Lata Mangeshkar's का पहला भोजपुरी गीत, राष्ट्रपति की थी खास इच्छा

Entertainment मनोरंजन : स्वर कोकिला और भारत रत्न से सम्मानित महान गायिका लता मंगेशकर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज का जादू आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जिंदा है। हिंदी सिनेमा को कई अमर गीत देने वाली लता मंगेशकर ने सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि कई भारतीय भाषाओं में भी अपनी मधुर आवाज का जादू बिखेरा था। बहुत कम लोग जानते हैं कि भोजपुरी सिनेमा के इतिहास का पहला गीत भी लता मंगेशकर ने ही गाया था।
भोजपुरी सिनेमा आज देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बना चुका है। भोजपुरी फिल्मों के कलाकारों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और कई कलाकार हिंदी सिनेमा में भी अपनी जगह बना चुके हैं। लेकिन भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की शुरुआत के दिनों में लता मंगेशकर का योगदान बेहद खास रहा है। उन्होंने भोजपुरी की पहली फिल्म के लिए अपनी आवाज दी और इस भाषा के पहले गीत को यादगार बना दिया।
भोजपुरी सिनेमा की पहली फिल्म ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ साल 1963 में रिलीज हुई थी। यह फिल्म भोजपुरी भाषा की पहली फीचर फिल्म मानी जाती है। इस फिल्म का टाइटल सॉन्ग ही भोजपुरी सिनेमा का पहला गीत था, जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। इस गाने में लता मंगेशकर के साथ उनकी बहन ऊषा मंगेशकर ने भी अपनी मधुर आवाज का योगदान दिया था।
कहा जाता है कि लता मंगेशकर ने यह गीत तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के आग्रह पर गाया था। डॉ. राजेंद्र प्रसाद खुद भोजपुरी भाषा और संस्कृति से जुड़े हुए थे और वह चाहते थे कि भोजपुरी भाषा में बनने वाली पहली फिल्म को देश की महान गायिका लता मंगेशकर की आवाज मिले। उनके अनुरोध के बाद लता मंगेशकर ने इस ऐतिहासिक गीत को अपनी आवाज देकर इसे अमर बना दिया।
‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ फिल्म ने भोजपुरी सिनेमा के लिए एक नई शुरुआत की थी। इस फिल्म ने न सिर्फ भोजपुरी भाषा को बड़े पर्दे पर पहचान दिलाई, बल्कि क्षेत्रीय सिनेमा के विकास की नींव भी रखी। फिल्म की कहानी और गीतों को दर्शकों ने काफी पसंद किया था।
लता मंगेशकर का भोजपुरी गीत गाना इस भाषा के लिए भी गर्व का विषय माना जाता है। उनकी आवाज ने भोजपुरी संगीत को एक अलग पहचान दिलाई और इस गीत को आज भी भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में खास स्थान हासिल है। हालांकि लता मंगेशकर ने अपने लंबे करियर में हजारों गाने गाए, लेकिन भोजपुरी का पहला गीत उनके करियर की एक अनमोल उपलब्धि माना जाता है।
लता मंगेशकर ने अपने सात दशक से ज्यादा लंबे संगीत सफर में कई भाषाओं में गीत गाए और भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी आवाज में भावनाओं की गहराई और मिठास थी, जिसकी वजह से हर भाषा के श्रोता उनसे जुड़ जाते थे।
भोजपुरी सिनेमा के शुरुआती दौर में लता मंगेशकर का जुड़ना इस इंडस्ट्री के लिए किसी सम्मान से कम नहीं था। आज भी जब भोजपुरी सिनेमा के इतिहास की बात होती है तो ‘गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो’ और उसमें लता मंगेशकर की आवाज का जिक्र जरूर किया जाता है। यह गीत भोजपुरी संस्कृति और भारतीय संगीत विरासत का एक यादगार हिस्सा बन चुका है।





