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अनंत चतुर्दशी पर बप्पा को विदाई पुणे में उमड़ा भक्तों का सैलाब
Ratna Netam
25 Sept 2026 5:05 PM IST

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पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणपति विसर्जन का भव्य जुलूस शुरू हुआ। दस दिनों तक चले गणेशोत्सव के अंतिम दिन शहर के पांच प्रतिष्ठित ‘मानाचे गणपति’ की मूर्तियां पारंपरिक क्रम में विसर्जन के लिए निकलीं। मंडई में पारंपरिक पूजा के बाद सुबह करीब 9:30 बजे मानाचा पहला गणपति कसबा गणपति जुलूस में शामिल हुआ। इसके साथ ही पुणे की ऐतिहासिक गणेश विसर्जन यात्रा का औपचारिक आगाज हो गया।पुणे का गणपति विसर्जन जुलूस शहर की सबसे प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। हर साल अनंत चतुर्दशी पर हजारों श्रद्धालु गणपति बप्पा को विदाई देने के लिए सड़कों पर उतरते हैं। शुक्रवार को भी सुबह से ही मध्य पुणे की सड़कों पर भक्तों की भीड़ दिखाई दी। ढोल-ताशों की गूंज और ‘गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या’ के जयकारों के बीच श्रद्धालु अपने आराध्य को विदाई देते नजर आए।पुणे के पांच ‘मानाचे गणपति’ में कसबा गणपति को पहला स्थान प्राप्त है। इसके बाद क्रमशः तांबडी जोगेश्वरी गणपति, गुरुजी तालीम गणपति, तुलसीबाग गणपति और केसरीवाड़ा गणपति का स्थान है। विसर्जन यात्रा में भी इसी पारंपरिक क्रम का पालन किया जाता है। पांचों गणपति शहर के सार्वजनिक गणेशोत्सव में विशेष सम्मान रखते हैं और इनके निकलने के बाद अन्य प्रमुख सार्वजनिक गणेश मंडलों की विसर्जन यात्राएं मुख्य मार्गों पर आगे बढ़ती हैं।
शुक्रवार सुबह मंडई स्थित लोकमान्य तिलक की प्रतिमा के पास पारंपरिक कार्यक्रम के बाद कसबा गणपति की यात्रा आगे बढ़ी। कसबा गणपति को पुणे का ग्रामदैवत भी माना जाता है। इसकी मूर्ति पारंपरिक चांदी की पालकी में विसर्जन यात्रा के लिए निकाली गई। इसके पीछे बाकी चार मानाचे गणपति ने अपने निर्धारित क्रम में यात्रा शुरू की।विसर्जन यात्रा को देखने के लिए रास्तों के दोनों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक जमा हुए। पुणे के अलावा दूसरे शहरों और क्षेत्रों से भी लोग इस आयोजन को देखने पहुंचे। ANI से बातचीत में एक श्रद्धालु ने पुणे के गणेशोत्सव को लोगों को जोड़ने वाला उत्सव बताते हुए कहा कि यहां दूर-दूर से लोग आते हैं और यह आयोजन एक पारिवारिक मिलन जैसा महसूस होता है। श्रद्धालु ने सभी जातियों और धर्मों के लोगों के साथ मिलकर उत्सव मनाने की बात कही और बप्पा की विदाई के समय भावुक होने का भी जिक्र किया।दस दिनों तक पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद अनंत चतुर्दशी पर गणेशोत्सव का समापन हो रहा है। इस मौके पर श्रद्धालुओं में उत्साह के साथ भावुकता भी दिखाई दी। भक्त भगवान गणेश से अगले वर्ष जल्दी आने की प्रार्थना करते हुए उन्हें विदाई दे रहे हैं।
मानाचे पांच गणपति के बाद शहर के 600 से अधिक सार्वजनिक गणेश मंडलों के मुख्य विसर्जन मार्गों से गुजरने की संभावना है। विसर्जन के लिए लक्ष्मी रोड, तिलक रोड, केलकर रोड और कुमठेकर रोड चार प्रमुख मार्ग हैं। ये रास्ते आगे अलका टॉकीज चौक की ओर मिलते हैं। बड़ी संख्या में मंडलों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए शहर के मध्य हिस्से में व्यापक यातायात प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं।पुणे पुलिस ने गणेश विसर्जन को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। शहरभर में करीब 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और भीड़ तथा जुलूसों की निगरानी के लिए 3,500 से अधिक कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्य विसर्जन मार्गों पर यातायात को चरणबद्ध तरीके से रोका और डायवर्ट किया गया है।पुलिस ने जुलूस को व्यवस्थित रखने के लिए ढोल-ताशा समूहों के प्रदर्शन से जुड़े कुछ नियम भी लागू किए हैं। प्रमुख चौकों पर प्रत्येक ढोल-ताशा समूह को अधिकतम 15 मिनट तक प्रदर्शन की अनुमति दी गई है। प्रत्येक मंडल के साथ अधिकतम दो ढोल-ताशा समूह रखने की व्यवस्था की गई है, ताकि जुलूस लंबे समय तक एक ही स्थान पर न रुके और भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
यातायात व्यवस्था के तहत शहर की 17 प्रमुख सड़कों को अलग-अलग चरणों में बंद करने की व्यवस्था की गई है। इनमें लक्ष्मी रोड, तिलक रोड, केलकर रोड, कुमठेकर रोड, बाजीराव रोड, शिवाजी रोड और शहर के अन्य प्रमुख मार्ग शामिल हैं। भारी वाहनों के प्रवेश पर भी 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया गया है। कुछ गणेश मंडलों की गतिविधियों की निगरानी के लिए GPS आधारित ट्रैकिंग व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।पुणे महानगरपालिका ने विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। 15 प्रमुख विसर्जन घाटों पर करीब 120 लाइफगार्ड और 37 दमकलकर्मियों को तैनात किया गया है। शहर में पर्यावरण अनुकूल विसर्जन के लिए कृत्रिम हौद, लोहे की टंकियां और मूर्ति संग्रह केंद्र जैसी व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।पुणे में सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रहा है। मानाचे पांच गणपति इस परंपरा में विशेष स्थान रखते हैं और हर वर्ष इन्हीं से मुख्य विसर्जन यात्रा की शुरुआत होती है। शुक्रवार को भी इसी परंपरा के तहत कसबा गणपति ने जुलूस का नेतृत्व किया और इसके बाद अन्य चार सम्मानित गणपति आगे बढ़े।दस दिनों तक गणपति बप्पा की आराधना के बाद अब पुणे उन्हें भावपूर्ण विदाई दे रहा है। शहर की सड़कों पर ढोल-ताशों की आवाज, जयकारों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच उत्सव अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गया है। मानाचे गणपति की यात्रा के बाद सैकड़ों अन्य मंडलों की विसर्जन यात्राएं जारी रहेंगी और पुणे में बप्पा की विदाई का यह सिलसिला देर रात तक चलने की संभावना है।
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