
मुंबई | नागेश कुकुनूर भारतीय सिनेमा के उन निर्देशकों में से एक हैं, जिन्होंने बॉलीवुड में अलग तरह की कहानियों को दिखाने की पहल की। एक समय पर केमिकल इंजीनियर रहे कुकुनूर ने अपने इंजीनियरिंग करियर में कमाए पैसों से अपनी पहली फिल्म बनाई। लेकिन उनकी असली पहचान बनी 2005 में आई 'इकबाल' से, जिसने न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी पहचान बना दी।
नागेश कुकुनूर का जन्म हैदराबाद में हुआ था। उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली और अमेरिका में जॉब करने लगे। लेकिन फिल्मों के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। अपने पहले प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने खुद के इंजीनियरिंग के काम से बचाए हुए पैसे लगाए और 1998 में अपनी पहली फिल्म 'हैदराबाद ब्लूज़' बनाई।
'इकबाल' ने दिलाई नई पहचान
हालांकि, उनकी असली सफलता 2005 में आई 'इकबाल' से मिली, जो एक गूंगे-बहरे लड़के के क्रिकेटर बनने के संघर्ष पर आधारित थी। इस फिल्म को क्रिटिक्स और दर्शकों दोनों ने खूब सराहा। फिल्म ने राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीता और इसके बाद नागेश कुकुनूर का करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।
इसके बाद की जर्नी
इसके बाद कुकुनूर ने 'डोर', 'लक्ष्मी', 'धनक' और 'मोड़' जैसी बेहतरीन फिल्में बनाईं। उनकी फिल्में ह्यूमन इमोशन्स और सच्ची कहानियों पर आधारित होती हैं, जो दर्शकों को गहराई से प्रभावित करती हैं।
आज भी कर रहे बेहतरीन काम
आज भी नागेश कुकुनूर ओटीटी और फिल्मों में सक्रिय हैं। वे ऐसी कहानियां चुनते हैं, जो सामाजिक और मानवीय भावनाओं से जुड़ी होती हैं।





