मनोरंजन

रणबीर कपूर@44: बचपन की शरारतों से सुपरस्टार बनने तक का सफर

jantaserishta.com
28 Sept 2026 3:22 PM IST
रणबीर कपूर@44: बचपन की शरारतों से सुपरस्टार बनने तक का सफर
x
मुंबई: रणबीर कपूर का जन्म 28 सितंबर 1982 को मुंबई में हुआ। वह अभिनेता ऋषि कपूर और नीतू कपूर के बेटे हैं और राज कपूर उनके दादा थे। उनके परिवार की चार पीढ़ियां हिंदी सिनेमा से जुड़ी रही हैं। फिल्मी परिवार में जन्म लेने के बावजूद रणबीर के बचपन में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्हें वह बाद में याद करते रहे। उन्हें नेजल डिविएट सेप्टम नाम की बीमारी है, जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होती है और वह जल्दी-जल्दी बोलते हैं।
बचपन में एक बार बाथरूम में फिसलने से उनके चेहरे पर गहरी चोट लगी थी। उस चोट का निशान आज भी उनके चेहरे पर बताया जाता है। एक अन्य घटना में उन्होंने बाथरूम में पिता का आफ्टर शेव लोशन पी लिया था। घरवालों ने तुरंत उन्हें उल्टी करवाई थी।
राज कपूर भी बचपन में रणबीर को डांट देते थे। एक बार जब दादा बच्चों को किताब पढ़कर सुना रहे थे, तब रणबीर अपना गाना गाने में व्यस्त थे। राज कपूर ने उन्हें इस बात के लिए फटकार लगाई थी।
स्कूल में पिता की वजह से बने निशाना
रणबीर ने शुरुआती पढ़ाई मुंबई के बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से की। एक बार वह क्लास से भागने की कोशिश करते हुए पकड़े गए थे। इसके बाद प्रिंसिपल ने उन्हें पूरे कॉरिडोर में घुमाया और थप्पड़ मारे। स्कूल में ऋषि कपूर के बेटे होने की वजह से भी रणबीर की अलग पहचान थी। उन्होंने बताया था कि कई बार दूसरे बच्चे उन्हें आसानी से निशाना बनाते थे और परेशान करते थे।
घर में भी एक ऐसी घटना हुई, जिसे रणबीर के बचपन से जोड़ा जाता है। एक बार वह जूते पहने हुए घर के मंदिर में चले गए। ऋषि कपूर ने जब उन्हें देखा तो गुस्से में उन्हें थप्पड़ मार दिया। रणबीर बचपन से ही फिल्मों के माहौल में बड़े हुए। वह पिता की फिल्में देखना पसंद करते थे, जबकि मां नीतू सिंह की फिल्में देखना उन्हें अजीब लगता था। ऋषि कपूर को अलग-अलग किरदारों में देखकर ही उनके मन में अभिनेता बनने का विचार आया।
संजय दत्त के फैन थे रणबीर
बचपन में रणबीर कपूर संजय दत्त के बड़े प्रशंसक थे। वह अपने कमरे की अलमारी में संजय दत्त की तस्वीरें छिपाकर रखते थे। वहीं उनकी बहन रिद्धिमा के पास सलमान खान की तस्वीरें थीं। आगे चलकर यही पसंद उनके करियर से भी जुड़ गई। रणबीर ने संजय दत्त की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘संजू’ में उन्हीं का किरदार निभाया।
रणबीर को 1993 में पिता ऋषि कपूर के साथ ‘प्यार की गंगा बहे’ नाम के एकता वाले गाने में भी देखा गया था। उस समय उनकी उम्र 11 साल थी। इस गाने में कई बड़े कलाकार अपने बच्चों और परिवार के साथ नजर आए थे।
माता-पिता के झगड़ों का रणबीर पर असर
रणबीर ने बताया था कि बचपन में उनके माता-पिता के बीच तनावपूर्ण रिश्ते का उन पर असर पड़ा। कई रातें उन्होंने दोनों को झगड़ते हुए देखा और सीढ़ियों पर बैठकर उनके झगड़े खत्म होने का इंतजार किया। उन्होंने बताया था कि कई बार वह सुबह 5-6 बजे तक सीढ़ियों पर बैठे रहते थे। माता-पिता के रिश्ते की वजह से उनके पिता से डर बढ़ा और मां के साथ उनका लगाव ज्यादा हुआ।
ऋषि कपूर का काम भी काफी समय लेता था और वह शूटिंग के कारण अक्सर घर से बाहर रहते थे।
15 साल की उम्र में बने असिस्टेंट डायरेक्टर
रणबीर का फिल्मी सफर सिर्फ अभिनेता के तौर पर शुरू नहीं हुआ था। 1996 में जब ऋषि कपूर, रणधीर कपूर और राजीव कपूर ने ‘प्रेम ग्रंथ’ बनाई, तब 15 साल के रणबीर ने इसमें असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया।
बाद में ऋषि कपूर ने ‘आ अब लौट चलें’ का निर्देशन किया तो रणबीर उस फिल्म में भी असिस्टेंट डायरेक्टर रहे। एचआर कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद वह फिल्ममेकिंग सीखने न्यूयॉर्क गए। वहां उन्होंने फिल्ममेकिंग और मेथड एक्टिंग की पढ़ाई की।
भारत लौटने के बाद 2005 में उन्होंने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘ब्लैक’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया। सेट पर उन्होंने लाइटिंग से लेकर सफाई तक के काम किए और कई बार उन्हें डांट भी पड़ी।
इसी दौरान भंसाली ने उनके काम को देखा और बाद में उन्हें ‘सांवरिया’ में हीरो के तौर पर मौका दिया। इसी फिल्म से रणबीर कपूर और सोनम कपूर ने एक्टिंग करियर शुरू किया।
‘सांवरिया’ से शुरुआत, फिर लगातार बदले किरदार
‘सांवरिया’ 2007 में रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही। हालांकि रणबीर की एक्टिंग को सराहना मिली। इसके बाद 2008 में ‘बचना ऐ हसीनों’ आई। 2009 में उन्होंने ‘वेक अप सिड’, ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ और ‘रॉकेट सिंह’ जैसी तीन अलग-अलग फिल्मों में अलग किरदार निभाए।
‘वेक अप सिड’ में वह एक लापरवाह अमीर युवक के रूप में नजर आए। ‘अजब प्रेम की गजब कहानी’ में उनका किरदार मजाकिया और दूसरों की मदद करने वाला था। वहीं ‘रॉकेट सिंह’ में उन्होंने एक मेहनती और ईमानदार सेल्समैन का किरदार निभाया।
‘रॉकस्टार’ और ‘बर्फी’ ने बदली पहचान
2010 में प्रकाश झा की ‘राजनीति’ में रणबीर ने समर प्रताप सिंह का किरदार निभाया। इसके बाद 2011 में ‘रॉकस्टार’ आई, जिसमें उन्होंने जनार्दन यानी जेजे का रोल किया। इस फिल्म में एक साधारण लड़के से रॉकस्टार बनने तक की कहानी दिखाई गई। रणबीर के अभिनय की काफी तारीफ हुई और उन्हें बेस्ट एक्टर क्रिटिक्स का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।
2012 में ‘बर्फी’ ने उनके करियर को एक और अलग दिशा दी। इसमें उन्होंने बोलने और सुनने में असमर्थ युवक की भूमिका निभाई। फिल्म को भारत की ओर से ऑस्कर के लिए आधिकारिक एंट्री भी मिली थी। इस किरदार को लेकर ऋषि कपूर चिंतित थे, लेकिन रणबीर ने अपनी पसंद का किरदार किया और फिल्म सफल रही।
इसके बाद ‘ये जवानी है दीवानी’, ‘तमाशा’, ‘ऐ दिल है मुश्किल’, ‘संजू’, ‘शमशेरा’, ‘ब्रह्मास्त्र’ और ‘तू झूठी मैं मक्कार’ जैसी फिल्मों में वह नजर आए।
पिता की मौत के बाद चार साल का ब्रेक
2018 में ‘संजू’ की सफलता के बाद रणबीर ने करीब चार साल का ब्रेक लिया। इसकी दो प्रमुख वजहें कोविड और पिता ऋषि कपूर की खराबहोती तबीयत बताई गईं। 30 अप्रैल 2020 को कैंसर के कारण ऋषि कपूर का निधन हो गया।
रणबीर ने बाद में बताया था कि पिता की जिंदगी की आखिरी रात के दौरान डॉक्टर ने उन्हें बताया था कि वह कभी भी जा सकते हैं। उस समय रणबीर अस्पताल के कमरे में गए तो उन्हें पैनिक अटैक आया। उन्होंने बताया था कि उस वक्त उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त करें। उनके मुताबिक, पिता की मौत के बाद भी वह रो नहीं पाए और उन्हें नहीं लगा कि उन्होंने ठीक तरह से शोक मनाया।
2022 में वह ‘शमशेरा’ और ‘ब्रह्मास्त्र पार्ट-1’ के साथ वापस लौटे। ‘शमशेरा’ सफल नहीं रही, जबकि ‘ब्रह्मास्त्र’ को सफलता मिली।
‘एनिमल’ से सफलता के साथ विवाद भी जुड़े
2023 में ‘तू झूठी मैं मक्कार’ के बाद रणबीर ‘एनिमल’ में नजर आए। फिल्म में उन्होंने रणविजय सिंह की भूमिका निभाई। फिल्म में हिंसा, महिलाओं के प्रति व्यवहार और पुरुष प्रधान सोच को लेकर सवाल उठे। एक दृश्य में उनके किरदार द्वारा अपनी प्रेमिका से जूते चाटने के लिए कहने को लेकर भी चर्चा हुई।
गीतांजलि के साथ उनके किरदार के व्यवहार और विवाहेतर संबंधों को लेकर भी आलोचना हुई। गीतकार जावेद अख्तर समेत कई लोगों ने फिल्म की आलोचना की, जबकि निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने इसका बचाव किया। इन विवादों के बावजूद फिल्म सफल रही और रणबीर को इसके लिए बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।
‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार
रणबीर कपूर ने इसके बाद नितेश तिवारी की ‘रामायण’ के लिए करीब तीन साल लगाए। फिल्म में वह भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। इस फिल्म को लेकर भी विवाद सामने आया। रणबीर के पुराने बीफ वाले बयान को लेकर सवाल उठाए गए कि ऐसे व्यक्ति को भगवान राम का किरदार क्यों दिया गया। हालांकि खबर के मुताबिक फिल्म की तैयारी के दौरान रणबीर शाकाहारी हो चुके हैं।
इससे पहले ‘ब्रह्मास्त्र’ के समय भी उनके पुराने बीफ वाले बयान को लेकर विवाद हुआ था। फिल्म की रिलीज से पहले विरोध और बहिष्कार की मांग हुई थी। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में रणबीर, आलिया भट्ट और अयान मुखर्जी की एंट्री भी रोक दी गई थी।
इसके बावजूद ‘ब्रह्मास्त्र’ और ‘एनिमल’ दोनों सफल रहीं और दोनों रणबीर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हैं। अब 44 साल के रणबीर कपूर के करियर में अगला बड़ा पड़ाव ‘रामायण’ है, जिसमें वह भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे।
jantaserishta.com

jantaserishta.com

भारत के भले ही किसी कोने में आप रह रहे हों, जनता से रिश्ता वेबसाइट पर आपके राज्य की हर छोटी-बड़ी खबर मिलेगी। राजनीति, खेल, चुनाव, बिजनेस, सिनेमा, इस प्लैटफॉर्म पर बस एक क्लिक करते ही हमेशा पाएं ताजा खबरें। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के बाकी राज्यों और शहरों की कोई जानकारी हो, हम आपको देते हैं। सियासी रण हो या बजट का मौसम, कहां चल रहा क्या सियासी दांव-पेच, आपके गांव में किसकी सरकार, हर अपडेट यहां आपको मिलेंगे। तो फिर अपने राज्य की हर हलचल के लिए जुड़े रहिए जनता से रिश्ता के साथ।

    Next Story