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Entertainment,मनोरंजन: बॉलीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन ने हाल ही में एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने उनके संघर्ष और मातृत्व के प्रति उनकी दृढ इच्छाशक्ति को फिर से उजागर कर दिया। उन्होंने बताया कि जब वे अपनी बेटी रेनी को अपनाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं, तब उन्हें डर था कि कोर्ट उन्हें बच्चे से अलग कर देगा। इस डर से उन्होंने एक पल को भी हिम्मत नहीं खोई — उनके पास एक खतरनाक लेकिन भावनात्मक प्लान भी था।
कानूनी जंग और अनिश्चितता
सुष्मिता ने बताया कि उन्होंने रेन को गोद लेने की प्रक्रिया के दौरान जब मामला फैमिली कोर्ट में गया, तब डर और तनाव उनका बन गया था। उन्होंने साझा किया कि शुरुआत में वह इस लड़ाई को अकेले लड़ रही थीं, लेकिन हर वक्त यह डर उनके साथ था कि यदि कोर्ट ने फैसला उनके खिलाफ किया, तो उनकी बेटी उन्हें छीन ली जाएगी।
भागने की रणनीति
उनका यह डर इतना गहरा था कि उन्होंने अपने पिता से कहा था — “पापा, बस गाड़ी स्टार्ट रखो” — ताकि यदि कोर्ट ने ऐसा आदेश दिया कि रेन उन्हें लौटानी होगी, तो वे तुरंत उस गाड़ी में बैठ कर भाग जाएँ।
उन्होंने कहा, “मैंने पापा को कहा था कि hearing के दौरान गाड़ी चालू रखो — तुम उसे ले चल देना।”
हालाँकि, उनके पिता ने इस योजना को क्रियान्वित करने से इनकार कर दिया। “अब हम सचमुच इतना आगे नहीं जाने वाले,” उन्होंने कहा।
लेकिन सुष्मिता का जुनून अडिग था — “वे मेरी बच्ची मुझे नहीं ले सकते।”
पिता का समर्थन और कोर्ट की चुनौतियाँ
सुष्मिता ने यह भी बताया कि उनके पिता कोर्ट के समक्ष यह दिखाने को तैयार हो गए थे कि वे आर्थिक रूप से इस बच्ची के पालन‑पोषण का जिम्मा उठा सकते हैं। अमेरिका की अदालतों की तरह भारत में भी गोद लेने की प्रक्रिया में “financial intent” दिखाना जरूरी होता है। उनके पिता ने कहा कि वे बेटी के नाम पर अपनी सारी संपत्ति हस्तांतरित करने को तैयार हैं, ताकि कोर्ट को यह विश्वास हो कि इसके लिए खर्च उठाना बाध्य नहीं है। कोर्ट में कुछ जजों ने सुष्मिता को चेतावनी भी दी कि एक सिंगल मदर होने की वजह से वह शादी नहीं कर पाएंगी। लेकिन उनके पिता ने जवाब दिया कि उन्होंने अपनी बेटी को किसी के होने के लिए नहीं पाला, बल्कि जिंदगी के लिए पाला है।
अंत में फैसला सुष्मिता के पक्ष में
इन साहसिक प्रयासों और दृढ संकल्प के बीच, कोर्ट ने अंततः फैसला सुष्मिता के पक्ष में दिया और रेन को उनका अधिकार मिला। सुष्मिता ने कहा कि ऐसे निर्णय के लिए उनके पिता का समर्थन एक आधार था — “मेरी बच्चे मेरे पिता की बदौलत हैं,” वह कहती हैं।
मातृत्व की सफलता और आगे की राह
सुष्मिता ने यह भी माना कि पहली बेटी को गोद लेने की चुनौतियाँ बहुत बड़ी थीं, लेकिन दूसरी बेटी अलीसा को गोद लेने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सहज रही। अब एक मजबूत मां और कलाकार के रूप में, सुष्मिता ने यह साबित कर दिया कि सामाजिक बाधाएँ, कानूनी चुनौतियाँ, या व्यक्तिगत आलोचनाएँ — कुछ भी उसे उसकी माँ बनने की चाह को नहीं रोक सकती।
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