो ‘यस शेफ’ के प्रमोशन के दौरान
मीडिया
से ​​बात की। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति से निपटने का एकमात्र तरीका है कि आप उससे गुज़रें और आगे बढ़ते रहें।
उन्होंने मीडिया से ​​कहा, "ऐसा नहीं है कि ज़िंदगी आप पर मुश्किलें नहीं डालेगी। ऐसा नहीं है कि वे आएंगी ही नहीं। सुबह उठकर यह कहना कि ‘कोई बात नहीं, जो हुआ सो हुआ, आज फिर से शुरुआत करते हैं’, बस यही फ़र्क है। यह सोचना कि ‘यह मेरे साथ ही हुआ है, किसी और के साथ नहीं’, यह सोच बेकार है; ऐसा सबके साथ होता है।" उन्होंने आगे कहा, "आप अगली सुबह कितनी हिम्मत से उठते हैं, या रात को कितनी हिम्मत से नहाते हैं, बस यही फ़र्क है। मुझे लगता है कि अगर आप हर रात रोते हुए सोते हैं, तो हर सुबह खुशी-खुशी उठें।
बस यही मायने रखता है। मेरा पसंदीदा कोट (quote) है कि हिम्मत का मतलब डर न होना नहीं है, बल्कि डर के बावजूद काम करने की काबिलियत है। जो आपके साथ हो रहा है, वह सबके साथ हो रहा है। जो एक्शन लेता है, वह आगे बढ़ता है, बस यही बात है। मैं ऐसा ही सोचता हूँ। मैं खुद भी संघर्ष करता हूँ, लेकिन ज़रूरी बात यह है कि कभी रुकना नहीं चाहिए।" इससे पहले, रणवीर ने घरों में खाने की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सलाह दी थी और कहा था कि किचन प्लेटफॉर्म या डाइनिंग टेबल पर अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट पाने का सबसे अच्छा तरीका लोकल मार्केट से खरीदारी करना है।
उन्होंने पहले मीडिया से ​​कहा था, "मेरा मानना ​​है कि सबसे पहले, अपनी खरीदारी लोकल मार्केट से करें। अगर हम ताज़गी की बात करें तो यह बहुत ज़रूरी है। हम सभी ने सब्ज़ी मंडी जाना बंद कर दिया है। 10-मिनट वाले ऐप्स ने सब्ज़ी मंडी से खरीदारी करने का कल्चर बदल दिया है।" उन्होंने आगे कहा, “जब आप पूरी गाड़ी पर ताज़ी सब्ज़ियाँ देखते हैं, तो आपको ताज़े खाने की अहमियत समझ आती है। अगर आपको बंदगोभी का छोटा पैकेट भी मिले, तो आपको उसमें मज़ा नहीं आता।”
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