
x
Mumbai मुंबई। फिल्म निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पुराने एजुकेशन सिस्टम को खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि यह अब पुराना और बेकार हो चुका है। एआई के आने से याद करने की वैल्यू खत्म हो गई है और पुराना मॉडल – याद करो, दोहराओ, पास हो जाओ और नौकरी पाओ अब फिट नहीं बैठता।
राम गोपाल वर्मा ने एक्स हैंडल पर लिखा कि जब जानकारी कम थी, तब यह सिस्टम काम करता था। पहले डॉक्टर बीमारियां याद करते थे, इंजीनियर फॉर्मूले और वकील केस लॉ याद करते थे, क्योंकि जानकारी तक पहुंच धीमी थी, लेकिन अब एआई कुछ सेकंड में लाखों पेपर स्कैन कर सकता है, जिसका कोई इंसानी दिमाग मुकाबला नहीं कर सकता। मेडिकल स्टूडेंट शरीर के साइंस को सीखने में सालों लगाते हैं, जबकि एआई तुरंत डायग्नोसिस कर सकता है। इंजीनियर कैलकुलस, सर्किट नियम और मैकेनिकल टेबल याद करते थे, लेकिन अब एआई टूल सर्किट डिजाइन बनाते हैं, स्ट्रक्चर ऑप्टिमाइज करते हैं और कोड लिखते हैं।
उन्होंने मेडिकल कोर्स का उदाहरण देते हुए कहा, "एक मेडिकल स्टूडेंट 5 साल ग्रेजुएशन, 2 साल पोस्ट ग्रेजुएशन और 2-3 साल स्पेशलाइजेशन में कुल 10 साल लगाता है। वह शरीर, अंगों और इलाज के बारे में सीखते हैं, फिर मरीज के लक्षण और टेस्ट से बीमारी का पता लगाते हैं, लेकिन अगर एआई डायग्नोसिस कर रहा है और सर्जरी रोबोटिक हो रही है, तो माता-पिता बच्चों को ऐसे कोर्स में क्यों ढकेल रहे हैं जो भविष्य में नौकरियां नहीं देंगी?
राम गोपाल वर्मा ने कहा कि गरीब बच्चे अपनी गलत जानकारी वाले माता-पिता की वजह से बलि का बकरा बन रहे हैं। ये बच्चे पुरानी भेड़ जैसी मान्यताओं की वेदी पर चढ़ाए जा रहे हैं। वर्मा ने माता-पिता और शिक्षा के गेटकीपरों को जागने की सलाह देते हुए कहा, उन्हें बच्चों को एआई में महारत हासिल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। बच्चों को विद्रोह करना चाहिए और माता-पिता-टीचरों को नजरअंदाज कर सिर्फ एआई पर भरोसा करना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे माता-पिता और टीचरों को बुरा नहीं कह रहे। वे बदलाव से डरते हैं, क्योंकि वे पुरानी मान्यताओं में बड़े हुए हैं, जो कभी-कभी अंधविश्वास बन जाती है। बच्चे शिकार बनते हैं, क्योंकि सिस्टम आज्ञाकारिता पर इनाम देता है। अगर बच्चा पूछे कि एआई कर सकता है तो क्यों याद करूं, तो टीचर कहता है–सिलेबस में है और माता-पिता कहते हैं– बाकी सब कर रहे हैं।
वर्मा का कहना है कि समय आ गया है कि पुराने पारंपरिक शिक्षा सिस्टम को खत्म किया जाए, वरना यह खुद खत्म हो जाएगा। बिना सोचे-समझे बैकअप प्लान के खालीपन पैदा हो सकता है, लेकिन सभी को सोचना और कड़ी मेहनत करनी होगी ताकि युवा नासमझ बड़ों की बलि न चढ़ें। अन्यथा युवा विद्रोह कर अपना भविष्य खुद संभाल लेंगे।
Tagsराम गोपाल वर्मापारंपरिक शिक्षाएआईआर्टिफिशियल इंटेलिजेंसमेडिकल एजुकेशनसोशल मीडिया पोस्टशिक्षा सुधार.जनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





