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Raj Kapoor's के खास गीतकार ने लिखी पहली भोजपुरी फिल्म की कहानी

Ratna Netam
25 July 2026 5:40 PM IST
Raj Kapoors  के खास गीतकार ने लिखी पहली भोजपुरी फिल्म की कहानी
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नई दिल्ली : हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे गीतकार हुए हैं, जिनके लिखे गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। इनमें एक बड़ा नाम शैलेंद्र का है। अपनी सरल भाषा, भावनात्मक शब्दों और दिल को छू लेने वाली रचनाओं के लिए मशहूर शैलेंद्र ने राज कपूर की फिल्मों को कई यादगार गीत दिए। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने भोजपुरी सिनेमा के शुरुआती दौर में भी अपनी लेखनी का जादू बिखेरा था।

शैलेंद्र ने हिंदी फिल्मों के साथ-साथ भोजपुरी इंडस्ट्री की पहली फिल्म के लिए भी गीत लिखे थे। उनके लिखे भोजपुरी गीतों ने उस दौर में जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की और आज भी उन्हें भोजपुरी सिनेमा की अमूल्य धरोहर माना जाता है।

'अजीब दास्तां है ये' से लेकर भोजपुरी गीतों तक का सफर

शैलेंद्र का नाम हिंदी फिल्म संगीत के सुनहरे दौर से जुड़ा हुआ है। उन्होंने राज कपूर की कई फिल्मों के लिए ऐसे गीत लिखे, जो आज भी लोगों की जुबान पर हैं। फिल्म 'दिल अपना और प्रीत पराई' में मीना कुमारी पर फिल्माया गया मशहूर गीत 'अजीब दास्तां है ये' भी शैलेंद्र की कलम से निकला था।

उनकी लेखनी में आम इंसान की भावनाओं, प्रेम, दर्द और जिंदगी की सच्चाइयों की झलक दिखाई देती थी। यही वजह थी कि उनके गीत हर वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय हुए।

भोजपुरी सिनेमा की पहली फिल्म से जुड़ा नाम

साल 1962 में भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू हुआ। इसी साल कुंदन कुमार ने पहली भोजपुरी फिल्म 'गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो' बनाई। यह फिल्म नाजिर हुसैन की कहानी पर आधारित थी और इसे भोजपुरी सिनेमा की पहली फिल्म के रूप में पहचान मिली।

इस ऐतिहासिक फिल्म के गीतों की जिम्मेदारी मशहूर गीतकार शैलेंद्र को दी गई। उन्होंने भोजपुरी भाषा और संस्कृति की भावनाओं को समझते हुए कई खूबसूरत गीत लिखे।

फिल्म का शीर्षक गीत 'हे गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो, सइयां से कर द मिलनवा हाय राम' लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ। इस गीत में भोजपुरी समाज की आस्था, भावनाओं और पारंपरिक संस्कृति की झलक देखने को मिली।

शैलेंद्र की लेखनी ने भोजपुरी गीतों को दी नई पहचान

शैलेंद्र ने अपने गीतों के जरिए भोजपुरी भाषा की मिठास और लोक संस्कृति को बड़े पर्दे तक पहुंचाया। उनके लिखे गीतों ने न सिर्फ फिल्म को सफलता दिलाई, बल्कि भोजपुरी संगीत को भी एक अलग पहचान दी।

उनकी खासियत थी कि वे कठिन भावनाओं को भी बेहद सरल शब्दों में व्यक्त कर देते थे। यही वजह रही कि उनके गीत शहरों से लेकर गांवों तक लोगों के बीच लोकप्रिय हुए।

पहली फिल्म के बाद लगा बड़ा झटका

शैलेंद्र का जीवन केवल सफलताओं से भरा नहीं था। उन्होंने फिल्म निर्माण में भी कदम रखा और अपनी पहली प्रोड्यूस की हुई फिल्म के बाद उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस झटके ने उन्हें काफी प्रभावित किया।

इसके बावजूद भारतीय सिनेमा में उनका योगदान हमेशा याद किया जाता है। राज कपूर के साथ उनकी जोड़ी ने हिंदी फिल्म संगीत को कई अमर गीत दिए, वहीं भोजपुरी सिनेमा के लिए लिखे उनके गीतों ने उन्हें इस इंडस्ट्री के इतिहास में भी खास स्थान दिलाया।

आज भी जब भोजपुरी सिनेमा के शुरुआती दौर की चर्चा होती है, तो शैलेंद्र का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी रचनाएं इस बात की गवाह हैं कि एक सच्चा गीतकार भाषा की सीमाओं से परे जाकर लोगों के दिलों तक पहुंचता है।

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