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Entertainment मनोरंजन : टेलिविजन से लेकर वेब सीरीज और फिल्मों तक में अपनी एक्टिंग का जादू बिखेरती दिव्यांका त्रिपाठी दहिया आज एक ऐसा नाम हैं, जिन्हें दर्शकों ने सिर्फ पसंद ही नहीं किया बल्कि अपने दिल में जगह दी है। एक वक्त था, जब भोपाल की गलियों से निकलकर दूरदर्शन और रेडियो तक पहुंचने वाली इस लड़की ने सपनों की उड़ान भरी और मुंबई की चमक-धमक भरी दुनिया में अपनी सादगी और दमदार अभिनय से खास पहचान बनाई।
माता-पिता की सीख और विश्वास को अपनी सबसे बड़ी ताकत मानने वाली दिव्यांका आज भी कहती हैं, ‘अगर पैरंट्स ने मुझे एक्सप्लोर नहीं कराया होता तो शायद मैं खुद को जान नहीं पाती।’ हर रिश्ते में भरोसे और फ्रीडम की बात करने वाली दिव्यांका, इंडस्ट्री में महिला-केंद्रित कहानियों की कमी को लेकर थोड़ा उदास हैं। बीते दिनों जब कलाकारा जब नवाबों की नगरी लखनऊ आईं तो इस खास मुलाकात में हमने की उनसे खुलकर बातचीत। मुझे लगता है कि मेरी जिंदगी में सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम मेरे माता-पिता रहे हैं। अगर वे मेरे हुनर को पहचान नहीं पाते तो शायद मैं यहां तक नहीं पहुंचती। उन्होंने मुझे सिर्फ एक दिशा में ढालने की कोशिश नहीं की बल्कि मुझे अलग-अलग विधाओं से रूबरू कराया।
मैंने कुछ साल भरतनाट्यम सीखा, भोपाल के बड़े तालाब में वॉटर स्कीइंग की, लाल परेड ग्राउंड में पुलिस के घोड़ों के साथ हॉर्स राइडिंग की, एनसीसी, माउंटनियरिंग की ट्रेनिंग ली, ड्रॉइंग और स्कैचिंग भी सीखी। मैं बोलती रहूंगी तो लंबी लाइन लग जाएगी। वहीं, इन सबके बीच दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो में भी काम किया, जो महज संयोग से शुरू हुआ था। हालांकि, माता-पिता ने मेरा रुझान पहचाना और मुझे लगातार प्रोत्साहित किया। मैं सबसे यही कहना चाहती हूं कि बच्चों को सिर्फ वही न सिखाएं जो आपको पसंद है। उन्हें हर चीज आजमाने दें। आपके बच्चे में छिपा हुनर शायद आपसे भी छिपा हो। मेरे पैरंट्स ने मुझ पर भरोसा किया और मुंबई भेजने का भी साहस दिखाया। उसी भरोसे ने उन्हें समाज के सामने खड़े होने की ताक़त दी और मुझे सही राह पर चलने की प्रेरणा।
अच्छी स्क्रिप्ट मिले तो झट से हां कह दूंगी दिव्यांका बोलीं, आजकल टेलिविजन में राइटिंग को लेकर लोगों में काफी असंतोष है और यह सही भी है। हां, टीवी काफी हद तक फॉर्म्युला-ड्रिवन हो गया है, लेकिन इसका दोष अकेले टीवी को देना ठीक नहीं। यह ट्रांजिशन का दौर है, जो पूरी इंडस्ट्री को प्रभावित कर रहा है, चाहे वो वेब सीरीज हों या फिल्में। सभी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। हर कोई बड़ा जोखिम लेने से डर रहा है। हालांकि, यह ईमानदारी से कहना चाहूंगी कि मैं आज भी टीवी से उतना ही प्यार करती हूं, जितना पहले करती थी। अगर कोई अच्छी स्क्रिप्ट या शो मिले तो मैं तुरंत उसके लिए हां कह दूंगी क्योंकि टीवी पर ऐक्टर को बहुत कुछ एक्सप्लोर करने का मौका मिलता है।
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