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Puri Jagannadh और रवि तेजा की जोड़ी: टैलेंट पर भरोसे ने बदली तेलुगु सिनेमा की दिशा

Harrison
23 April 2026 6:38 PM IST
Puri Jagannadh  और रवि तेजा की जोड़ी: टैलेंट पर भरोसे ने बदली तेलुगु सिनेमा की दिशा
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Hyderabad हैदराबाद : तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में निर्देशक पुरी जगन्नाथ और अभिनेता रवि तेजा की जोड़ी को एक ऐसा उदाहरण माना जाता है, जिसने यह साबित किया कि सही निर्णय किसी भी करियर की दिशा बदल सकता है। यह कहानी उस समय की है जब पुरी जगन्नाथ अपने करियर के शुरुआती उतार-चढ़ाव से गुजर रहे थे।
पुरी जगन्नाथ ने अपने निर्देशन करियर की शानदार शुरुआत फिल्म ‘बद्री’ से की थी, जो एक ब्लॉकबस्टर साबित हुई। लेकिन उनकी दूसरी फिल्म ‘इट्लु श्रावणी सुब्रह्मण्यम’ को असफलता का सामना करना पड़ा, जिसे एक बड़ा झटका माना गया। इस असफलता के बाद उनकी स्थिति कमजोर हो गई और उन्हें दोबारा खुद को साबित करने की चुनौती का सामना करना पड़ा।
इसी कठिन दौर में पुरी जगन्नाथ ने फिल्म ‘इट्लु श्रावणी सुब्रह्मण्यम’ की योजना बनाई थी। हालांकि, फिल्म इंडस्ट्री के कुछ प्रोड्यूसर्स ने सुझाव दिया कि फिल्म में किसी स्थापित और बड़े स्टार को लिया जाए, ताकि फिल्म की व्यावसायिक सफलता सुनिश्चित हो सके। लेकिन पुरी जगन्नाथ अपने निर्णय पर अड़े रहे।
उन्होंने रवि तेजा को इस फिल्म के लिए कास्ट करने का फैसला किया, जिन्हें वे अपने असिस्टेंट डायरेक्टर के दिनों से जानते थे। बताया जाता है कि पुरी ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि रवि तेजा को फिल्म में नहीं लिया गया, तो वह यह प्रोजेक्ट नहीं करेंगे। यह निर्णय उनके आत्मविश्वास और कहानी पर भरोसे को दर्शाता था, न कि केवल स्टार पावर पर निर्भरता को।
यह फिल्म आगे चलकर सफल साबित हुई और रवि तेजा के करियर के लिए भी महत्वपूर्ण मोड़ बन गई। इसके बाद दोनों की जोड़ी को तेलुगु सिनेमा में एक मजबूत और सफल सहयोग के रूप में देखा जाने लगा।
हाल ही में सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर रघु कुंचे ने अपनी फिल्म ‘गेडेला राजू’ के प्रमोशन के दौरान इस पुरानी कहानी का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर मार्केट वैल्यू को टैलेंट से अधिक महत्व दिया जाता है, लेकिन पुरी जगन्नाथ का यह निर्णय इस सोच के विपरीत था।
रघु कुंचे के अनुसार, पुरी का यह फैसला उस समय बेहद जोखिम भरा माना गया था, क्योंकि इंडस्ट्री में यह विश्वास था कि बड़े सितारे ही फिल्म को सफल बना सकते हैं। लेकिन पुरी ने अपने विजन पर भरोसा रखा और नए टैलेंट को मौका दिया।
यह घटना तेलुगु सिनेमा में एक उदाहरण के रूप में देखी जाती है कि कैसे एक निर्देशक का साहसिक निर्णय पूरी इंडस्ट्री में नई दिशा दे सकता है। रवि तेजा को मौका देकर पुरी जगन्नाथ ने यह दिखाया कि सही कहानी और सही कलाकार मिलकर बड़ा प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
आज भी इस जोड़ी को तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में एक महत्वपूर्ण सहयोग के रूप में याद किया जाता है, जिसने यह साबित किया कि जोखिम लेने और टैलेंट पर भरोसा करने से बड़े परिणाम मिल सकते हैं।
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