
मुंबई | शाहिद कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘देवा’ को लेकर जबरदस्त बज़ था, लेकिन रिलीज़ के बाद यह फिल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी। यह एक्शन और थ्रिलर से भरपूर एक रीमेक है, लेकिन दर्शकों को न तो इसकी कहानी ने प्रभावित किया और न ही इसका प्रेजेंटेशन। फिल्म को बड़े पैमाने पर क्रिएट किया गया है, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट कमजोर और नीरस लगती है।
रीमेक का फीका स्वाद – यह फिल्म तमिल हिट ‘थानी ओरुवन’ का रीमेक है, लेकिन इसमें ओरिजिनल का जादू गायब है।
शाहिद कपूर की एक्टिंग अच्छी, लेकिन स्क्रिप्ट का सहारा नहीं – शाहिद ने दमदार परफॉर्मेंस देने की कोशिश की, लेकिन कमजोर कहानी और संवादों ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया।
एक्शन अच्छा, लेकिन बेमतलब – फिल्म में कई हाई-ऑक्टेन एक्शन सीन हैं, लेकिन उनमें वह इमोशनल कनेक्शन नहीं जो दर्शकों को बांध सके।
विवादित प्रस्तुतिकरण – फिल्म पर अल्पसंख्यकों के गलत चित्रण और पक्षपातपूर्ण नैरेटिव का आरोप भी लग रहा है, जिससे इसकी और आलोचना हो रही है।
क्या ‘देवा’ देखने लायक है?
अगर आप शाहिद कपूर के फैन हैं और एक्शन फिल्में पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपको एंटरटेन कर सकती है। लेकिन अगर आप स्ट्रॉन्ग स्टोरी और ओरिजिनलिटी की तलाश में हैं, तो शायद यह आपको निराश कर सकती है।





