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पूनम पांडे बोलीं मेरा बोल्ड कंटेंट समाज सेवा भारत में कानूनी हो वेश्यावृत्ति

nidhi
5 Sept 2026 1:25 PM IST
पूनम पांडे बोलीं मेरा बोल्ड कंटेंट समाज सेवा भारत में कानूनी हो वेश्यावृत्ति
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पूनम पांडे का विवादित बयान

एंटरटेनमेंट डेस्क: मॉडल और अभिनेत्री पूनम पांडे एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में सामने आए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने बोल्ड और कामुक कंटेंट को लेकर खुलकर बात की। पूनम ने इसे अपने अंदाज में 'समाज सेवा' बताया और दावा किया कि उनके वीडियो कुछ पुरुषों को तनाव से राहत देने में मदद करते हैं। इसी बातचीत में उन्होंने भारत में वेश्यावृत्ति को कानूनी और विनियमित करने की वकालत भी की। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।

अपने कंटेंट को क्यों बताया 'समाज सेवा'?
इंटरव्यू के दौरान पूनम पांडे से उनके बोल्ड कंटेंट को लेकर सवाल किया गया। जवाब में उन्होंने तर्क दिया कि बहुत से लोग जिंदगी में तनाव और परेशानियों से गुजरते हैं और अगर उनका कंटेंट उन्हें कुछ समय के लिए अच्छा महसूस कराता है तो वह इसे अपने तरीके की 'समाज सेवा' मानती हैं। पूनम का यह बयान तेजी से चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे उनकी बेबाक शैली से जोड़ रहे हैं, जबकि दूसरे लोग उनके तर्क की आलोचना कर रहे हैं।
वेश्यावृत्ति को कानूनी बनाने की मांग
इसी बातचीत में पूनम ने भारत में सेक्स वर्क को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इसे कानूनी और रेगुलेट किया जाना चाहिए। उनका दावा था कि इससे व्यवस्था को नियंत्रित करने और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि यह उनका निजी दावा है और इस तरह के अपराधों में कमी आने की बात को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। पूनम के इस बयान ने सेक्स वर्क से जुड़े कानून, सुरक्षा, मानव तस्करी और सहमति जैसे मुद्दों पर एक बार फिर चर्चा शुरू कर दी है।
भारत में क्या है मौजूदा कानूनी स्थिति?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। भारत में किसी वयस्क द्वारा स्वेच्छा से सेक्स वर्क करना अपने-आप में अपराध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी 2026 में कहा कि स्वैच्छिक सेक्स वर्क में शामिल वयस्कों को केवल इसी आधार पर पुलिस निशाना नहीं बना सकती और उनकी इच्छा के विरुद्ध पुनर्वास के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वेश्यावृत्ति से जुड़ी सभी गतिविधियां कानूनी हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक Immoral Traffic (Prevention) Act, 1956 के तहत मानव तस्करी, व्यावसायिक यौन शोषण और इससे जुड़ी कई गतिविधियों के खिलाफ कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। इसलिए 'भारत में वेश्यावृत्ति पूरी तरह गैरकानूनी है' या 'पूरी तरह कानूनी है'—दोनों ही बातें कानूनी स्थिति को जरूरत से ज्यादा सरल बना देती हैं।
पहले भी विवादों में रही हैं पूनम
पूनम पांडे अपने बोल्ड सोशल मीडिया पोस्ट और विवादास्पद बयानों के कारण पहले भी सुर्खियों में रही हैं। वह अक्सर सेक्सुअलिटी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखती रही हैं। इस बार उनके दो बयानों—अपने कंटेंट को 'समाज सेवा' बताने और सेक्स वर्क को कानूनी-नियंत्रित व्यवस्था में लाने की वकालत—ने उन्हें फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
बयान पर छिड़ी नई बहस
सेक्स वर्क का मुद्दा केवल नैतिकता तक सीमित नहीं है। इसमें वयस्कों की सहमति, श्रमिक अधिकार, सार्वजनिक स्वास्थ्य, शोषण और मानव तस्करी जैसे कई पहलू शामिल हैं। इसी वजह से इसे लेकर अलग-अलग देशों में अलग कानूनी मॉडल अपनाए गए हैं। पूनम पांडे का बयान उनकी व्यक्तिगत राय है। खास तौर पर सेक्स वर्क को कानूनी बनाने से महिलाओं के खिलाफ अपराध कम होने का उनका दावा अपने आप में प्रमाणित निष्कर्ष नहीं है। लेकिन उनके बयान ने भारत में सेक्स वर्क के कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।
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