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‘निकाह’ के विरोध में सिनेमाघरों के बाहर लगे थे पोस्टर, सलमा आगा को भी मिली थीं धमकियां

nidhi
28 Oct 2026 9:00 AM IST
‘निकाह’ के विरोध में सिनेमाघरों के बाहर लगे थे पोस्टर, सलमा आगा को भी मिली थीं धमकियां
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एंटरटेनमेंट : हिंदी सिनेमा में कई फिल्मों ने सामाजिक सवाल उठाए और विरोध का सामना भी किया। वर्ष 1982 में आई बीआर चोपड़ा की फिल्म ‘निकाह’ ऐसी ही चर्चित फिल्मों में शामिल है। सलमा आगा, राज बब्बर और दीपक पाराशर अभिनीत इस फिल्म ने विवाह, तलाक और महिला की गरिमा से जुड़े सवालों को कहानी का केंद्र बनाया। फिल्म को दर्शकों का समर्थन मिला, लेकिन इसके विषय और प्रस्तुति को लेकर विवाद भी हुए। बाद के वर्षों में प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों में फिल्म से जुड़े करीब 34 मुकदमों का उल्लेख मिलता है। कुछ रिपोर्टें यह संख्या 34 से अधिक बताती हैं। सिनेमाघरों के बाहर फिल्म न देखने की अपील वाले पोस्टर लगाए जाने और अभिनेत्री सलमा आगा को धमकियां मिलने की जानकारी भी प्रकाशित हुई है। हालांकि, इन पुराने मुकदमों की पूरी सूची और धमकियों का स्वतंत्र प्राथमिक रिकॉर्ड उपलब्ध स्रोतों में नहीं मिला है।

पहले ‘तलाक तलाक तलाक’ था फिल्म का नाम
‘निकाह’ का शुरुआती शीर्षक ‘तलाक तलाक तलाक’ था। फिल्म के निर्माण से जुड़े प्रकाशित किस्सों के अनुसार, बाद में इसका नाम बदलकर ‘निकाह’ रखा गया। नाम बदलने की वजह को लेकर अलग-अलग विवरण मिलते हैं। कुछ रिपोर्टें इसे शीर्षक पर आपत्तियों से जोड़ती हैं, जबकि अन्य में बीआर चोपड़ा और उनके एक परिचित की बातचीत का किस्सा बताया गया है। इस बातचीत वाले किस्से में कहा गया कि फिल्म का शुरुआती नाम सामान्य संवाद में भी असहज स्थिति पैदा कर सकता था। यह प्रसंग फिल्मी इतिहास से जुड़े लेखों में बार-बार दोहराया गया है। हालांकि, इसे किसी धार्मिक या कानूनी निष्कर्ष के रूप में नहीं समझना चाहिए। नया नाम मिलने के बाद भी फिल्म का मूल सामाजिक विषय बना रहा। कहानी का सवाल था कि वैवाहिक रिश्तों में फैसले लेते समय महिला की इच्छा, सम्मान और भविष्य को कितनी जगह मिलती है।
नीलोफर की कहानी ने उठाए कठिन सवाल
फिल्म में सलमा आगा ने नीलोफर का किरदार निभाया। कहानी में उसके वैवाहिक जीवन में तनाव और तलाक के बाद की परिस्थितियां दिखाई गई हैं। उसके जीवन में नया रिश्ता आता है, लेकिन पुराने संबंध और गलतफहमियां फिर कठिन स्थिति पैदा करते हैं। इस घटनाक्रम के जरिए फिल्म महिला को पुरुषों के फैसलों के बीच रखी वस्तु समझने की सोच पर सवाल उठाती है।
‘निकाह’ की पहचान केवल एक प्रेम त्रिकोण के रूप में नहीं बनी। उसके भावनात्मक दृश्यों के पीछे विवाह में बराबरी और व्यक्तिगत गरिमा का प्रश्न था। यही पहलू उसे सामान्य रोमांटिक फिल्मों से अलग चर्चा में लाया।
फिल्म की कहानी को उस दौर की सामाजिक परिस्थितियों के संदर्भ में देखना जरूरी है। वर्ष 1982 में पर्दे पर दिखाई गई व्यवस्था को वर्तमान कानून की जानकारी मानकर प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
विरोध में लगे पोस्टर, कानूनी विवाद भी हुए
फिल्मी इतिहास पर प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ मुस्लिम संगठनों ने ‘निकाह’ का विरोध किया था। सिनेमाघरों के बाहर पोस्टर लगाकर लोगों से फिल्म न देखने की अपील की गई। फिल्म और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी आपत्तियां उठाए जाने की जानकारी भी मिलती है।
यहां किसी संगठन या कुछ व्यक्तियों के विरोध को पूरे समुदाय की राय नहीं माना जाना चाहिए। फिल्म के दर्शकों और समर्थकों की मौजूदगी भी बताती है कि किसी सामाजिक विषय पर प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं होतीं।
मुकदमों की संख्या के संबंध में भी सावधानी जरूरी है। उपलब्ध मनोरंजन रिपोर्टों में 34 या उससे अधिक मामलों का उल्लेख है, लेकिन प्रत्येक मामले की प्रकृति, स्थान और अंतिम न्यायिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए सभी मामलों को समान आरोप या एक जैसे परिणाम वाला बताना उचित नहीं होगा।
सलमा आगा को धमकियों की रिपोर्ट
विरोध का असर फिल्म की अभिनेत्री तक पहुंचने की जानकारी भी सामने आई थी। एशियानेट की एक रिपोर्ट के अनुसार, सलमा आगा को धमकी भरे पत्र भेजे गए थे। इनमें लंदन लौटने और गंभीर परिणाम भुगतने जैसी चेतावनियों का उल्लेख बताया गया है। यह जानकारी बाद में प्रकाशित फिल्मी लेख पर आधारित है।
धमकी मिलना गंभीर बात है, लेकिन उपलब्ध विवरण के आधार पर अभिनेत्री पर किसी वास्तविक हमले का दावा नहीं किया जा सकता। इसी कारण उनकी जिंदगी निश्चित रूप से खतरे में पड़ गई थी जैसी सनसनीखेज प्रस्तुति के बजाय प्रकाशित आरोपों को स्पष्ट रूप से बताना अधिक सही है।
विशेष स्क्रीनिंग से समझाने की कोशिश
विवाद बढ़ने पर बीआर चोपड़ा ने फिल्म का उद्देश्य समझाने के लिए विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की थी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें फिल्म की विषयवस्तु और मंशा स्पष्ट करने का प्रयास किया गया। निर्माताओं की ओर से इसे महिला अधिकारों और सामाजिक सवालों से जुड़ी कहानी के रूप में समझाया गया। विरोध के बावजूद ‘निकाह’ को व्यावसायिक सफलता मिली। सलमा आगा के अभिनय और गायन ने भी उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। राज बब्बर और दीपक पाराशर के साथ उनकी मौजूदगी फिल्म की प्रमुख विशेषताओं में रही। आज ‘निकाह’ को याद करने की वजह केवल उससे जुड़े विवाद नहीं हैं। फिल्म ने मनोरंजन के माध्यम से रिश्तों में सम्मान और महिला की स्वतंत्र इच्छा का सवाल सामने रखा। उसके आसपास हुआ विरोध उस दौर में संवेदनशील सामाजिक विषयों को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने की चुनौतियां भी दिखाता है।

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