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'Last Man in Tower' का दमदार ट्रेलर, जानें कहां देखें फिल्म

nidhi
4 Nov 2026 10:49 AM IST
Last Man in Tower का दमदार ट्रेलर, जानें कहां देखें फिल्म
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मुंबई: बॉलीवुड के दमदार अभिनेता मनोज बाजपेयी एक बार फिर अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने के लिए तैयार हैं। उनकी फिल्म 'लास्ट मैन इन टावर' (Last Man in Tower) अब ओटीटी पर दस्तक देने जा रही है। फिल्म का ट्रेलर दर्शकों का ध्यान खींच रहा है। कहानी एक ऐसे बुजुर्ग शिक्षक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने घर और सिद्धांतों के लिए पूरी हाउसिंग सोसायटी के खिलाफ खड़ा हो जाता है। एक व्यक्ति के इनकार से शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे लालच, रिश्तों और नैतिकता की बड़ी लड़ाई बन जाता है।
फिल्म में मनोज बाजपेयी एक रिटायर्ड शिक्षक योगेश मिश्रा यानी 'मास्टरजी' की भूमिका निभा रहे हैं। उनके सामने ऐसी परिस्थिति आती है, जहां सोसायटी के लगभग सभी लोग एक बिल्डर के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। लेकिन मास्टरजी अपना घर छोड़ने से इनकार कर देते हैं। उनके इस फैसले से पड़ोसियों की उम्मीदों को झटका लगता है और जो लोग कभी उनके करीबी थे, वही उनके विरोध में खड़े होने लगते हैं। फिल्म की कहानी मुंबई की एक हाउसिंग सोसायटी और उसके पुनर्विकास से जुड़ी है। एक बिल्डर पुरानी इमारत की जगह नई परियोजना शुरू करना चाहता है। इसके बदले सोसायटी के लोगों को आर्थिक लाभ का प्रस्ताव मिलता है। अधिकांश निवासी बेहतर भविष्य की उम्मीद में इस प्रस्ताव से सहमत हो जाते हैं।
लेकिन मास्टरजी के लिए उनका पुराना घर केवल एक संपत्ति नहीं, बल्कि यादों और आत्मसम्मान से जुड़ी जगह है। वह आर्थिक फायदे के लिए इसे छोड़ना नहीं चाहते। यही फैसला आगे चलकर उनके और पड़ोसियों के बीच टकराव की वजह बनता है। ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे पैसे और बेहतर जिंदगी की चाहत लोगों के व्यवहार को बदल देती है। शुरुआत में जो विवाद केवल एक मकान बेचने तक सीमित नजर आता है, वह धीरे-धीरे पूरी सोसायटी के रिश्तों को प्रभावित करने लगता है।
फिल्म में मनोज बाजपेयी के अलावा बोमन ईरानी और दिव्या दत्ता भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। बोमन ईरानी बिल्डर धर्मेन शाह और दिव्या दत्ता मिसेज पुरी के किरदार में नजर आती हैं। इन कलाकारों की मौजूदगी कहानी के संघर्ष को और दिलचस्प बनाती है। 'लास्ट मैन इन टावर' का निर्देशन बेन रेखी ने किया है। यह फिल्म बुकर पुरस्कार विजेता लेखक अरविंद अडिगा के वर्ष 2011 में प्रकाशित इसी नाम के उपन्यास पर आधारित है। कहानी में शहरी विकास, संपत्ति के बढ़ते मूल्य, व्यक्तिगत अधिकार और सामाजिक दबाव जैसे मुद्दों को उठाया गया है। मनोज बाजपेयी अपने किरदारों में गहराई लाने के लिए जाने जाते हैं। इस फिल्म में भी उनका किरदार किसी बड़े अपराधी या बाहरी दुश्मन से नहीं लड़ता, बल्कि उन लोगों का विरोध झेलता है जिनके साथ उसने वर्षों बिताए हैं। यही बात कहानी को खास बनाती है।
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