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रामायण में मॉडर्न कॉस्ट्यूम पर मचा विवाद डिजाइनर्स ने बताई वजह
मुंबई: नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' के ट्रेलर रिलीज के बाद जहां फिल्म के भव्य सेट, वीएफएक्स और कलाकारों की चर्चा हो रही है, वहीं किरदारों के कॉस्ट्यूम को लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। खासतौर पर साई पल्लवी के सीता वाले लुक और लारा दत्ता के कैकेयी किरदार के पहनावे को लेकर कुछ लोगों ने सवाल उठाए। अब फिल्म के कॉस्ट्यूम डिजाइनर्स रिंपल और हरप्रीत नरूला ने इन आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया दी है।
डिजाइनर्स ने कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि रामायण जैसी लोकप्रिय और आस्था से जुड़ी कहानी को नए अंदाज में पेश करने पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आएगी। उनके अनुसार, यह महाकाव्य पीढ़ियों से लोगों के मन में बसा हुआ है, इसलिए इसके किरदारों, वेशभूषा और विजुअल प्रस्तुति पर चर्चा होना स्वाभाविक है।
साई पल्लवी के सीता लुक पर दी सफाई
साई पल्लवी के सीता किरदार के लुक, खासकर उनके ब्लाउज डिजाइन को लेकर सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। इस पर कॉस्ट्यूम डिजाइनर रिंपल ने कहा कि यह डिजाइन किसी गलती का परिणाम नहीं था, बल्कि एक सोच के साथ तैयार किया गया था। उन्होंने बताया कि जब वह माता सीता की कल्पना करती हैं तो उनके मन में किसी पुरातात्विक प्रमाण से ज्यादा आस्था और बचपन से देखी गई छवि आती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने सीता को उसी भाव के साथ डिजाइन किया, जैसा रूप उनकी श्रद्धा में मौजूद है। यह एक सोच-समझकर लिया गया फैसला था।
लारा दत्ता के कैकेयी लुक के पीछे भी खास सोच
लारा दत्ता के कैकेयी किरदार के कॉस्ट्यूम को लेकर भी कई तरह की प्रतिक्रियाएं आई थीं। कुछ लोगों ने उनके लुक को आधुनिक बताया था। इस पर डिजाइनर हरप्रीत नरूला ने बताया कि कैकेयी के पहनावे में इस्तेमाल किए गए रंगों का विशेष अर्थ रखा गया है। उन्होंने कहा कि हरा रंग कैकेयी के मातृत्व भाव को दर्शाता है, जबकि गहरा मैरून रंग उनके अंदर चल रहे भावनात्मक संघर्ष और कठिन फैसले का प्रतीक है। कैकेयी एक मां होने के साथ-साथ उस स्थिति में हैं जहां उन्हें अपने पुत्र भरत और राम के बीच निर्णय लेना पड़ता है। इसलिए उनके कॉस्ट्यूम के हर रंग को सोच-समझकर चुना गया है।
"पहले फिल्म देखिए, फिर राय बनाइए"
डिजाइनर्स ने दर्शकों से अपील की है कि केवल ट्रेलर या कुछ तस्वीरों के आधार पर फिल्म के लुक को जज न करें। उनका कहना है कि रामायण को पर्दे पर दिखाना एक बड़ी जिम्मेदारी है और उन्होंने हर किरदार के पीछे पूरी ईमानदारी से काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि त्रेता युग के पहनावे को लेकर आज कोई ऐसा निश्चित प्रमाण मौजूद नहीं है, जिसे हूबहू दोहराया जा सके। इसलिए हर फिल्म निर्माता और कलाकार अपनी समझ और रचनात्मक दृष्टिकोण के अनुसार इसकी प्रस्तुति करता है।
रामायण को नए विजुअल अंदाज में पेश करने की कोशिश
फिल्म के डिजाइनर्स का कहना है कि उनका उद्देश्य प्राचीन महाकाव्य को नई पीढ़ी के सामने प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि फिल्म के हर कॉस्ट्यूम, रंग और डिजाइन के पीछे एक कहानी छिपी हुई है। अब फिल्म रिलीज होने के बाद ही पता चलेगा कि दर्शक साई पल्लवी, लारा दत्ता और बाकी कलाकारों के लुक को कितना पसंद करते हैं। फिलहाल कॉस्ट्यूम को लेकर शुरू हुई बहस ने फिल्म की चर्चा को और बढ़ा दिया है।
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