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35 साल बाद भी शादियों की शान है रेखा का देसी गीत

Saba Naaz
22 July 2026 2:58 PM IST
35 साल बाद भी शादियों की शान है रेखा का देसी गीत
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मनोरंजन: हिंदी सिनेमा के कई ऐसे गाने हैं, जो समय बीतने के साथ और ज्यादा लोकप्रिय होते चले जाते हैं। कुछ गीत सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लोगों की परंपराओं और यादों का हिस्सा बन जाते हैं। ऐसा ही एक सदाबहार गीत दिग्गज अभिनेत्री रेखा की फिल्म से जुड़ा हुआ है, जो पिछले करीब 35 सालों से गांव-देहात की शादियों में ढोलक की थाप पर खूब सुनाई देता है।

वेटरन एक्ट्रेस रेखा का यह लोकप्रिय गीत आज भी महिला संगीत और शादी समारोहों की रौनक बढ़ाता है। खास बात यह है कि इस गाने को सुरों की कोकिला कही जाने वाली लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज दी थी। उनकी आवाज और शानदार संगीत ने इस गीत को ऐसा बना दिया कि कई पीढ़ियां गुजरने के बाद भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है।

यह गीत साल 1991 में रिलीज हुई फिल्म 'फूल बने अंगारे' से लिया गया है। फिल्म में रेखा पर फिल्माया गया गाना 'छोरी कब से हुई जवां...' आज भी देसी शादियों में खास जगह रखता है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में जब शादी से पहले महिलाओं का संगीत कार्यक्रम होता है, तब ढोलक के साथ इस गीत को गाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

भारतीय शादियों में महिला संगीत का अपना अलग महत्व होता है। शादी से कई दिन पहले घरों में महिलाएं एकत्र होकर ढोलक बजाती हैं और पारंपरिक विवाह गीत गाती हैं। इन गीतों में खुशी, उत्साह और रिश्तों की भावनाएं जुड़ी होती हैं। इसी परंपरा में रेखा का यह गीत भी शामिल हो गया है, जिसे महिलाएं आज भी उत्साह के साथ गाती हैं।

फिल्म में भी इस गाने को शादी समारोह के माहौल में फिल्माया गया था। यही वजह रही कि यह गीत वास्तविक जीवन की शादियों से भी जुड़ गया। इसकी धुन और बोल इतने सरल और आकर्षक हैं कि ढोलक पर बजाने के बाद इसका असर और भी बढ़ जाता है। गांवों और छोटे शहरों में आज भी शादी के मौके पर महिलाएं इस गाने को अपनी पारंपरिक शैली में गाती नजर आती हैं।

इस गीत की लोकप्रियता के पीछे सिर्फ रेखा की शानदार अदाकारी ही नहीं, बल्कि लता मंगेशकर की जादुई आवाज भी एक बड़ी वजह है। लता जी ने अपनी सुरीली आवाज से इस गाने को अमर बना दिया। उनकी गायकी ने गीत में ऐसी मिठास भर दी, जो आज भी श्रोताओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।

इसके अलावा इस गाने के संगीत को मशहूर संगीतकार बप्पी लहरी ने तैयार किया था। बप्पी लहरी अपनी अलग शैली और यादगार धुनों के लिए जाने जाते थे। उन्होंने इस गीत में ऐसी धुन तैयार की, जो सुनने में आसान होने के साथ-साथ शादी के माहौल के लिए बिल्कुल उपयुक्त थी। गीतकार अंजान ने इसके बोल लिखे थे, जिनमें देसी अंदाज और पारंपरिक भावनाओं की झलक देखने को मिलती है।

बॉलीवुड में कई ऐसे गाने हैं, जो शादी समारोहों में बजते हैं, लेकिन रेखा का यह गीत अपनी अलग पहचान रखता है। इसकी खासियत यह है कि यह सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और शादी की परंपराओं का हिस्सा बन चुका है।

आज के दौर में जहां शादी समारोहों में नए जमाने के गानों का चलन बढ़ गया है, वहीं पुराने सदाबहार गीतों की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। रेखा का 'छोरी कब से हुई जवां...' इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। 35 साल बाद भी यह गीत देसी शादियों में उसी उत्साह और खुशी के साथ गाया जाता है, जैसे अपनी रिलीज के समय गाया जाता था।

यह गीत साबित करता है कि अच्छे संगीत और मधुर आवाज की कोई उम्र नहीं होती। समय बदल सकता है, संगीत का अंदाज बदल सकता है, लेकिन कुछ गाने हमेशा लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए रखते हैं। रेखा, लता मंगेशकर और बप्पी लहरी की यह शानदार पेशकश आज भी शादी समारोहों की रौनक बढ़ाने का काम कर रही है।

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