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दूरदर्शन के आइकॉनिक गीत ने रचा था इतिहास
भारत में देशभक्ति गीतों की बात हो और दूरदर्शन के ऐतिहासिक गीत "मिले सुर मेरा तुम्हारा" का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। करीब 33 साल पहले आए इस गीत ने पूरे देश को एक सुर में बांधने का काम किया था। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और क्षेत्रों को जोड़ने वाले इस गीत ने लोगों के दिलों में एक खास जगह बनाई।
15 अगस्त 1988 को पहली बार प्रसारित हुए इस गीत को दूरदर्शन ने राष्ट्रीय एकता और विविधता में एकता के संदेश के साथ पेश किया था। प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद इसका प्रसारण किया गया था।
एक गीत, कई भाषाएं और पूरा भारत
"मिले सुर मेरा तुम्हारा" सिर्फ एक गाना नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बन गया। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और परंपराओं को दिखाया गया था। गीत में हिंदी के साथ-साथ कई भारतीय भाषाओं को शामिल किया गया, जिससे यह पूरे देश की आवाज बन गया। इस गीत में संगीत, खेल और फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियों ने हिस्सा लिया था। हर कलाकार ने अपनी पहचान के साथ भारत की एकता का संदेश दिया।
चार दिग्गज गायकों की आवाज ने बनाया यादगार
इस ऐतिहासिक गीत में कई प्रसिद्ध गायकों ने अपनी आवाज दी थी। इसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान कलाकार पंडित भीमसेन जोशी, एम. बालमुरलीकृष्णा और स्वर कोकिला लता मंगेशकर जैसी महान हस्तियां शामिल थीं। इन आवाजों के मेल ने गीत को एक अलग ऊंचाई दी। शास्त्रीय संगीत की गंभीरता और देशभक्ति की भावना ने इसे हर उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय बना दिया।
पंडित भीमसेन जोशी का खास योगदान
इस गीत की संगीत रचना पंडित भीमसेन जोशी से जुड़ी रही। उन्होंने भारतीय संगीत की परंपरा को आधुनिक प्रस्तुति के साथ जोड़ने का काम किया। गीत को राग भैरवी के आधार पर तैयार किया गया था, जिससे इसमें भारतीय संगीत की मिठास महसूस होती है। उनकी दमदार आवाज में गीत की शुरुआत आज भी लोगों को भावुक कर देती है।
गीत के पीछे थी बड़ी सोच
इस गीत का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं था। इसके जरिए देश के लोगों को यह संदेश दिया गया कि भाषा, पहनावे और संस्कृति अलग होने के बावजूद पूरा भारत एक है। गीत के निर्माण में लोक सेवा संचार परिषद और दूरदर्शन की अहम भूमिका रही। इसे कैलाश सुरेंद्रनाथ और उनकी टीम ने तैयार किया था।
आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है गीत
समय बदल गया, टेलीविजन की दुनिया बदल गई, लेकिन "मिले सुर मेरा तुम्हारा" की लोकप्रियता आज भी कायम है। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और राष्ट्रीय कार्यक्रमों के दौरान यह गीत आज भी लोगों को पुराने दौर की याद दिलाता है।
90 के दशक में जन्मे लोगों के लिए यह गीत बचपन की यादों से जुड़ा हुआ है। दूरदर्शन पर आने वाले इस गीत का इंतजार लोग खास तौर पर करते थे।
सोशल मीडिया दौर में फिर लौटी लोकप्रियता
आज इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में भी यह गीत लगातार चर्चा में रहता है। नई पीढ़ी भी इसे देखकर भारत की सांस्कृतिक विविधता को समझती है। कई लोगों के लिए यह गीत सिर्फ एक धुन नहीं बल्कि देश की एकता और भावनाओं का प्रतीक है।
क्यों खास है "मिले सुर मेरा तुम्हारा"?
इस गीत की सबसे बड़ी खासियत थी कि इसमें किसी एक राज्य या भाषा को प्राथमिकता नहीं दी गई। इसमें पूरे भारत की तस्वीर दिखाई गई। यही वजह है कि रिलीज के दशकों बाद भी यह गीत लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है।
"मिले सुर मेरा तुम्हारा" ने साबित किया कि संगीत सीमाओं को मिटाकर लोगों को जोड़ सकता है। यह गीत भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे यादगार देशभक्ति गीतों में हमेशा शामिल रहेगा।
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