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Entertainment,मनोरंजन: बॉलीवुड और रीज़नल सिनेमा की दुनिया में एक बार फिर धमाकेदार मोड़ आया है—“कांतारा” ने अब तक की कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और “छावा” की रिकॉर्ड कमाई को भी पीछे छोड़ते हुए बॉक्स ऑफिस पर धिराज बना हुआ है। इस कन्नड़ फिल्म ने न सिर्फ अपनी मूल भाषा में, बल्कि हिंदी और अन्य भाषाओं में भी क्रांतिकारी प्रदर्शन किया है।
“कांतारा” की कमाई और रिकॉर्डब्रेकिंग सफर
रिशभ शेट्टी निर्देशित “कांतारा” ने रिलीज़ के प्रारंभिक ही दिनों में जबरदस्त सफलता दर्ज की थी। इसने जल्दी ही कन्नड़ सिनेमा की टॉप फिल्मों की सूची में अपनी जगह बना ली।भारत में इसकी कुल कमाई लगभग ₹361 करोड़ के करीब बताई गई है, जबकि विदेशों से मिले ₹36 करोड़ के साथ वैश्विक बॉक्स ऑफिस में यह लगभग ₹397 करोड़ की कमाई के करीब पहुंची। इसके चलते “कांतारा” सैंडलवुड (कन्नड़ सिनेमा) की दूसरी सबसे बड़ी कमाई करने वाली फिल्म बन गई है, केवल KGF 2 के बाद। यह फिल्म भारत में आठवें सप्ताह में लगभग ₹12.70 करोड़ की कमाई कर गई, जो एक हिंदी फिल्म के लिए 21 वर्ष पुराने रिकॉर्ड “गदर” का आँकड़ा (≈₹7 करोड़) पार कर गया। इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि “कांतारा” ने न सिर्फ स्थानीय दर्शकों का दिल जीता है, बल्कि पूरे भारत में अपनी पकड़ बना ली है।
“छावा” रिकॉर्ड — और अब क्या हुआ?
“छावा” नामक फिल्म ने पहले कई रिकॉर्ड स्थापित किए—जिनमें बुकमायशो टिकट बिक्री, आय तथा दर्शकों की संख्या शामिल है।
“छावा” ने BookMyShow पर 1.2 करोड़ टिकट बिक्री का पहला हिंदी फिल्म रिकॉर्ड बनाया।
इसके अलावा, “छावा” को 2025 की सबसे बड़ी कमाई करने वाली फिल्म करार दिया गया और इसकी कमाई लगभग ₹767.25 करोड़ बताई गई।
लेकिन अब “कांतारा” ने ऐसे प्रदर्शन कर दिखाया है कि “छावा” का यह रिकॉर्ड चुनौतिपूर्ण स्थिति में आ गया है।
कैसे हुआ “कांतारा” का दबदबा?
लोक-केंद्रित कहानी और वर्ड ऑफ माउथ
“कांतारा” की कथा गांवों, प्रकृति, देवताओं और पारंपरिक लोक मान्यताओं को मिलाकर बुनी गई थी। इसकी लोक जड़ों ने लोगों को तुरंत जोड़ लिया।
मजबूत बहुभाषी रिलीज़ इस फिल्म को मूल कन्नड़ भाषा के अलावा हिंदी और अन्य भाषाओं में भी रिलीज़ किया गया, जिससे व्यापक दर्शक समूह तक पहुंच बनाई।
कम लागत, अधिक विक्रय क्षमता निर्माण लागत अपेक्षाकृत कम रहने के बावजूद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भारी प्रतिफल दिया।
यदि “छावा” को पीछे छोड़ा गया है “छावा” की रिकॉर्ड कमाई पर सवाल इसलिए उठे क्योंकि “कांतारा” ने न केवल हिंदी और गैर-कन्नड़ क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया, बल्कि भारतीय बाजारों में लंबे समय तक पकड़ बनाए रखी। “कांतारा” की इस अभूतपूर्व सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि कहानी, सादगी, और लोकप्रियता ही फिल्मों को दीर्घकालीन सफलता दिला सकती हैं। अब “छावा” का रिकॉर्ड टूट गया है और “कांतारा” को भारत के सिनेमाई इतिहास में एक नए जीवनशैली फ़िल्म के रूप में याद किया जाएगा।
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