
Entertainment मनोरंजन : अभिनेत्री मधु ने हाल ही में अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उनकी फिल्म *फूल और कांटे* में उन्हें हंसी-खुशी के बावजूद मुश्किलें झेलनी पड़ीं। उन्होंने कहा कि फिल्म के हीरो ने उनके साथ छेड़छाड़ और हैरासमेंट किया, लेकिन उस समय यह विषय ज्यादा चर्चा में नहीं आया और फिल्म हिट हो गई। मधु ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि उस दौर में फिल्म इंडस्ट्री और समाज की सोच अलग थी।
उन्होंने बताया कि पुराने जमाने की फिल्मों में कई ऐसे सीन होते थे, जिन्हें आज के नजरिए से देखा जाए तो स्वीकार्य नहीं हैं। विशेष रूप से रेप और हैरासमेंट जैसे दृश्य उन फिल्मों में सामान्यता के साथ दिखाए जाते थे। मधु के अनुसार, रंजीत जैसे निर्देशकों को उस समय “रेप एक्सपर्ट” कहा जाता था, क्योंकि वे संवेदनशील विषयों को फिल्मों में अक्सर शामिल करते थे। हालांकि, इन सीन का मकसद मनोरंजन का हिस्सा माना जाता था और उस समय इसके खिलाफ कोई बड़ी आलोचना नहीं होती थी।
मधु का कहना है कि अगर आज के समय में ऐसी घटनाएं या दृश्य फिल्म में दिखाई देते, तो निश्चित रूप से लोग इसे कड़ी आलोचना और ट्रोलिंग के रूप में देखते। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जमाने में दर्शकों की संवेदनशीलता और सामाजिक जागरूकता पहले से काफी बढ़ गई है। ऐसे में फिल्म में किसी के साथ अनुचित व्यवहार दिखाना अब बेहद गंभीर मुद्दा माना जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म इंडस्ट्री में बदलाव की प्रक्रिया धीरे-धीरे हुई है। अब फिल्मों में रेप या हैरासमेंट के दृश्य को दिखाने पर सख्त नियम और सेंसरशिप लागू है। निर्देशक और निर्माता अब इस तरह के विषयों को संवेदनशील ढंग से पेश करने के लिए सोच-विचार करते हैं। कई बार ऐसे दृश्य पूरी तरह से हटाए जाते हैं या उनका प्रभाव कम करने के लिए कहानी में बदलाव किए जाते हैं।
मधु ने यह बात भी साझा की कि पुराने समय में कलाकारों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की जानकारी सीमित थी। कई बार अभिनेत्रियों को अपने काम को लेकर या सीन के दौरान असुरक्षित महसूस करना पड़ता था। लेकिन उस दौर में इसके खिलाफ खुलकर आवाज उठाना आसान नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि अब की पीढ़ी के कलाकार ज्यादा जागरूक हैं और अपनी सुरक्षा और अधिकारों के प्रति सजग रहते हैं।
उनकी इस चर्चा से यह स्पष्ट होता है कि फिल्म इंडस्ट्री में समय के साथ बदलाव आया है। पुराने जमाने की फिल्मों में मनोरंजन और ड्रामा के लिए दिखाए गए विवादित दृश्य आज के नजरिए से स्वीकार्य नहीं होंगे। मधु ने यह भी जोड़ते हुए कहा कि यह बदलाव दर्शकों और समाज की बदलती सोच का परिणाम है।
कुल मिलाकर, मधु ने अपने अनुभव साझा करते हुए पुराने जमाने की फिल्मों की वास्तविकताओं और आज के समय में फिल्म बनाने के नियमों और संवेदनशीलता के बीच के अंतर पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि कलाकारों की सुरक्षा, उनके अधिकार और फिल्म में दिखाए जाने वाले सीन अब पहले से ज्यादा गंभीरता से देखे जाते हैं।





