
मुंबई। भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे चर्चित धारावाहिकों में शामिल ‘महाभारत’ आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखता है। इस ऐतिहासिक सीरियल से जुड़े कई किस्से समय-समय पर सामने आते रहे हैं। अब दुर्योधन का किरदार निभाकर घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता पुनीत इस्सर ने बताया है कि उन्हें यह यादगार भूमिका कैसे मिली और इसके पीछे लेखक डॉ. राही मासूम रजा की अहम भूमिका क्या थी।
लेखक, कवि और गीतकार डॉ. राही मासूम रजा का नाम भारतीय साहित्य और सिनेमा में बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। जब भी बी.आर. चोपड़ा की ‘महाभारत’ का जिक्र होता है, राही मासूम रजा की लेखनी को जरूर याद किया जाता है। उन्होंने पंडित नरेंद्र शर्मा के साथ मिलकर इस लोकप्रिय धारावाहिक की कहानी और संवादों को आकार दिया था।
पुनीत इस्सर को मिला दुर्योधन का यादगार किरदार
पुनीत इस्सर ने बताया कि जब वह ‘महाभारत’ के लिए ऑडिशन देने पहुंचे थे, तब उन्हें उनकी पुरानी छवि के कारण पहचाना गया। उस समय लोग उन्हें अमिताभ बच्चन की चर्चित फिल्म ‘कुली’ से जोड़कर देखते थे।
‘कुली’ के एक एक्शन सीन के दौरान पुनीत इस्सर के एक मुक्के से अमिताभ बच्चन गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद पुनीत के करियर पर भी असर पड़ा और उनकी छवि एक मजबूत शरीर वाले एक्शन अभिनेता की बन गई।
6 फीट 3 इंच लंबे और मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट पुनीत को शुरुआत में उनकी शारीरिक बनावट के कारण भीम के किरदार के लिए उपयुक्त माना गया था।
भीम नहीं दुर्योधन बनना चाहते थे पुनीत
पुनीत इस्सर ने बताया कि जब उन्हें बताया गया कि उन्हें लंबे संवाद बोलने होंगे तो उन्होंने कहा कि उन्होंने डिक्शन यानी संवाद बोलने के अंदाज की ट्रेनिंग ली है।
उन्होंने एक अभिनेता के तौर पर खुद को अलग साबित करने की इच्छा जताई। यही वजह थी कि उन्होंने भीम की भूमिका के बजाय दुर्योधन का किरदार निभाने की इच्छा जाहिर की।
उनका यह फैसला कई लोगों के लिए हैरान करने वाला था, क्योंकि दुर्योधन एक नकारात्मक किरदार था। लेकिन पुनीत का मानना था कि एक कलाकार के लिए चुनौतीपूर्ण भूमिका निभाना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
उनकी यही सोच आगे चलकर उनकी पहचान बन गई। ‘महाभारत’ में दुर्योधन के रूप में उनका अभिनय आज भी दर्शकों को याद है।
राही मासूम रजा ने पहचानी प्रतिभा
पुनीत इस्सर ने बताया कि डॉ. राही मासूम रजा से उनका पुराना जुड़ाव था। राही मासूम रजा ने उनके पिता और फिल्म निर्देशक सुदेश इस्सर के साथ फिल्म ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ में काम किया था।
इस फिल्म के लिए राही मासूम रजा को पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। यही वजह थी कि वह पुनीत और उनके परिवार से परिचित थे।
पुनीत ने बताया कि जब वह सुनील दत्त की फिल्म ‘रॉकी’ के लिए ऑडिशन देने पहुंचे थे, तब भी राही मासूम रजा ने उन्हें सुना था। उन्होंने पुनीत से हिंदी में कुछ सुनाने को कहा।
कविता सुनाकर मिला मौका
पुनीत इस्सर ने बताया कि उन्होंने मैथिलीशरण गुप्त की कविता सुनाई। पहली बार सुनाने के बाद जब उन्होंने उसे दोबारा सुनाया तो राही मासूम रजा उनकी प्रतिभा से प्रभावित हुए।
उन्होंने ‘जयद्रथ वध’ का पाठ भी सुनाया था। इसके बाद उनके अभिनय और संवाद बोलने की क्षमता को देखते हुए उन्हें ‘महाभारत’ में अपनी पसंद का किरदार निभाने का मौका मिला।
महाभारत आज भी है दर्शकों के दिलों में
बी.आर. चोपड़ा की ‘महाभारत’ भारतीय टेलीविजन के सबसे सफल धारावाहिकों में से एक रही है। इसके किरदारों ने कलाकारों को घर-घर में पहचान दिलाई।
पुनीत इस्सर का दुर्योधन आज भी भारतीय टीवी इतिहास के यादगार किरदारों में गिना जाता है। उन्होंने नकारात्मक भूमिका को भी अपनी अभिनय क्षमता से प्रभावशाली बना दिया।
कलाकार के लिए चुनौती जरूरी
पुनीत इस्सर का कहना है कि एक कलाकार को हमेशा अलग और चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं तलाशनी चाहिए। उनके लिए दुर्योधन का किरदार सिर्फ एक खलनायक की भूमिका नहीं थी, बल्कि एक ऐसा अवसर था जिसमें वह अपनी अभिनय क्षमता साबित कर सकते थे।
आज भी जब ‘महाभारत’ की चर्चा होती है तो दुर्योधन के रूप में पुनीत इस्सर का नाम जरूर लिया जाता है।





