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Mumbai मुंबई: फिल्म ओमकारा का 'लक्कड़' गीत जहां आत्मा को छूता है, वहीं 'कबीरा' मोहब्बत में डूबे आशिकों की आंखों में आंसू ला देता है। जब 'नमक इश्क का' और 'घाघरा' जैसे गाने सुनते हैं तो खुद को डांस करने से रोक पाना नामुमकिन है। ये सभी अलग-अलग गानों के पीछे एक ही आवाज है, जिसने हर इमोशन को शब्द में उतारकर दर्शकों के दिलों को छूआ है। हम बात कर रहे हैं प्लेबैक सिंगर रेखा भारद्वाज की, जो 24 जनवरी को अपना 62वां जन्मदिन मना रही हैं।
बॉलीवुड में अपनी हाई पिच की आवाज के लिए जानी जाने वाली रेखा का शुरुआती जीवन ही संगीतमय रहा है। उनके पति को भी संगीत का शौक था, लेकिन उनके माता-पिता ने संगीत को कमतर मानकर सिखाने से मना कर दिया। सिंगर के पिता ने ठान लिया था कि भले ही वे संगीत सीख नहीं पाए, लेकिन अपने बच्चों को जरूर सिखाएंगे। बस फिर क्या, रेखा ने तीन साल की उम्र से गाना शुरू कर दिया, और पीछे खास वजह थी रेडियो।
रेखा ने खुद एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उनके घर में सुबह से ही रेडियो बजना शुरू हो जाता था और वे भले ही संगीत को समझ नहीं पाती थीं, लेकिन आनंद जरूर लेती थीं। उनके पिता जन्मदिन पर घर में केक नहीं काटते थे, बल्कि घर पर ही मित्रों के साथ मिलकर संगीत की बैठकी लगाते थे। 12 साल की उम्र तक आते-आते रेखा ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा शुरू कर दी। ठुमरी और शास्त्रीय संगीत ने न केवल उनकी आवाज को, बल्कि उनकी आत्मा को भी आकार दिया। आठ साल के रियाज के बाद उन्हें एहसास हुआ कि गायन, खासकर गजल, ही उनका सच्चा जुनून है। वह अक्सर कहती हैं, "पिछले जन्म में मेरा दिल टूटा हुआ रहा होगा।"
सिंगर ने समारोह में गाना शुरू किया और कॉलेज में भी अपनी आवाज में आई गजलों से लोगों का दिल जीत लेती थी। 1984 में कॉलेज में उनकी मुलाकात विशाल भारद्वाज से हुई थी। उस मुलाकात ने रेखा की पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों को बदलकर रख दिया। साल 1991 में विशाल भारद्वाज और रेखा ने शादी कर ली। रेखा ने कभी नहीं सोचा था कि वे फिल्मों के गानों में आवाज देंगी, क्योंकि इंडस्ट्री उनकी अलग आवाज के लिए तैयार नहीं थी और हर मौके पर रिजेक्शन झेलने को मिला, लेकिन साल 2002 में विशाल भारद्वाज ने उनका एल्बम सॉन्ग 'इश्का इश्का' रिलीज किया, जिसके बोल गुलजार ने लिखे।
शुरुआती करियर में उन्होंने उन्हीं फिल्मों में गाया जिनमें विशाल भारद्वाज ने संगीत दिया। उन्होंने 'चाची 420', 'गॉडमदर', और 'जहां तुम ले चलो' जैसी फिल्मों के लिए गाया, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आवाज लोगों के दिलों में उतरने लगी और फिल्म 'ओमकारा' के गीत 'नमक इश्क का' ने उनकी जिंदगी बदलकर रख दी।
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