
मुंबई: जब भी बॉलीवुड की सबसे दमदार और बहुमुखी अभिनेत्रियों की बात होती है, तो रानी मुखर्जी का नाम जरूर लिया जाता है। अपनी अलग आवाज, बेमिसाल अभिनय और हर किरदार में जान डालने वाली इस एक्ट्रेस ने ग्लैमरस हीरोइन से लेकर फियरलेस टाइग्रेस तक का सफर तय किया है। आज उनके जन्मदिन पर जानते हैं, कैसे उन्होंने हर चुनौती को अपनी ताकत बनाया।
ग्लैमर से अलग, खुद की पहचान बनाई
जब 90 के दशक में बॉलीवुड की हीरोइनें ग्लैमर और डांसिंग तक सीमित थीं, रानी मुखर्जी ने एक अलग राह चुनी। 'कुछ कुछ होता है' से दर्शकों के दिल में जगह बनाने के बाद, उन्होंने रोमांटिक इमेज से आगे बढ़कर 'ब्लैक', 'नो वन किल्ड जेसिका', और 'मर्दानी' जैसी फिल्मों में अपने टैलेंट की अलग छाप छोड़ी।
'मर्दानी' बनी टर्निंग पॉइंट
अगर रानी मुखर्जी को बॉलीवुड की टाइग्रेस कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। उनकी फिल्म 'मर्दानी' (2014) ने बॉलीवुड में महिला-प्रधान फिल्मों को एक नई दिशा दी। इसमें उनका किरदार शिवानी शिवाजी राव सिर्फ एक पुलिस अफसर नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गया।
स्टारडम से ऊपर, कंटेंट की क्वीन
रानी ने कभी सिर्फ ग्लैमर के सहारे नहीं, बल्कि कंटेंट के दम पर इंडस्ट्री में जगह बनाई। 'हिचकी', 'मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' जैसी फिल्मों में उन्होंने दिखाया कि एक महिला सशक्त कहानी के साथ भी सफलता हासिल कर सकती है।
निजी जिंदगी और मां बनने के बाद भी कमबैक
शादी के बाद रानी मुखर्जी ने फिल्मों से कुछ समय का ब्रेक लिया, लेकिन मां बनने के बाद भी उन्होंने खुद को बॉलीवुड की दौड़ में बनाए रखा। हर बार दमदार किरदारों के साथ वापसी कर उन्होंने साबित किया कि टैलेंट उम्र और हालात का मोहताज नहीं होता।
आगे क्या?
रानी मुखर्जी अपने फैंस को फिर से सरप्राइज देने के लिए तैयार हैं। चर्चा है कि वह जल्द ही एक नई थ्रिलर फिल्म में नजर आ सकती हैं।
रानी सिर्फ एक एक्ट्रेस नहीं, बल्कि सिनेमा में बदलाव लाने वाली एक शख्सियत हैं। उन्होंने साबित किया कि हीरोइन सिर्फ पर्दे पर खूबसूरत दिखने के लिए नहीं, बल्कि कहानियों को जीवंत करने के लिए भी होती है।





